मुक्तिकाचाँदनी फसल..संजीव 'सलिल'*इस पूर्णिमा को आसमान में खिला कमल.संभावना की ला रही है चाँदनी फसल..*वो ब्यूटी पार्लर से आयी है, मैं क्या कहूँ?है रूप छटा रूपसी की असल या नक़ल?*दिल में न दी जगह तो कोई बात नहीं है.मिलने दो गले, लोगी खुदी फैसला बदल..*तुम 'ना' कहो मैं '...