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sanjiv verma salil
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Poetic Currency : An Instrument of Social Change Dr. Sadhna Verma - Er. Sanjiv Verma *In English literature free verse is most preferred form in poetry. Formlessness in poetry facilitates the poet to express himself without worrying for prosodic particula...
 पोस्ट लेवल : Poetic Currency Er. Sanjiv Verma dr. sadhna verma
sanjiv verma salil
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एक दोहा*सुन पढ़ सीख समझ जिसे, लिखा साल-दर साल।एक निमिष में पढ़ लिया?, सचमुच किया कमाल।।***संवस७९९९५५९६१८http://divyanarmada.blogspot.in/
 पोस्ट लेवल : दोहा -Acharya Sanjiv Verma 'Salil'
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मुक्तिका*सुधियाँ तुम्हारी जब तहेंअमृत-कलश तब हम गहेंश्रम दीप मंज़िल ज्योति होकोशिश शलभ हम मत दहेंबन स्नेह सलिला बिन रुकेनफरत मिटा बहते रहेंलें चूम सुमुखि कपोल जबसंयम किले पल में ढहेंकर काम सब निष्काम हमगीता न कहकर भी कहें*संजीव२६-३-२०२०९४२५१८३२४४http://divyanarmada...
 पोस्ट लेवल : मुक्तिका -Acharya Sanjiv Verma 'Salil'
Bharat Tiwari
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संजीव की कहानी 'सौ बार जनम लेंगे' एक किरदार जो हमारे आसपास होता है लेकिन हमें उसकी महत्ता नहीं दीखती. उस किसी किरदार की कहानी गढ़ना, एक रेखाचित्र खींच देना, उसे हमेशा के लिए शब्दों में ढाल देना एक कहानीकार का योगदान होता है. यह सवाल उठ सकता है कि कौन कहानीकार अ...
 पोस्ट लेवल : कहानी संजीव Kahani Sanjiv
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सुभाषित संजीवनी १*मुख पद्मदलाकारं, वाचा चंदन शीतलां।हृदय क्रोध संयुक्तं, त्रिविधं धूर्त लक्ष्णं।।*कमल पंखुड़ी सदृश मुख, बोल चंदनी शीत।हृदय युक्त हो क्रोध से, धूर्त चीन्ह त्रैरीत।।*http://divyanarmada.blogspot.in/
sanjiv verma salil
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साक्षात्कार के प्रश्न (१)    आप साहित्य की इस दुनिया में कैसे आए? कब से आए? क्या परिवार में कोई और सदस्य भी साहित्य सेवा से जुड़ा रहा है?मैं बौद्धिक संपदा संपन्न कायस्थ परिवार में जन्मा हूँ। शैशव से ही माँ की लोरी के रूप में साहित...
sanjiv verma salil
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पुस्तक चर्चा:'ऐसा भी होता है' गीत मन भिगोता है आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'  *[पुस्तक परिचय: ऐसा भी होता है, गीत संग्रह, शिव कुमार 'अर्चन', वर्ष २०१७, आईएसबीएन ९७८-९३-९२२१२- ८९-५, आकार २१ से.मी.x १४ से.मी., आवारण बहुरंगी, पेपरबैक, पृष्ठ ८०, मूल्य ७५/-, पहले...
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एक कुंडली- दो रचनाकार दोहा: शशि पुरवार रोला: संजीव *सड़कों के दोनों तरफ, गंधों भरा चिराग गुलमोहर की छाँव में, फूल रहा अनुरागफूल रहा अनुराग, लीन घनश्याम-राधिकादग्ध कंस-उर, हँसें रश्मि-रवि श्वास साधिकानेह नर्मदा प्रवह, छंद गाती मधुपों केगंधों भरे च...
sanjiv verma salil
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व्यंग्य लेख दही हांडी की मटकी और सर्वोच्च न्यायालय आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' *दही-हांडी की मटकी बाँधता-फोड़ता और देखकर आनंदित होते आम आदमी के में भंग करने का महान कार्य कर खुद को जनहित के प्रति संवेदनशील दिखनेवाला निर्णय सौ चूहे खाकर बिल्ली के हज जाने...
sanjiv verma salil
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कार्य शाला:दोहा से कुण्डलिया *बेटी जैसे धूप है, दिन भर करती बात।शाम ढले पी घर चले, ले कर कुछ सौगात।।  -आभा सक्सेना 'दूनवी' लेकर कुछ सौगात, ढेर आशीष लुटाकर।बोल अनबोले हो, जो भी हो चूक भुलाकर।। रखना हरदम याद, न हो किंचित भी हेटी। जा...