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sanjiv verma salil
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नागनाथ साँपनाथ, जोड़ते मिले हों हाथ, मतदान का दिवस, फिर निकट है मानिए। चुप रहे आज तक, न रहेंगे अब चुप, ई वी एम से जवाब, दें न बैर ठानिए।।सारी गंदगी की जड़, दलवाद है 'सलिल', नोटा का बटन चुन,  निज मत बताइए- लोकतंत्र जनतंत्र, प्रजातंत्र गणतंत्र, कै...
 पोस्ट लेवल : chunav ghanakshari घनाक्षरी चुनाव
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घनाक्षरी सलिला :छत्तीसगढ़ी में अभिनव प्रयोग.संजीव 'सलिल'*अँचरा मा भरे धान, टूरा गाँव का किसान, धरती मा फूँक प्राण, पसीना बहावथे.बोबरा-फार बनाव, बासी-पसिया सुहाव, महुआ-अचार खाव, पंडवानी भावथे..बारी-बिजुरी बनाय, उरदा के पीठी भाय, थोरको न ओतियाय, टूरी इठलावथे.भारत के...
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रचना - प्रति रचना:समुच्चय और आक्षेप अलंकारघनाक्षरी छंद*गुरु सक्सेना नरसिंहपुर मध्य प्रदेश*दुर्गा गणेश ब्रह्मा विष्णु महेश पांच देव मेरे भाग्य के सितारे चमकाइयेपांचों का भी जोर भाग्य चमकाने कम पड़ेरामकृष्ण जी को इस कार्य में लगाइए।रामकृष्ण जी के बाद भाग्य ना चमक सकेल...
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चित्र पर रचनाछंद: कवित्त, घनाक्षरी. मनहरणविधान: वर्ण ८,८,८,७  पदांत गुरु* श्रीधर प्रसाद द्विवेदीकंचन वरण अंग वसन सपीत रंग, कंचन के आभरण सोह अंग अंग हैं।बेंदीसँग बेसरकी संगति लावण्यमयी,  कंचन के कंकण नगीने बहु रंग हैं।श्रवण समीप लोल कुण्डल सुडौल गोल,&...
 पोस्ट लेवल : ghanakshari घनाक्षरी
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सावनी घनाक्षरियाँ :सावन में झूम-झूमसंजीव वर्मा "सलिल"*सावन में झूम-झूम, डालों से लूम-लूम,झूला झूल दुःख भूल, हँसिए हँसाइये. एक दूसरे की बाँह, गहें बँधें रहे चाह,एक दूसरे को चाह, कजरी सुनाइये..दिल में रहे न दाह, तन्नक पले न डाह,मन में भरे उछाह, पेंग को बढ़ाइए.राखी की...
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कार्यशाला: रचना-प्रति रचना घनाक्षरी  फेसबुक*गुरु सक्सेना नरसिंहपुर मध्य प्रदेश*चमक-दमक साज-सज्जा मुख-मंडल पैतड़क-भड़क भी विशेष होना चाहिए।आत्म प्रचार की क्रिकेट का हो बल्लेबाजलिस्ट कार्यक्रमों वाली पेश होना चाहिए।।मछली फँसानेवाले काँटे जैसी शब्दावलीहीरो ज...
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कल और आज: घनाक्षरीकल :कज्जल के कूट पर दीप शिखा सोती है कि,श्याम घन मंडल मे दामिनी की धारा है ।भामिनी के अंक में कलाधर की कोर है कि,राहु के कबंध पै कराल केतु तारा है ।शंकर कसौटी पर कंचन की लीक है कि,तेज ने तिमिर के हिये मे तीर मारा है ।काली पाटियों के बीच मोहनी की म...
 पोस्ट लेवल : संजीव ghanakshari sanjiv घनाक्षरी
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 घनाक्षरी- संजीव 'सलिल'०३. फूँकता कवित्त प्राण, डाल मुरदों में जान, दीप बाल अंधकार, ज़िन्दगी का हरता।           नर्मदा निनाद सुनो,सच की ही राह चुनो, जीतता सुधीर वीर, पीर पीर सहता।।    &n...
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घनाक्षरी या कवित्त *चतुष्पदी मुक्तक छंद घनाक्षरी के पदों में वर्ण-संख्या निश्चित होती हैं किंतु छंद के पद वर्ण-क्रम या मात्रा-गणना से मुक्त होते हैं। किसी अन्य वर्णिक छंद की तरह इसके गण (वर्णों का नियत समुच्चय) व्यवस्थित नहीं...
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घनाक्षरी, संजीव, ghanakshari, sanjiv, chhand, छंद, .गीत-ग़ज़ल गाइये / डूबकर सुनाइए / त्रुटि नहीं छिपाइये / सीखिये-सिखाइएशिल्प-नियम सीखिए / कथ्य समझ रीझिए / भाव भरे शब्द चुन / लय भी बनाइएबिम्ब नव सजाइये / प्रतीक भी लगाइये / अलंकार कुछ नये / प्रेम से सजा...