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sanjiv verma salil
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कवित्त घनाक्षरी विविध भाषाओँ मेंलाख़ मतभेद रहें, पर मनभेद न हों, भाई को हमेशा गले, हँस के लगाइए|लात मार दूर करें, दशमुख सा अनुज, शत्रुओं को न्योत घर, कभी भी न लाइए|भाई नहीं दुश्मन जो, इंच भर भूमि न दें, नारि-अपमान कर, नाश न बुलाइए|छल-छद्म, दाँव-पेंच, दन्द-फंद अपना...
sanjiv verma salil
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मुक्तक जी से लगाया है जी ने जो जी को जी में बसाया है जी ने भी जी कोजीना न आया, जीना गए चढ़ जी ना ना जी के बिना आज जी कोकवित्त *राम-राम, श्याम-श्याम भजें, तजें नहीं काम ऐसे संतों-साधुओं के पास न फटकिए। रूप-रंग-देह ही हो इष्ट जिन नारियों...
 पोस्ट लेवल : कवित्त muktak kavitta मुक्तक
sanjiv verma salil
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एक रचना*राम कहे राम-राम, सिया कैसे कहें राम?,                          होंठ रहे मौन थाम, नैना बात कर रहे।मौन बोलता है आज, न अधूरा रहे काज,                 ...
sanjiv verma salil
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 घनाक्षरी- संजीव 'सलिल'०३. फूँकता कवित्त प्राण, डाल मुरदों में जान, दीप बाल अंधकार, ज़िन्दगी का हरता।           नर्मदा निनाद सुनो,सच की ही राह चुनो, जीतता सुधीर वीर, पीर पीर सहता।।    &n...
sanjiv verma salil
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कवित्त *राम-राम, श्याम-श्याम भजें, तजें नहीं काम ऐसे संतों-साधुओं के पास न फटकिए। रूप-रंग-देह ही हो इष्ट जिन नारियों का भूलो ऐसे नारियों को संग न मटकिए।।प्राण से भी ज्यादा जिन्हें प्यारी धन-दौलत होऐसे धन-लोलुपों के साथ न विचरिए।जोड़-तोड़ अक्षरों क...
 पोस्ट लेवल : कवित्त संजीव kavitta sanjiv
sanjiv verma salil
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कवित्त *राम-राम, श्याम-श्याम भजें, तजें नहीं काम ऐसे संतों-साधुओं के पास न फटकिए। रूप-रंग-देह ही हो इष्ट जिन नारियों का भूलो ऐसे नारियों को संग न मटकिए।।प्राण से भी ज्यादा जिन्हें प्यारी धन-दौलत होऐसे धन-लोलुपों के साथ न विचरिए।जोड़-तोड़ अक्षरों क...
 पोस्ट लेवल : कवित्त संजीव kavitta sanjiv
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कवित्त *राम-राम, श्याम-श्याम भजें, तजें नहीं काम ऐसे संतों-साधुओं के पास न फटकिए। रूप-रंग-देह ही हो इष्ट जिन नारियों का भूलो ऐसे नारियों को संग न मटकिए।।प्राण से भी ज्यादा जिन्हें प्यारी धन-दौलत होऐसे धन-लोलुपों के साथ न विचरिए।जोड़-तोड़ अक्षरों क...
 पोस्ट लेवल : कवित्त संजीव kavitta sanjiv
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कवित्त *राम-राम, श्याम-श्याम भजें, तजें नहीं काम ऐसे संतों-साधुओं के पास न फटकिए। रूप-रंग-देह ही हो इष्ट जिन नारियों का भूलो ऐसे नारियों को संग न मटकिए।।प्राण से भी ज्यादा जिन्हें प्यारी धन-दौलत होऐसे धन-लोलुपों के साथ न विचरिए।जोड़-तोड़ अक्षरों क...
sanjiv verma salil
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घनाक्षरी या कवित्त *चतुष्पदी मुक्तक छंद घनाक्षरी के पदों में वर्ण-संख्या निश्चित होती हैं किंतु छंद के पद वर्ण-क्रम या मात्रा-गणना से मुक्त होते हैं। किसी अन्य वर्णिक छंद की तरह इसके गण (वर्णों का नियत समुच्चय) व्यवस्थित नहीं...
girish billore
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