ब्लॉगसेतु

नई कलम
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नज़्म १ (ख़ुदा)एक ही पैगाम थातो क्यू इजाद की गईये अलग-अलग राहें?क्यू बांटना पड़ाएक ही पैगाम कोअलग-अलगकिताबों में?क्यू तामीर नहीं की गईएक ही मुकद्दस किताब?के जिसमें सिर्फ मुहब्बत मुहब्बतऔर मुहब्बत होती.....इसके अलावा कुछ नहींजिसे एक होना थागर वो एक होतातो फिर क...
नई कलम
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चूहे की घड़ी ==========टिक टिक टिक कौन चूहा बैठा है मौन बिल्ली से नाराज़ है शैतानी से बाज़ है खाना भी ना खाया है मनाए उसे कौन...घड़ी चुरायी बिल्ली ने खरीदी थी जो दिल्ली में बिल्ली से ये डरता है गली में बनता डॉन...टिक...
मुकेश कुमार
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जी रहे हैं या यूँ कहें कि जी रहे थेढेरों परेशानियों संगथी कुछ खुशियाँ भी हमारे हिस्सेजिनको सतरंगी नजरों के साथहमने महसूस करबिखेरी खिलखिलाहटेंकुछ अहमियत रखते अपनों के लिएहम चमकती बिंदिया ही रहेउनके चौड़े माथे कीइन्ही बीतते हुए समयों मेंकुछ खूबियाँ ढूंढ कर सहेजी भीकभी...
rishabh shukla
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Ram Janm Bhumi Ayodhyaराम लला अब आयेंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे|ज़न मानस मन भायेंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे||मंदिर वहीं बनाएंगे... तुम हो करुणा सागर, मर्यादापुरुषोत्तम सब के प्रिय, तेरी अमिट छवि है हर हृदय मे, बाट जोहती सबकी आँखे, अब मेरे...
rishabh shukla
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Har Ghar Me Vibhishana Baitha Haiअब बड़ी मुश्किल है लड़ाई,हर घर मे विभीषण बैठा है|मुश्किल है अब चढ़ाई,हर घर मे विभीषण बैठा है||तुम सेंध लगाए बैठे थे,किसी दूसरे के घर पर,कोई तुम्हारा घर ही लूट गया,हर घर में विभीषण बैठा है||तुम हो वीर, शक्तिशाली,रण तुमसे घबराता है|फि...
rishabh shukla
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Aloneना कोई दोस्त मेरा,ना है हमदर्द कोई,अपना कहने को तो कई,लेकिन अपनापन नहीं है|मैं अकेला हूँ...ना कोई है हँसी,ना कोई ठिठोली करने वाला,दर्द देने को कई तैयार बैठे हैंलेकिन कोई हमदर्द नहीं है|मैं अकेला हूँ....कोई कैसे इतना,उलझ जाता है जिंदगी में,की भूल जाता है,कि कोई...
rishabh shukla
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Journeyक्या तुम मुझसे मिल कर, यूँ ही खो जाते हो|वैसे ही सपनों के समंदर मे, गोते खाते हो||इस जीवन पथ पर.... जैसे मैं घुल जाती हूँ, तेरे यादो, जज्बातों मे|जैसे कई लोग मेरे कानो मे,सुन्दर गीत गाते हैं||इस जीवन पथ पर..... क्या तुम भी रोते हो,&n...
rishabh shukla
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कि प्यार नहींग़र प्यार का इजहार ना हो, तो वो प्यार नहीं|क्या हुआ जो तुमको, मुझ पर ऐतबार नहीं||एक बार ऐतबार तो करो, पूरी शिद्दत से|फिर कह ना पाओगे, कि प्यार नहीं||तुमने ना किया भरोसा, हम पर|लेकिन तेरी बेवफाई से, मुझे कोई ऐतराज नहीं||मेर...
kuldeep thakur
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मुझे याद आओगेकभी तो भूल पाऊँगा तुमको, मुश्क़िल तो है|लेकिन, मंज़िल अब वहीं है||पहले तुम्हारी एक झलक को, कायल रहता था|लेकिन अगर तुम अब मिले, तों भूलना मुश्किल होगा||@ऋषभ शुक्लाहिन्दी कविता मंच
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मुझे याद आओगेकभी तो भूल पाऊँगा तुमको, मुश्क़िल तो है|लेकिन, मंज़िल अब वहीं है||पहले तुम्हारी एक झलक को, कायल रहता था|लेकिन अगर तुम अब मिले, तों भूलना मुश्किल होगा||@ऋषभ शुक्लाहिन्दी कविता मंच