ब्लॉगसेतु

Bhavana Lalwani
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मुझे यात्राओं का कोई बहुत ज्यादा मौका नहीं मिला है; पुराने ज़माने के लोगों की तरह मेरी यात्रा भी छुट्टियों में ननिहाल जाने या बहुत हुआ तो किसी और रिश्तेदार के यहां जाने तक का एक सीमित अनुभव है ।  पर इस सीमित यात्रा में भी जो कभी रो...
अपर्णा त्रिपाठी
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नवजीवन का आगमन, कई प्रश्न भी लेकर आया हैकुछ दुविधा में मन मेरा, क्या छोडूं और क्या बांधूक्या छोडूं उस चिडियां को, जो फुदकती आंगन मेंया छोडूं अल्लहडपन को, जो बरसता था सावन मेंक्या कुछ काम के ये होंगे, या कर्कट साबित होगेया बरसों बक्सों मे बन्द, बस आभासी साथी होंगेंन...
 पोस्ट लेवल : memories
Abhishek Kumar
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बारिश हो रही हो, मौसम सुहाना हो गया हो और ऐसे में अगर कुछ पुराना याद आ जाए तो जाने क्या हो जाता है मन को. बेचनी सी हो जाती है, इस भाग दौड़ की ज़िन्दगी में भागते हुए मन पीछे देखने लगता है, वो पुराना वक़्त जो बीत चूका है और जो अब लौट कर वापस नहीं आ सकता. ना ही पुराने लो...
अपर्णा त्रिपाठी
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जीवन की आपाधापी मेंबरसों के आने जाने मेंबहुत कुछ बदलता है लेकिनजो नही बदलता, वो बचपन है बदल जाते है, रंग खुशी केबदल जाते है, संग सभी के  बदल जाते है, चेहरे मोहरेबदल जाते है, मन भी थोडेमौसम के आने जाने मेंजमानों के गुजर जाने मेंदिन रात बदलते है लेकिन जो नही बदल...
 पोस्ट लेवल : childhood memories
Abhishek Kumar
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वो जनवरी का कोई दिन रहा होगा. सुबह से बारिश हो रही थी. लड़की को वैसे तो जनवरी की बारिश खूब अच्छी लगती थी और वो उसे खूब एन्जॉय करती थी, लेकिन आज जाने क्यों वो कुछ परेशान सी थी. लड़के ने पिछले शाम भी ये बात गौर की थी. उसने वजह जानने की  बहुत कोशिश की थी, लेकिन हमे...
Devendra Gehlod
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 पोस्ट लेवल : jokes hindi-jokes memories
Abhishek Kumar
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वे उन दोनों की शुरुआती मुलाकातों वाले दिन थे. लड़की खामोश सी रहती थी, वैसे तो वो बातें खूब करती थी, लेकिन लड़के के सामने हमेशा चुप सी रहती थी. लड़का बेहद बातूनी था. फिल्मों और किताबों का दीवाना था लड़का. लड़की को लेकिन किताबों और फिल्मों में कोई खास दिलचस्पी नही थी. उसे...
 पोस्ट लेवल : #Random A Message To You A Day In Memories
Abhishek Kumar
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नोट्स फ्रॉम डायरी - २९ नवम्बर २०१७ आज बड़े दिन बाद नए जूते लिए.. जूतों के मामले में मैं बाकी लोगों से थोडा आलसी किस्म का हूँ. जब तक जूते पूरी तरह से बेकार, टूट फट न जाए या फिर एकदम पुराने नहीं हो जाते, मैं उन्हें बदलने की ज़हमत नहीं उठाता. हालाँकि, जूतों का...
Abhishek Kumar
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"मैं पुराने किताबों के अलमारी के पास चला आया..जैसे वहां कोई छिपा खज़ाना हो. हर कमरे में कितने भेद भरे कोने होते हैं, वही किताबें होती हैं जो हर घर में होती हैं, कहीं से चाक़ू बहार निकल आता है, कहीं हाथ छुआते ही एक दूसरा घर खुल जाता है, एक तस्वीर, एक किताब, एक तोहफा –...
अपर्णा त्रिपाठी
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लैपटाप पर करते करते कामएकदिन अचानकआया मुझे याद  लिखना कागज पर बैठ गया लेकरअपना फेवरेटलेटर पैड और पेन जिसके पीले पन्ने दे रहे थे गवाहीमेरे और उसके रिश्ते की उम्र कीलिखना शुरु भी न कियाविचारों का तूफानहिलाने लगा मस्तिष्क को नाना प्रकार के ख्य...
 पोस्ट लेवल : old memories writting letter