ब्लॉगसेतु

sanjiv verma salil
5
पुस्तक चर्चा-संक्रांतिकाल की साक्षी कवितायेंआचार्य भगवत दुबे *[पुस्तक विवरण- काल है संक्रांति का, गीत-नवगीत संग्रह, आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल', प्रथम संस्करण २०१६, आकार २२ से.मी. x १३.५ से.मी., आवरण बहुरंगी, पेपरबैक जैकेट सहित, पृष्ठ १२८, मूल्य जन संस्करण २००/-...
sanjiv verma salil
5
निकष पर-काल है संक्रांति का[पुस्तक विवरण- काल है संक्रांति का, गीत-नवगीत संग्रह, आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल', प्रथम संस्करण २०१६, आकार २२ से.मी. x १३.५ से.मी., आवरण बहुरंगी, पेपरबैक जैकेट सहित, पृष्ठ १२८, मूल्य जन संस्करण २००/-, पुस्तकालय संस्करण ३००/-, समन्वय प्रकाश...
sanjiv verma salil
5
पुस्तक चर्चाकाल है संक्रांति का - एक सामयिक और सशक्त काव्य कृति- अमरेन्द्र नारायण*[पुस्तक विवरण- काल है संक्रांति का, गीत-नवगीत संग्रह, आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल', वर्ष २०१६, आवरण बहुरँगी, आकार डिमाई, पृष्ठ १२८, मूल्य सजिल्द ३००/-, पेपरबैक २००/-, समन्वय प्रकाशन...
sanjiv verma salil
5
समीक्षाकाल है संक्रांति काचंद्रकांता अग्निहोत्री *शब्द, अर्थ, प्रतीक, बिंब, छंद, अलंकार जिनका अनुगमन करते हैं और जो सदा सत्य की सेवा में अनुरत हैं, ऐसे मनीषी के परिचय को शब्दों में बाँधना कठिन है। इनकी कविताओं को प्रयोगवादी कविता कहा जा सकता है। काल है सं...
sanjiv verma salil
5
पुस्तक समीक्षा[समीक्ष्य कृति: काल है संक्रांति का,रचनाकार: आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल', प्रथम संस्करण २०१६, मूल्य: २००/-, आवरण: मयंक वर्मा, रेखांकन: अनुप्रिया, प्रकाशक-समन्वय प्रकाशन अभियान, ४०१ विजय अपार्टमेंट, नेपियर टाउन, जबलपुर, चलभाष: ७९९९५५९६१८, समीक्षक: डा. श्...
sanjiv verma salil
5
''काल है संक्रांति का'' एक काव्य-समीक्षा-राकेश खंडेलवाल---------------------------------------------------------------[पुस्तक परिचय - काल है संक्रांति का, गीत-नवगीत संग्रह, कवि आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल', प्रकाशक- समन्वय प्रकाशन अभियान, २०४ विजय अपार्टमेंट, नेपियर ट...
sanjiv verma salil
5
पुस्तक समीक्षा -नव आयामी नवगीत संग्रह 'काल है संक्रांति का' डाॅ. अंसार क़म्बरी*आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ जी का गीत-नवगीत संग्रह ‘‘काल है संक्रांति का’’ प्राप्त कर हार्दिक प्रसन्नता हुई। गीत हिन्दी काव्य की प्रभावी एवं सशक्त विधा है । इस विधा में कवि अपनी उत्कृष...
sanjiv verma salil
5
पुस्तक समीक्षा-संक्रांति-काल की सार्थक रचनाशीलता कवि चंद्रसेन विराट*आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' वह चमकदार हस्ताक्षर हैं जो साहित्य की कविता विधा में तो चर्चित हैं ही किन्तु उससे कहीं अधिक वह सोशल मीडिया के फेसबुक आदि माध्यमों पर बहुचर्चित, बहुपठित और बहुप्रशंसित...
sanjiv verma salil
5
समीक्षाकृति विवेचन- संजीव वर्मा ‘सलिल’ की काव्य रचना और सामाजिक विमर्श- डॉ. सुरेश कुमार वर्मा  *हिंदी जगत् मे साहित्यकार के रूप में संजीव 'सलिल' की पहचान बन चुकी है। यह उनके बहुआयामी स्तरीय लेखन के कारण संभव हो सका है। उन्होंने न केवल कविता, अपितु गद...
sanjiv verma salil
5
पुस्तक समीक्षा-- काल है संक्रांति का...डा श्याम गुप्त*समीक्ष्य कृति- काल है संक्रांति का...रचनाकार- आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल', प्रथम संस्करण- २०१६, मूल्य- २००/-, आवरण– मयंक वर्मा, रेखांकन- अनुप्रिया, प्रकाशक-समन्वय प्रकाशन अभियान, २०४ विजय अपार्टमेंट, नेपियर टाउन,...