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Devendra Gehlod
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सामने कारनामे जो आने लगे,आईना लोग मुझको दिखाने लगे |जो समय पर ये बच्चे ना आने लगे, अपने माँ बाप का दिल दुखाने लगे |फ़ैसला लौट जाने का तुम छोड़ दो, फूल आँगन के आँसू बहाने लगे |फिर शबे हिज़्र आँसूं मेरी आँख के, मुझको मेरी कहानी सुनाने लगे |आईने से भी रहते है वो दूर अब,ज...
 पोस्ट लेवल : arpit-sharma-arpit ghazal-poem
Devendra Gehlod
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जहन में वो तो ख्वाब जैसा है,वो बदन भी गुलाब जैसा है |बंद आँखों से पढ़ भी सकता हूँ,तेरा चेहरा किताब जैसा है |मेरी पलके झुकी है सजदे में,दिल भी गंगा के आब जैसा है |हर घड़ी ज़िक्र तेरा करता हूँ,ये नशा भी शराब जैसा है | - अर्पित शर्मा "अर्पित"परिचयअर्पित शर्मा जी अर्पित उ...
 पोस्ट लेवल : arpit-sharma-arpit ghazal-poem
Devendra Gehlod
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उनके हाथो से चरणामृत पी,सदियों तक अपना बनाना चाहती हूँ |भाव-सागर में भटक ना जाऊं कही,अपने जीवन का मांझी बनाना चाहती हूँऐ करवा माँ मुझे वरदान दे सती-सामै उनको अमर बनाना चाहती हूँऐ माँ मुझे ताकत दे तलवार-सीउनके हर कष्ट काट गिराना चाहती हूँहाथो में मेहंदी, मांग में सि...
 पोस्ट लेवल : ghazal-poem ramesh-dev-singhmaar
Devendra Gehlod
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उनके चेहरे से जो मुस्कान चली जाती है,मेरी दौलत मेरी पहचान चली जाती है।जिंदगी रोज गुजरती है यहाँ बे मक़सद,कितने लम्हों से वो अंजान चली जाती है।तीर नज़रों के मेरे दिल में उतर जाते हैं,चैन मिलता ही नहीं जान चली जाती है।याद उनकी जो भुलाने को गए मैखाने,वो तो जाती ही नहीं...
 पोस्ट लेवल : ghazal-poem milan-saheb
Devendra Gehlod
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उसको हैरत में डालना है मुझे,और दिल से निकालना है मुझे |एहतियातो से उसको छूना है,अपना दिल भी संभालना है मुझे |तेरे और मेरे नाम का दीपक,आसमां में उछालना है मुझे |दश्त प्यासा है मेरे दिल का बहुत,यानि दरिया निकालना है मुझे |शाम होते ही से जो आती,ऐसी यादो को टालना है मु...
 पोस्ट लेवल : arpit-sharma-arpit ghazal-poem
Devendra Gehlod
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अमृतसर में रावण पुतला दहन के दौरान हुए रेल दुर्घटना में सैकड़ों लोगों के मारे जाने पर हरिवंशराय बच्चन की लिखी यह कविता आज के दौर में प्रासंगिक लगी। आप सभी के लिए पेश है :ना दिवाली होती और ना पठाखे बजतेना ईद की अलामत, ना बकरे शहीद होतेतू भी इन्सान होता, मैं भी इन्सा...
 पोस्ट लेवल : ghazal-poem harivansh-rai-bachchan
Devendra Gehlod
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यह कविता मैंने करीब चार साल पहले 2011 में लिखी थी । यह उनकी timeline से लिया गया है देवेन्द्र गेहलोदकुछ दिनों से समाचार पत्रों में इंदौर में हुई घटनाओं को पढकर बड़ा अफ़सोस होता है जहा हर शहरवासी दूसरे पर आसानी से भरोसा कर सकता था हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल दी जाती थ...
 पोस्ट लेवल : ghazal-poem Devendra-dev diary
Devendra Gehlod
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उस सुनी राह पे वो अकेला मौजूद हैभले वो इंसान नहीं लेकिन उसका भी वजूद हैफैली हुई है उसकी सब शाखेउसे सिर्फ ज़माने का भला करना मंज़ूर हैहोते है उसपे हमले तो हुआ करेउसे तो बस नेकी किये जाने का सुरूर है - देवेन्द्र देव Roman Us suni raah pe wo akela moujud haibhale wo ins...
 पोस्ट लेवल : ghazal-poem Devendra-dev diary
Devendra Gehlod
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खवाबो में आते है, आखिर कुछ तो बात होगीजाते हुए भी मुड़ते जाते है, आखिर कुछ तो बात होगीये दिल ठिकाने पे नहीं, न जाने क्या वजह हैहर जगह टकराते है वो, आखिर कुछ तो बात होगीसोचकर के हैरां हूँ सारे सिलसिलो कोहर सिलसिले में एक कड़ी है, आखिर कुछ तो बात होगीमै उन्हें मुतास्सि...
 पोस्ट लेवल : ghazal-poem Devendra-dev diary
Devendra Gehlod
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वो तेरी आँखे वो तेरा चेहरातेरी आँखों सा प्यार तेरा गहरा मेरे हर गुनाह को माफ कर देनाबना दिया मेरी शोहरत का पन्ना सुनहरामेरे जिस्म से छूकर तेरी खुशबु आयेतू दूर है तो मै हू प्यासा सहरा - देवेन्द्र देवwo teri aankhe wo tera chehrateri aankho sa pyar tera gahramere ha...
 पोस्ट लेवल : ghazal-poem Devendra-dev diary