ब्लॉगसेतु

अपर्णा त्रिपाठी
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बुरा किसी को कहने सेबुराइयां गर होती खत्मशायद ये दुनिया जन्नत से भीकही ज्यादा होती हसीं जानते हो आप भी यकी ये हमे भी हैमहज चर्चा बुराइयों का करने सेजमीं जन्नत होगी नहीकहते है हम भीकहते हो आप भीजमाना खराब हुआ जाताहर जमाने की है ये कहीठहरो जरा सोचो जराकिससे बना ये सम...
 पोस्ट लेवल : humanity
Yash Rawat
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Picture courtesy : http://www.chrisrubino.com/कल्पनाओं, परिकल्पनाओं और विज्ञान ने मानव जाति के क्रमिक विकास में अभूतपूर्व योगदान दिया है जिसके कारण हम आज इस आधुनिक दुनिया में जी रहे हैं, लेकिन क्‍या आपने कभी कल्पना की है कि 100 करोड़ साल बाद मानव जीवन कैसा होगा।जैसा...
अपर्णा त्रिपाठी
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लकड़ी से सहारेपगडंडी के किनारे किनारे धीरे धीरे चलतेवृद्ध सेटकराता है सत्रह अठारह साल कामोबाइल पर वयस्त मार्ड्न युवकबिखर जाती है लाठी और दूसरे हाथ में मजबूती से पकडीकुछ दवाइयांलडखडा जाते है पैरयुवक हल्का सा रुकता है उतारता है रेबन के सन ग्लास कट करता है कॉलकानों से...
 पोस्ट लेवल : life humanity sorry
अपर्णा त्रिपाठी
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ममी रोजी ने देखो आज फिर मेरी फेवरेट डॉल तोड दी कहते हुये रीना किचन में अपनी गोद में रोजी को लेते हुये आयी। रीना की बातों में शिकायत कम प्यार ज्यादा था। रोजी को भी अहसास हुआ उसने कोई नुकसान नही किया बल्कि अपनी शैतानी से रीना को खुश ही किया है  तभी बाहर से कुछ ट...
 पोस्ट लेवल : A picture of humanity
डा.राजेंद्र तेला निरंतर
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It was office timeIt was office timeShrunken bellyTears in eyesThe starving childHopefully staredAt the passers byTo have mercy Give something to eatMake him surviveEverybody lookedPityingly at himNobody had time forThe starving childAvoiding fineReaching office in...
 पोस्ट लेवल : poverty child humanity Hunger Life
अपर्णा त्रिपाठी
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मार डालो साले को, मार डालो। भरी बाजार में देखते ही देखते चंद लोगो ने पीट पीट कर एक व्यक्ति को मार डाला। सबके देखते देखते वो लोग जो पीटने में सबसे आगे थे, भीड से निकल कर हवा की तरह गायब हो चुके थे। कुछ ही देर में बाजार का पूरा माहौल ही बदल गया था। एक जिंदा इन्सान अब...
 पोस्ट लेवल : life humanity
Mithilesh Singh
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तेरे हज़ार जवाबों से अच्छी मेरी ख़ामोशी, न जाने कितने सवालों की आबरू रख ली. यह एक शेर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज के सवालों के बाद कहा था. यूपीए से 10 वर्ष तक प्रधानमंत्री रहे डॉ. मनमोहन सिंह का देश की अर्थव्यवस्था को उदार...
अपर्णा त्रिपाठी
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ना जबान को किसी स्वाद की ख्वाइश थी, ना तन कभी फैशन के दायरों में बंध सका था, सुधा जी कितनी ही बार खीझ सी जाती थीं जब वो बिना नमक वाली दाल को भी ऐसे प्रेम से खा जाते थे जैसे कोई मोहन भोग हो। सारा जीवन ही तो उन्होने दो जोडी धोती और कुर्ते में काट दिया था, जीवन का हर...
 पोस्ट लेवल : life dedication humanity
अपर्णा त्रिपाठी
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मनोहर भइया आज हमार जी मा बार बार रहि रहि के जाने काहे ई बिचार आ रहा है जइसन हम कउनो दगा करा है। हमका कुच्छौ समझ नही आ रहा, का सही है का गलत। अब आपै हमका रास्ता दिखाओ।रहीम कल से राबर्ट कहलाने वाला था, गाँव में आये मिशनरी के लोगो से उसने घर की रोटियों के लिये धर्म पर...
 पोस्ट लेवल : poverty religion change humanity
अपर्णा त्रिपाठी
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चाह रहा मन आज लिखनाजो बचा सके इंसानियतएक लकीर खींचना उन दिलों मेंजो पूज रहे है हैवानियतकैसे मैं समझाऊं उनकोये नही खुदा की चाहतखून बहा कर नही मिली हैकभी किसी को राहतबहुत हो चुका, अब तो छोडोबदले की आग में जलनागोली बारुद के ढेरों परअब सौदे मौत के करनाजन्मा नही तुमको म...
 पोस्ट लेवल : humanity stop terminus innocent