ब्लॉगसेतु

समीर लाल
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काश!! आशा पर आकाश के बदले देश टिका होता!! वैसे सही मायने में, टिका तो आशा पर ही है.जिन्दगी की दृष्टावलि उतनी हसीन नहीं होती जितनी फिल्मों में दिखती है. इसमें बैकग्राऊंड म्यूजिक म्यूट होता है, वरना तो जाने कब के गाँव जाकर बस गये होते. मुल्ला मचान पर बैठे, खेतों में...
समीर लाल
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बचपन से ही मैं बाँये हाथ से लिखता था. लिखने से पहले ही खाना खाना सीख गया था, और खाता भी बांये हाथ से ही था. ऐसा भी नहीं था कि मुझे खाना और लिखना सिखाया ही बाँये हाथ से गया हो लेकिन बस जाने क्यूँ, मैं यह दोनों काम ही बांये हाथ से करता.पहले पहल सब हँसते. फिर डाँट पड़न...
समीर लाल
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बचपन से परिचित - हम सहपाठी थे दर्जा आठ तक.फिर उसकी पढ़ाई की रफ्तार शनैः शनैः मद्धम पड़ गई और ११ वीं तक आते आते उसकी शिक्षा यात्रा ने उस वक्त के लिये दम तोड़ दिया.अक्सर मौहल्ले के चौराहे पर खड़ा दिखता ४-६ आवारा लड़कों के साथ. किसी ने बताया कि अब वो छोटी मोटी चोरी की वारद...
समीर लाल
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कोई सुन्दर बाला आपसे कहे कि वो २०-२० मैच में हिस्सा लेकर लौट रही है, तो सीधा दिमाग में कौंधता है कि चीयर बाला होगी. किसी के दिमाग में यह नहीं आता कि हो सकता है महिला लीग का २०-२० खेल कर लौट रही हो. वही हाल हमारा होता जा रहा है जब शाम हमारे घर लौटते समय कोई मिल जाये...
समीर लाल
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कुछ दिन पहले फ्रांस ने जब बच्चों को चपत लगाने को गैर कानूनी घोषित किया तो वो इस तरह का ५५ वाँ देश बना. सबसे पहले १९५७ में स्वीडन ने इसकी शुरुवात की थी. हमारा जन्म १९५७ के बाद हुआ. मगर जब किस्मत में पिटना लिखा हो तो कौन बचा सकता है? अतः भारत में पैदा हुए.शायद प...
समीर लाल
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आज सुबह से ही चौक पर भीड़ लगी है. विश्व कप चल रहा है. बिट्टू ने टीवी दुकान के बाहर निकाल कर रख दिया है. आज भारत पाकिस्तान का मैच होना है. पान की दुकान, चाय की दुकान सब आजू बाजू में ही हैं. कहीं भी बैठ लो और मैच के मजे लो.चौक पर मैच देखने का आनन्द ही अलग होता है. टीव...
समीर लाल
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हमारे शहर से ६० किमी दूर एक दूसरा शहर था. वहाँ पर स्टेशन के आलूबोंडे (बटाटा बडा) बहुत मशहूर थे. छुट्टी के दिन अक्सर हम मित्र लोग एक ट्रेन से जाते. छक कर आलूबोंडे खाते और दूसरी ट्रेन से लौट आते. रास्ते भर गप्प सटाका भी हो जाता. तब व्हाटसएप, फेसबुक आदि नहीं होते थे,...
समीर लाल
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इस बार देश में ऐसी भीषण गर्मी पड़ी कि अच्छे अच्छों की गरमी उतार कर रख दी.चुनाव की गरमी उतरी और बस, सूरज महाराज ने कमान थाम ली. मीडिया से कहने लगे कि अब हमें कवरेज दो. टीआरपी का मजा तुम लूटो और जबरदस्त कवरेज के कारण सेलीब्रेटी होने का मजा हम लूटेंगे. बस, फिर क्या था...
Sanjay  Grover
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व्यंग्यक्या आपने ट्रॉल को देखा है ?तो उनके बारे में सुना तो होगा !सुना है आजकल काफी मशहूर हो चले हैं।कई सेलेब्रिटीं कहती रहतीं हैं-‘क्या बताऊं यार, मेरे पीछें तो आजकल ट्रॉल पड़े हैं़:(कहने का मन होता है-‘फिर तो काफ़ी मशहूर हों आप!’ट्रॉल बदतमीज़ी करतेे होंगे पर कई साल...
समीर लाल
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सुजलाम सुफलाम, मलयज शीतलाम//शस्यश्यामलाम, मातरम//शुभ्रज्योत्स्ना पुलाकितायामिनिम//फुल्लाकुसुमिता द्रुमदला शोभिनीम//सुहासीनीम, सुमधुर भाषिणीम//सुखदम, वरदाम, मातरम//तिवारी जी भाव विभोर हुए मंच से आँख मींचे पूरे स्वर में गीत गा रहे थे. वे ’भाषा का स्तर और संयमित भाषा...