ब्लॉगसेतु

sanjiv verma salil
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आइए छंद खोजें:होली गीत-- "ब्रज की होली" सुनीता सिंह * फाग राग में डूब के मनवा राधे-राधे बोल रहा है। ३३ बाँसुरिया की तान पे मौसम शरबत मीठा घोल रहा है।। ३३ ब्रज की गली में घूम रही ग्वाल-बाल की टोलियाँ। २८ रंग-बिरंगे जल से भरी लहराती पिचका...
sangya tandon
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राग रंग तरंग, होली की उमंगराग आधारित होली के गीतों पर आधारित पॉडकास्ट नेचर का हर रंग आप पर बरसे हर कोई आपसे होली खेलने को तरसे रंग दे आपको सब मिलकर इतना कि वह रंग उतरने को तरसे....                  &n...
Kavita Rawat
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सखि! घर आयो कान्हा मेरे, खुशी से होली मनाओ री।झूमती हूँ खुशी के मारे, तुम संग-संग मेरे झूमो री।।उछलती कूदती मचलती, कभी खुशी से झूम उठती,भूलकर अपना बिच्छोह, पल-पल प्रिय गले लगती।कभी  प्रिय गले लगती, कभी खुशी के आसूं बहाती,कभी झूम-झूम, घूम-घूम कर गली-ग...
 पोस्ट लेवल : Holi geet