ब्लॉगसेतु

राजीव तनेजा
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“हद हो गयी यार ये तो बेईमानी की…मुझ…मुझ पर विश्वास नहीं है पट्ठों को….सब स्साले बेईमान….मुझको…मुझको भी अपने जैसा समझ रखा है…एक एक..एक एक पाई का हिसाब लिखा हुआ है मेरे पास…जब चाहो…जहाँ चाहो...लैजर…खाते सब चैक करवा लो…. “क्या हुआ तनेजा जी?…किस पर राशन पानी ले...
राजीव तनेजा
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ट्रिंग ट्रिंग.. “हैलो….कौन बोल रहा है?”.. “डॉक्टर साहब घर पर हैं?”… “हाँ!…जी बोल रहा हूँ…आप कौन?”.. “जी!..मैं शर्मा… “शरमाइए  मत…सीधे सीधे फरमाइए कि…आप हैं कौन?”… “ज्ज…जी!…म्म..मैं… “अब यूँ ही मिमियाते रहेंगे या अपना नाम..पता ठिकाना कुछ बताएँग...