ब्लॉगसेतु

sanjiv verma salil
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सरस्वती वंदनावन्दे शारदेमुझे बुद्धि वर देमृदु स्वर दे ।वीणा वादिनीराग द्वेष हर लेमुझे वर दे ।करूँ याचनादया भाव भर देमानवता दे ।मधुमय होपल-पल जीवनशान्ति वर दे ।जाति धर्म काकोई भेद रहे नाभाव भर दे ।देश प्रेम हीलक्ष्य हो जीवन काऐसा वर दे ।हंस वाहिनीआया शरण तेरीपाद रज...
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एक रचना*महरी पर गड़तीगृद्ध-दृष्टि साहो रहा पर्यावरण*दोष अपना और पर मढ़सभी परिभाषा गलत पढ़जिस तरह हो सीढ़ियाँ चढ़  देहरी के दूरमिट्टी गंदगी साकर रहे हैं आचरण*हवस के बनकर पुजारीआरती तन की उतारीदियति अपनी खुद बिगाड़ीचीयर डालाअसुर बनकरमाँ धरा का...
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sanjiv verma salil
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एक रचना *भोर हुई छाई अरुणाई जगना तनिक न भला लगा *छायद तरुनर बना कुल्हाड़ी खोद रहा अरमान-पहाड़ी हुआ बस्तियों में जल-प्लावन मनु! तूने ही बात बिगाड़ी।अनगिन काटे जंगल तूनेअब तो पौधा नया लगा *टेर; नहीं गौरैया आती पवन न गाती पुलक प्रभाती धुआँ; धूल; कोलाहल बेहद सौंप रहे जहरी...
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नवगीत:आओ! तम से लड़ें...संजीव 'सलिल'*आओ! तम से लड़ें,उजाला लायें जग में...***माटी माता,कोख दीप है.मेहनत मुक्ताकोख सीप है.गुरु कुम्हार है,शिष्य कोशिशें-आशा खूनखौलता रग में.आओ! रचते रहेंगीत फिर गायें जग में.आओ! तम से लड़ें,उजाला लायें जग में...***आखर ढाईपढ़े न अब तक.अ...
 पोस्ट लेवल : नवगीत navgeet
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नवगीत :संजीव *संसद की दीवार पर दलबन्दी की धूल राजनीति की पौध परअहंकार के शूल*राष्ट्रीय सरकार कीहै सचमुच दरकारस्वार्थ नदी में लोभ कीनाव बिना पतवारहिचकोले कहती विवशनाव दूर है कूललोकतंत्र की हिलातेहाय! पहरुए चूल*गोली खा, सिर कटाकरतोड़े थे कानूनक्या सोचा...
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नवगीत *बारिश तो अब भी होती है लेकिन बच्चे नहीं खेलते. *नाव बनाना कौन सिखाये?बहे जा रहे समय नदी में.समय न मिलता रिक्त सदी में.काम न कोईकिसी के आये.अपना संकट आप झेलतेबारिश तो अब भी होती हैलेकिन बच्चे नहीं खेलते.*डेंगू से भय-भीत सभी हैं.नहीं भरोसा...
sanjiv verma salil
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समीक्षा :बुधिया लेता टोह : चीख लगे विद्रोहआचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'स्वातंत्र्योत्तर भारतीय साहित्य छायावादी रूमानियत (पंत, प्रसाद, महादेवी, बच्चन), राष्ट्रवादी शौर्य (मैथिली शरण गुप्त, माखन लाल चतुर्वेदी, दिनकर, सोहनलाल द्विवेदी) और प्रगतिवादी यथार्थ (निराला, नागार...
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बुंदेली नवगीत  कनैया नई सुदरो*नई सुदरो, बब्बा नई सुदरो मन कारो, कनैया नई सुदरो*कालिज मा जा खेंनें खोलें किताबेंभासन दें, गुंडों सेंऊधम कराबेंअधनंगी मोंड़िन सँगफोटू खिंचाबेभारत मैया कींनाक कटाबेफरज निभाबें माबा पिछरोमन कारो,कनैया नई सुदरो*दुसमन की...
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बुंदेली नवगीत :का बिगार दओ?*काए फूँक रओ बेदर्दी सें हो खें भाव बिभोर?का बिगार दो तोरो मैंनेभइया रामकिसोर??*हँस खेलत तीसंग पवन खेंपेंग भरत ती खूब।तेंदू बिरछाबाँह झुलाउतरओ खुसी में डूब।कें की नजरलग गई दइया!धर लओ मो खों तोर।का बिगार दो तोरो मैंनेभइया रामकिसोर??*क...
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नवगीत:संजीव *गैर कहोगे जिनको वे ही मित्र-सगे होंगे*ना माँगेंगे पानी-राशनना चाहेंगे प्यारनहीं लगायेंगे वे तुमकोअनचाहे फटकारशिकवे-गिले-शिकायततुमसे?, होगी कभी नहींन ही जतायेंगे वे तुम परकभी तनिक अधिकारकाम पड़े पर नहींआचरणप्रेम-पगे होंगेगैर कहोगे जिनकोवे...
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