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Manav Mehta
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जिंदगी दर्द में दफ़न हो गई इक रात,उदासी बिखर गई चाँदनी में घुल कर....!!चाँद ने उगले दो आँसू,ज़र्द साँसें भी फड़फड़ा कर बुझ गयी......!!इस दफा चिता पर मेरे-मेरी रूह भी जल उठेगी.........!!मानव मेहता 'मन'  
Manav Mehta
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मानो इक ही कहानी का हक़दार था मैं...साल दर साल गुजरते गए,हर लम्हे को पीछे छोड़ा मैंने,मगर आज तक ये मलाल है मुझको,कि मेरी जिंदगी कि किताब के हर सफ्हे पर;एक सी ही लिखावट नज़र आई है मुझे...गम ; अफ़्सुर्दगी ; रंज ; और तन्हाई;बस इन्ही लकीरों में जिया जाता हूँ हर लम्हा.....
 पोस्ट लेवल : coffin kahani poem nazm tanhai manav mehta