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sanjiv verma salil
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दोहा सलिला:*मले उषा के गाल पर, सूरज छेड़ गुलालबादल पिचकारी लिए, फगुआ हुआ कमाल.*नीता कहती नैन से, कहे सुनीता-सैन.विनत विनीता चुप नहीं, बोले मीठे बैन.*दोहा ने मोहा दिखा, भाव-भंगिमा खूब.गति-यति-लय को रिझा कर, गया रास में डूब.*रोगी सिय द्वारे खड़ा, है लंकेश बुखार.भिक्षा...
 पोस्ट लेवल : दोहा सलिला 2018 ki laghukathayen
sanjiv verma salil
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नवगीत-दरक न पाऐँ दीवारेंहम में हर एक तीसमारखाॅंकोई नहीं किसी से कम ।हम आपस में उलझ-उलझकरदिखा रहे हैं अपनी दम ।देख छिपकली डर जाते परकहते डरा न सकता यम ।आॅंख के अंधे देख-न देखेंदरक रही हैं दीवारें ।*फूटी आॅंखों नहीं सुहातीहमें, हमारी ही सूरत ।मन ही मन में मनमाफि़कगढ़...
 पोस्ट लेवल : नवगीत 2018 ki laghukathayen
sanjiv verma salil
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लघुकथा शर संधान *आजकल स्त्री विमर्श पर खूब लिख रही हो। 'लिव इन' की जमकर वकालत कर रहे हैं तुम्हारी रचनाओं के पात्र। मैं समझ सकती हूँ। तू मुझे नहीं समझेगी तो और कौन समझेगा?अच्छा है, इनको पढ़कर परिवारजनों और मित्रों की मानसिकता ऐसे रिश्ते को स्वीकारने की...
 पोस्ट लेवल : laghukatha लघुकथा
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लघुकथाबेपेंदी का लोटा*'आज कल किसी का भरोसा नहीं, जो कुर्सी पर आया लोग उसी के गुणगान करने लगते हैं और स्वार्थ साधने की कोशिश करते हैं। मनुष्य को एक बात पर स्थिर रहना चाहिए।' पंडित जी नैतिकता का पाठ पढ़ा रहे थे।प्रवचन से ऊब चूका बेटा बोल पड़ा- 'आप कहते तो ठीक हैं लेकिन...
 पोस्ट लेवल : laghukatha लघुकथा
sanjiv verma salil
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लेख-लघु कथा - नव विधान और मूल्यों की आवश्यकता*पारंपरिक लघुकथा का उद्गम व् उपयोगिता -लघु कथा का मूल संस्कृत वांग्मय में है। लघु अर्थात देखने में छोटी, कथा अर्थात जो कही जाए, जिसमें कहने योग्य बात हो, बात ऐसी जो मन से निकले और मन तक पहुँच जाए। यह बात कहने का कोई उद्द...
sanjiv verma salil
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लघुकथा:काल की गति 'हे भगवन! इस कलिकाल में अनाचार-अत्याचार बहुत बढ़ गया है. अब तो अवतार लेकर पापों का अंत कर दो.' - भक्त ने भगवान से प्रार्थना की.' नहीं कर सकता.' भगवान् की प्रतिमा में से आवाज आयी .' क्यों प्रभु?''काल की गति.''मैं कुछ समझा नहीं.''समझो यह कि परिव...
 पोस्ट लेवल : laghukatha लघुकथा
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लघुकथा:गरम आँसू*टप टप टपचेहरे पर गिरती अश्रु-बूँदों से उसकी नीद खुल गयी, सास को चुपाते हुए कारण पूछा तो उसने कहा- 'बहुरिया! मोय लला से माफी दिला दे रे!मैंने बापे सक करो. परोस का चुन्ना कहत हतो कि लला की आँखें कौनौ से लर गयीं, तुम नें मानीं मने मोरे मन में संका को ब...
 पोस्ट लेवल : laghukatha लघुकथा
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लघुकथा सफेदपोश तबकादेश के विकास और निर्माण की कथा जैसी होती है वैसी दिखती नहीं, और जैसी दिखती है वैसी होती नहीं.... क्या कहा?, नहीं समझे?... कोई बात नहीं समझाता हूँ.किसी देश का विकास उत्पादन से होता है. उत्पादन सिर्फ दो वर्ग करते हैं किसान और मजदूर. उत्पादनकर्ता की...
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लघुकथादुहरा चेहरा *- 'क्या कहूँ बहनजी, सच बोला नहीं जाता और झूठ कहना अच्छा नहीं लगता इसीलिये कहीं आना-जाना छोड़ दिया. आपके साथ तो हर २-४ दिन में गपशप होती रही है, और कुछ हो न हो मन का गुबार तो निकल जाता था. अब उस पर भी आपत्ति है.'= 'आपत्ति? किसे?, आपको गलतफहमी...
sanjiv verma salil
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लघुकथा:प्यार ही प्यार *'बिट्टो! उठ, सपर के कलेवा कर ले. मुझे काम पे जाना है. स्कूल समय पे चली जइयों।' कहते हुए उसने बिटिया को जमीन पर बिछे टाट से खड़ा किया और कोयले का टुकड़ा लेकर दाँत साफ़ करने भेज दिया।झट से अल्युमिनियम की कटोरी में चाय उड़ेली और रात की बची...