ब्लॉगसेतु

Bharat Tiwari
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अवध नारायण मुद्गल की बेमिसाल कहानी "और कुत्ता मान गया"मैं जब साहब के घर से फाइलें लेकर काफी रात गए अपने घर लौटने लगता हूँ, कुत्ता पंजे उठा-उठाकर हाथ मिलाता है, गुड नाइट कहता है, गले मिलता है। मैं प्रसन्नता से भर उठता हूँ। लगता है, जैसे साहब भी हाथ मिला रहे हों, गले...
Dr. Mohd. Arshad Khan
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दादी को हज पर जाने में अभी दो महीने बाक़ी थे, पर उसकी तैयारियाँ उन्होंने अभी से शुरू कर दी थीं। एक पुरानी अटैची, जिसके कुंडों में ताला लटक जाता था, को धूप दिखाकर, अंदर अख़बार बिछाकर तैयार कर लिया था, उसमें वह रोज़ कुछ न कुछ सामान रखा करती थीं। उनके साथ अब्बू भी हज को...
 पोस्ट लेवल : Deshbhakti Bal Kahani
Bharat Tiwari
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विनीता शुक्ला जी को पहली दफ़ा पढ़ा है. पढ़कर इस बात की ख़ुशी है कि देशज भाषा का सुन्दर प्रयोग करते हए लिखी गयी सबल कहानी पढ़ने का आनंद मिला.भरत एस तिवारीदूसरी भग्गो —  विनीता शुक्लासुमेर मिसिर हिचकते हुए, उस दहलीज़ तक आ पहुंचे थे, जहाँ कभी आने की, सोच भी नहीं स...
Bharat Tiwari
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शर्मिला बोहरा जालान की कहानी ‘ई-मेल’ | Heart touching story in Hindi by Sharmila Bohra Jalan...शर्मिला बोहरा जालान किसी कहानी को कहने से पहले उस कहानी की सोच में गहरी पैठ तक जाने वाली युवा कहानीकार हैं. उनके लेखन से यह अहसास होता है कि जहाँ एक तरफ आज की पीढ़ी के वह...
Bharat Tiwari
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पगली कहीं की — संजय कुंदनगरिमा की नींद एक तेज आवाज से टूटी थी। लगा जैसे बगल के कमरे में किसी ने कुछ पटका हो। तो क्या विजय जाग गया है? उसने ही कोई सामान गिराया है या विजय के साथ कोई समस्या तो नहीं हुई? अब हुई भी तो क्या किया जा सकता है? गरिमा को इससे क्या मतलब।...
Bharat Tiwari
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उस दिन शायद पहली बार मैंने अपने पिताजी से पूछा था, "बाबा ये हिंदू क्या होता है ?" बाबा हँस दिए थे बस। दूसरे दिन यही बात मैंने जुबेर को बताई थी, तो उसने कहा था, "तू जानता है, मेरे अब्बा मुसलमान हैं और कहते हैं कि मैं भी मुसलमान हूँ।"अभी बड़े दिन पर डॉ सच्चिदानंद&nbsp...
Bharat Tiwari
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साहित्यिक-राजनीतिक वजहों से उपेक्षित कर दी गई धर्मवीर भारती की कहानी 'गुलकी बन्नो' अपनी कथावस्तु, विन्यास और विलक्षण विवरणात्मकता में प्रगतिशील परंपरा की अत्यंत महत्वपूर्ण यथार्थवादी कहानी है. — उदय प्रकाशगुलकी बन्नो: धर्मवीर भारतीDharamveer Bharti Short Stories in...
Bharat Tiwari
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दुनिया में आदमियों की दुनिया में औरतों की दुनिया... सवालों को टटोलती वरिष्ठ कथाकार मैत्रेयी पुष्पा की लेखनीपगला गई है भागवती!...मैत्रेयी पुष्पाकाम से उचटकर भागो की निगाह हवेली पर पड़ती है तो अपनी ही गली अनपहचान-सी मालूम होती है। रेत-भरी डगर पर दूधिया रोशनी...
Bharat Tiwari
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योगिता यादव की लेखनी को मैं सदैव कहानी की विषयवस्तु को बिलकुल ताज़ा लिखने वाली मानता हूँ ,'नई देह में नए देस में' उन्होंने मेरी यह धारणा और मजबूत की हैं, उन्हें बधाई देता हूँ.भरत एस तिवारी "दो औरतें जब आपस में मिलना चाहती हों तो उन्‍हें मिलने देना चाहिए। किसी को भी...
Bharat Tiwari
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एक बेहतरीन कहानी जैसे 'आवारा मसीहा' ...उसमें उसको ढूँढने की कोशिश में— मधु कांकरिया कुछ यादें बड़ी ढीठ होती हैं। अनजाने अनचाहे ही घर बना लेती हैं आपके भीतर और घरवाले की तरह हुकूमत करने लगती है। लाडो की याद भी शायद ऐसी ही थी। पता ही नहीं चला कब घर बना लिया था उस...