ब्लॉगसेतु

राजीव तनेजा
0
“माना कि मैं खुर्राट हूँ…आला दर्जे का खुर्राट…..अव्वल दर्जे का खुर्राट…तो इसमें आखिर…गलत क्या है?….क्या अपने फायदे के लिए चालाक होना…गलत होना….सही नहीं है…..गलत है?…और अगर है…तो भी मुझे किसी की चिंता नहीं…किसी की परवाह नहीं…..मुझे गर्व है कि मैं अव्वल दर्जे का कमीन...
राजीव तनेजा
0
“हाँ!…तो पप्पू जी…मेरे ख्याल से काफी आराम हो गया है….अब आगे की कहानी शुरू करें?”… “जी!…ज़रूर"… “तो फिर बताइये…क्या टैंशन है”… नोट: दोस्तों मेरी पिछली कहानी ‘भोगी को क्या भोगना…भोगी मांगे दाम' ज़रूरत से ज्यादा बड़ी हो रही थी…इसलिए मैंने उस कहा...
राजीव तनेजा
0
समझ में नहीं आ रहा मुझे कि आखिर!…हो क्या गया है हमारे देश को…इसकी भोली-भाली जनता को?…. कभी जनता के जनार्दन को सरेआम जूता दिखा दिया जाता है तो कभी जूता दिखाने वाले को दिग्गी द्वारा भरी भीड़ में बेदर्दी से लतिया दिया जाता है…पीट दिया जाता है…आखिर!..ये होता क्या जा र...
राजीव तनेजा
0
प्रिय पुत्र अनामदास, कैसे हो?…मैं यहाँ अपने घर में…अपने बलबूते पर एकदम से सही-सलामत हूँ और उम्मीद करता हूँ कि तुम भी  अपने घर में…अपने ही दम पर सुख एवं शान्ति के साथ जीवन व्यतीत कर रहे होगे….’शान्ति’ कैसी है?….बहुत दिन हो गए उससे मिले हुए…मेरा सलाम कहना उसे|...
राजीव तनेजा
0
“हैलो!…इज इट 9810821361?”… “यैस!… “आप वर्ल्ड फेमस  टैंशन गुरु(Tention Guru) ‘राजीव जी' बोल रहे हैं?”… “जी!…जी…हाँ…मैं वर्ल्ड फेमस टैंशन गुरु(Tention Guru) ‘राजीव' ही बोल रहा हूँ…आप कौन?”… “सर!…मैं पप्पू….पानीपत से"…  “कहिये!…पप्पू ज...
राजीव तनेजा
0
   पिछले कुछ दिनों में घटनाक्रम जिस तेज़ी से उठापटक भरा गुज़रा..उसे देख कर एवं महसूस कर सदमें में हूँ| शायद!…हमेशा-हमेशा के लिए ब्लोगिंग छोड़ दूँ…या फिर लिखना भी :-(30 अप्रैल,2011 की रात को दिल्ली के हिन्दी भवन में हुए भव्य कार्यक्रम के दौरान और उसके बाद के...
राजीव तनेजा
0
दोस्तों!…जैसा कि आप जानते हैं कि आगामी 30 अप्रैल,2011 को दिल्ली के हिन्दी भवन में एक कार्यक्रम होने जा रहा है जिसमें हिन्दी ब्लोगिंग के अब तक के कार्यकाल पर श्री रवीन्द्र प्रभात जी द्वारा लिखी गई  “हिन्दी ब्लोगिंग का इतिहास" नामक पुस्तक का विमोचन किया ज...
राजीव तनेजा
0
  ये माईक स्साला… भी बड़ी ही कुत्ती चीज़ है…अच्छे-अच्छों के छक्के छुडा देता है..बड़े-बड़ों को पसीने ला देता है…सूरमाओं को धरती चटा पल भर में रुला देता है|सामने आ जाओ इसके तो साँस ऊपर-नीचे…नीचे-ऊपर होने लगती है…हाथ-पाँव फूलने लगते हैं…बदन कंपकपाने लगता है…  ...
राजीव तनेजा
0
      अरे!…कोई समझाओ यार इन हिन्दी ब्लोगरों को…सैन्टुआ गए हैं ससुरे सब के सब…गए थे राम भजन को ओटने लगे कपास… इसे कहते हैं मति-मति का फेर होना… “अरे!..भईय्यी जिस काम से गए थे…उसी को करो ना ठीक से…. ये क्या कि वहाँ की मच्छी मार्का धर...
राजीव तनेजा
0
उफ्फ़!…तौबा ये वर्ल्ड कप वाले भी ना बस…वर्ल्ड कप वाले ही हैं…तुरन्त अपनी फटफटी पे आ के कहने लगे मुझसे… “मान ना मान..मैं तेरा मेहमान”… मैंने पूछा उनसे कि… “भईय्या…वो कैसे?”… छूटते ही कहने लगे “पहले आप अपने ये शब्द वापिस लें"… मैंने कहा “कौन से?”… वो बोले…...