ब्लॉगसेतु

Bharat Tiwari
23
इस आखिरी किस्त के साथ विनोद भारद्वाज जी की किताब यादनामा पूरी हो गयी है। इसका उप-नाम है, लॉकडाउन डायरी, कुछ नोट्स, कुछ यादें। जल्दी ही किताब भी सामने आयेगी। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});न्यू यॉर्क की यादें — विनोद भारद्वाज संस्मर...
Bharat Tiwari
23
विनोद जी अपने संस्मरणों में, इसके पिछले लेखन (जापान वाले 'साकुरा की यादें') से, खूबसूरत कवि-से हो गए हैं! उनके इस सौन्दर्य भरे परिवर्तन से उनको पढ़ना अलग किस्म का रोचक हो गया है. आनंद उठाइए... भरत एस तिवारी/शब्दांकन संपादकलेखक के लिए उपेक्षा खराब है तो उसको ज्यादा व...
Bharat Tiwari
23
आज के इस संस्मरण के साथ विनोद जी ने कहा है कि यह अंतिम कड़ी है। मैं संस्मरण का घोर प्रेमी हूँ, मानता हूँ कि संस्मरण हमें वह बातें समझाते हैं जो साहित्य की किसी अन्य विधा के बस में नहीं है। विनोद जी को और साथ में ख़ुद को कुछ वक़्त का आराम देने की भले सोच सकता...
Bharat Tiwari
23
रोम की यादें — विनोद भारद्वाज संस्मरणनामान जाने क्या बात है इटली की स्त्रियाँ बहुत आसानी से मेरी दोस्त बन जाती हैं, उन्होंने मुझे इटली के अद्भुत लैंडस्केप में इतना घुमाया है कि मुझे यह भ्रम होने लगता है कि पुनर्जन्म एक सच्चाई हो न हो पर मेरा इटली, ख़ास तौर पर...
Bharat Tiwari
23
कुबेर दत्त और पीने की कुछ अन्य यादें — विनोद भारद्वाज संस्मरणनामामेक्सिको की चर्चित चितेरी फ्रीडा काल्हो ने कहा था, मैंने अपने दुख दर्द डुबोने के लिए पीना शुरू किया पर कमबख़्त उन सब पीड़ाओं ने तैरना भी सीख लिया। मैंने अपने जीवन में कई पियक्कड़ों का बुरा ह...
Bharat Tiwari
23
विनोद जी लेखन में इतने बहुत वरिष्ठ हैं, उन्होंने इतना देखा लिखा है, इसलिए, यह तो नहीं कह सकता कि उनके संस्मरणों में निखार आ रहा है. लेकिन, यह कह सकता हूँ कि यादों को लिखने की अपनी इस नई शैली में विनोदजी ने 'लेनिनग्राद की लीना की यादें' में मर्म को लगातार छूए हुए कव...
Bharat Tiwari
23
हिंदी के एक नामी उपन्यासकार ने गाइड को कमरे में बुलाने की कोशिश की, तो उनकी शिकायत दूतावास को कर दी गई थी।  — विनोद भारद्वाजकोल्ड वार की यादें — विनोद भारद्वाज संस्मरणनामा1979 और 1980 में मुझे पत्रकार और लेखक की हैसियत से दो बार यूरोप जाने का मौक़ा मिला।...
Bharat Tiwari
23
के बिक्रम सिंह की यादें— विनोद भारद्वाज संस्मरणनामाफ़िल्मकार, ब्यूरोक्रेट, बुद्धिजीवी के बिक्रम सिंह के साथ मैंने कला और साहित्य के सबजेक्ट एक्स्पर्ट की हैसियत से क़रीब बीस साल काम किया, उनके साथ ख़ूब यात्राएँ कीं, होटेल में रूम भी शेयर किया, इंडिया इंटरनैशनल सेंटर...
Bharat Tiwari
23
गला घोंट डंडामार डॉक्टर की दुनिया— विनोद भारद्वाज संस्मरणनामाऐसा कहा जाता है अज्ञेय अपनी पंजाबियत को छिपाते थे, दूसरी तरफ़ कृष्णा सोबती हिंदी की लेखिका होते हुए भी अपनी पंजाबियत को अपने लेखन में तमग़े की तरह दिखाती थीं। दिल्ली में कृष्णा जी से मेरा अच्छा परिचय हो ग...
Bharat Tiwari
23
हज़रत गंज की यादें— विनोद भारद्वाज संस्मरणनामालखनऊ के हज़रत गंज की कई सुंदर यादें हैं। लखनऊ यूनिवर्सिटी में पाँच साल पढ़ाई की थी, क़रीब चार बजे से हज़रत गंज तीन चार घंटे के लिए अपना ठिकाना बन जाता था। शाम को हज़रत गंज में मस्ती में घूमने का नाम गंज़िंग था। आपने गंज...