प्रतीक चित्र।  (साभार) -अतुुुल कन्नौजवीरात भी रफ्ता रफ्ता गुजरने को है, रौशनी आसमां से उतरने को है,बैठने फिर लगीं तितलियां फूल पर, खुशबू—ए—गुल फजां में बिखरने को हैजैसे मौसम बदलने को हलचल हुई, था अजब सा नजारा कोई जादुईदेखकर दिल मचलता रहा...
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