ब्लॉगसेतु

Mahesh Barmate
384
वो पक्के रंग वाला लड़कालोग उसे कालातो कभी सांवला कहते थे।गोरा होना उसके बस में न था कभीबस अपने रंग में ढल जानाखुद को बुरा न मानकरबस खुद को अपनानाही था उसके बस में।और फिर उसने किसी गोरे को गोरा कहकरनीचा नहीं दिखायापर उसका रंगजाने क्यों गोरे लोगों को कमतर लगता ?आ...
 पोस्ट लेवल : mahesh Racism maahi bullies colour complexion
Mahesh Barmate
384
तुम्हें वो याद करता हैहाँ! फरियाद करता है।वो इश्क़ में तेरेउस दिन का इंतज़ार करता हैजिस दिन दिल से वो कहेकि वो सिर्फ तुमसे ही प्यार करता है।तेरी हाँ और न का उसे कोई फर्क नहीं है अबकि रूह के आशिक़ के पास कोई शर्त नहीं है अब।कुरबतें उसकी जरूरत नहीं थी कभीबस मुहब्बत में...
Mahesh Barmate
557
      एक वैश्विक महामारी (कोविड 19 या कोरोना वायरस) के दौर में अकेले बैठे - बैठे आज बस यूं ही याद आया कि कभी मैं डर की वकालत किया करता था, क्योंकि मैंने अक्सर डर को सकारात्मक रूप से आगे रख कर उससे जीत हासिल की है। अब आप सोच रहे होंगे कि म...
Mahesh Barmate
557
आज अपनी श्रीमती जी को, जो कि एक गृहिणी होने के स&...
Mahesh Barmate
557
भाई, मैंने अब तक की अपनी ज़िन्दगी में तरह - तरह के शौक रखने वाले देखे हैं, किसी को क्रिकेट देखने का शौक, तो किसी को क्रिकेट खेलने का शौक, किसी को कुछ खाने का शौक, तो किसी को कुछ पीने का शौक, लाखों तरह के शौक पालते हैं लोग। अब हिन्दी के मशहूर व्यंग्यकार "श्री विवेक र...
Mahesh Barmate
557
किसी गाँव में दो पति पत्नी के बीच की बातचीत.."अजी सुनते हो..""क्या हुआ..?""अरे! मैंने सुना है कि अपना बिजली का बिल माफ किया जा रहा है..""क.. क्या.. क्या बात कर रही हो भागवान..""हाँ! सही कह रही हूँ, अभी जब आप अपने नकारा और निकम्मे दोस्तों के साथ जुआ खेलने बाहर बैठे...
Mahesh Barmate
557
सदियों से इस देश में निचले वर्ग का शोषण हो रहा है, और अब तो ये रिवाज हो गया है। पहले जाति के नाम पर शोषण होता था, आज गरीबी और पद के नाम पर होता है। अमीरों के द्वारा गरीबों का शोषण तो पहले भी होता ही था और अब भी होता ही है, पर जाने कब से प्रथा सी बन गई है कि आप अगर...
Mahesh Barmate
384
कुछ अंदर दबा हुआ सा है चुभता है ठूंठ साअपनी आवाज को भी नहीं सुनता मैंचीखता हूँ गूँज सा। एक तरफ तन्हाइयों का शोर है दूजी तरफ ग़मों का सन्नाटा पसरा हुआ हैकिस तरफ रखूँ कदम अपने फर्श पे मेरा मैं बिखरा हुआ है। अपनी लाश पे चलकेनिकल जाना हैऐ दुनिया! तुझसे मेराऐसा ही रिश्ता...
 पोस्ट लेवल : tanhai kuch to hai hindi hindi poem mahesh barmate maahi
Mahesh Barmate
384
रौशनी तो कम हो गई थीपर आँखों के चरागअब भी जल रहे थेहम बीती रातदिल मे लिए कई ख्वाबअनजानी राहों में चल रहे थे।इक आहट हुईऔर ख्वाबों का मेहताब टूट गयाकुछ टुकड़े चुभे दिल की ज़मीं पेकोई अरमां आँखों से रिसता हुआ रुठ गया।अँधेरों में सोने की आदत नहीं थीउजालों ने डरना सिखा दि...
Mahesh Barmate
384
सुनों..!एक "मौन" सी कहानी हैकुछ खामोशियाँ हैं मेरे जेहन मेंजो चीखती हैंबिन आवाज के..।देखो!आज कागज पे रख ही दिया मैंनेअपने अंदर के उस "मौन" कोके कहीं गुम न जायेइसीलिएशब्दों में पिरो के..।पढ़ो!आज तुम इस "मौन" कोके शायद ये शब्द भी छू लेंतुम्हारे दिल के तारों को..।फिर द...