ब्लॉगसेतु

Sanjay  Grover
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लघुकथाकुछ सफल लोग आए कि आओ तुम्हे दुनियादारी सिखाएं, व्यापार समझाएं, होशियारी सिखाएं।और मुझे बेईमानी सिखाने लगे।अगर मुझे बचपन से अंदाज़ा न होता कि दुनियादारी क्या है तो मेरी आंखें हैरत से फट जातीं।-संजय ग्रोवर05-08-2019
Roli Dixit
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Sanjay  Grover
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उनसे मैं बहुत डरता हूं जो वक़्त पड़ने पर गधे को भी बाप बना लेते हैं। इसमें दो-तीन समस्याएं हैं-1.     बाप बनना बहुत ज़िम्मेदारी का काम है। ऐसे ज़िम्मेदार बाप का दुनिया को अभी भी इंतेज़ार है जो सोच-समझ के बच्चा पैदा करे। वैसे जो सोचता-समझता होगा...
Roli Dixit
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झूठ के पांव से चलते हैं किस्सेबहुत लंबी होती &#23...
Sanjay  Grover
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Short Storycreated by sanjaygrover+"Do you want any help ?""Are you you free to help someone ?""................""Ok, first I must try to free you so that you may help me.""Oh thanks, you could understand me finally."
Sanjay  Grover
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प्यारे बच्चो,अंकल को फूल ज़रुर दो लेकिन याद रखो कि तुम्हारे पापा भी किसीके अंकल हैं। और अंकल भी किसीके पापा हैं। अपने पापा पर भी नज़र रखो, कहीं ऐसा न हो कि किसी दिन कोई तुम्हारा दोस्त, कोई बच्चा तुम्हारे पापा को पूरा बग़ीचा दे जाए। ज़रा अपना घर देखो, क्या यह स्वीकृत नक...
Sanjay  Grover
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लघुकथा/व्यंग्य‘एक बात बताओ यार, गुरु और भगवान में कौन बड़ा है ?’‘तुम लोग हर वक़्त छोटा-बड़ा क्यों करते रहते हो.....!?’‘नहीं.....फिर भी .... बताओ तो ....?’‘गुरु बड़ा है कि छोटा यह बताने की ज़रुरत मैं नहीं समझता पर वह भगवान से ज़्यादा असली ज़रुर है क्यों कि वह वास्तविक ह...
Sanjay  Grover
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भगवान आजकल-1(भगवान के नाम पर आजकल जो भी होता है, का चर्चा)रात मैंने देखा, पता नहीं सपना था या सच था, एक प्रसिद्ध आदमी से एक लड़की ने कह दिया कि आप मेरे लिए भगवान के समान हो, मेरे भगवान हो.....’बस वह मेरा दोस्त काफ़ी देर तक भावुक होता रहा, कई कोणों से दिलचस्प मुद्राएं...
Sanjay  Grover
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पज़लइधर भी फ़र्ज़ी उधर भी फ़र्ज़ीसिलते-सिलते थक गए दर्ज़ीनीचे वाला चमचा बोलाऊपर वाले तेरी मर्ज़ीबहरे, मोहरे, चेहरे, दोहरेटोपें-तोपें गरज़ी-वरज़ीझूठ ही जीता, झूठ ही हारा‘सच’ बोला यही मेरी मरज़ीराज़ छुपाना काम है जिनकाउन्हींको दो पाने की अरज़ीउनका तो नाटक भी दुख हैमेरी तो बांछे...
Sanjay  Grover
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