ब्लॉगसेतु

S.M. MAsoom
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 जौनपुर के शार्की सल्तनत पे शोध के दौरान पटना के बुहार सग्रहालय जा पहुँच जहाँ मुझे शोध में तो मदद मिली कई रहस्यों से पर्दा उठाने का मौक़ा मिला जो जल्द आपके सामने होगा लेकिन इस शोध के दौरान मझे बिहार म्यूजियम में एक 20 करोड़ वर्ष पुराना पेड़ मिला जो अब पथ्थर में ब...
 पोस्ट लेवल : bihar museum history Patna aaspaas
S.M. MAsoom
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पटना शहर के गुलजारबाग रेलवे स्टेशन से सटा हुआ शीतला मंदिर है जहां एक रहस्यमयी कुंवा है जिसके बारे में तरह तरह की बातें मशहूर है और आज तक यह एक रहस्य ही बना हुआ है | 'अगम कुआं' पटना के सबसे एतिहासिक स्थानों में से एक है। जानकारों के मुताबिक इस कुएं की खुदाई सम्...
 पोस्ट लेवल : Agam Kunwa Patna अगम कुंवा aaspaas
अमितेश कुमार
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रंगमंच वर्तमान में घटित होने वाली कला हैऔर इस कारण यह वर्तमान में हस्तक्षेप भी करता है अपनी जीवंतता से. इससे अपेक्षा भी की जाती है कि यह अपने समय के सवालों को संबोधित करे और उस पर बहस करे. इसे जोर देकर कहना चाहिए कि रंगकर्म ऐसी कला है जो अपने समय की सत्ता से सच कहत...
मनीष कुमार
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बिहार के साथ आधुनिक शब्द का इस्तेमाल थोड़ा अजीब लगा होगा आपको। भारत के पूर्वी राज्यों बिहार, झारखंड और ओड़ीसा का नाम अक्सर यहाँ के आर्थिक पिछड़ेपन के लिए लिया जाता रहा है पर बिहार के पटना  स्थित इस नव निर्मित संग्रहालय को आप देखेंगे तो निष्पक्ष भाव से ये कहन...
अमितेश कुमार
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पटना रंगमंच में सक्रिय रविकांत नाटकों के साथ फिल्मों में भी अभिनय करते हैं. वे फिल्म समारोहों के आयोजन में भी सक्रिय हैं. पटना रंगमंच पर उनके विचार रंगविमर्श पर. पटना रंगमंच विगत कुछ वर्षों से प्रयोग के दौर से गुज़र रहा है। प्रयोग से कोई गुरेज नहीं हैं क्योंकि...
 पोस्ट लेवल : Patna theatre Ravikant पटना रंगमंच
अमितेश कुमार
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रंगमंच एक समुदायिक कर्म है.पेशेवर या शौकिया कुछ भी होते हुए इस बुनियादी तथ्य को दरकिनार नहीं किया जा सकता. इसलिए सबसे अधिक जरुरी है कि  रंगकर्मी आपस में एक समुदाय की तरह जुड़े और रंगकर्म की प्रक्रिया का आनंद उठायें. उससे प्रस्तुति निकलती है तो आप फिर व्यापक समु...
 पोस्ट लेवल : Theatre Process Patna theatre punj prakash
prabhat ranjan
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हाल में ही संपन्न हुए पटना फिल्म फेस्टिवल पर सुशील कुमार भारद्वाज की रपट- मॉडरेटर =====================================================बिहार में वर्ष 2016 की शुरूआत फिल्मों के नजरिए से अच्छी मानी जा सकती है. एक महीने के भीतर राजधानी पटना में तीन फिल्म फेस्टिवल...
prabhat ranjan
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अभी कुछ दिन पहले ही पटना फिल्म फेस्टिवल संपन्न हुआ. उसकी बेबाक समीक्षा की है सुशील कुमार भारद्वाज ने- मॉडरेटर ==============जहां एक तरफ बिहार विधान सभा चुनाव के बाद से राज्य की छवि अप्रत्याशित रूप से राजनीतिक-हत्या, अपहरण, रंगदारी और बलात्कार के कारण धूमिल हों...
अमितेश कुमार
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 क्रांति के लिये हिंसा कितना न्यायोचित है? क्रांति के उच्चतम आदर्श की प्राप्ति में हिंसा बाधक है या उसे पाने  के लिये किसी भी हद तक जाना जायज है? भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के समय गांधी और भगत सिंह के तरीकों में या वैश्विक परिदृश्य में बुद्धिजीवियों के बीच य...
हर्षवर्धन त्रिपाठी
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‪#‎BiharVotes‬ के समय बिहार में रहा। लेकिन, बिहार के बारे में बिहारी ही तय करेगा, बाहरी नहीं। एक जगह भोजन पर जाना हुआ। जगह है दसरथा। दसरथा और सिपारा दोनों पुराने गांव हैं, जो 1980 आते आते शहर में शामिल होने के फेर में लोग घर बनाने लगे। पटना सचिवालय, स्टेशन से...