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sanjiv verma salil
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लघुकथा- कुत्ते की पूँछ*विश्वविद्यालय में देश के संविधान का मखौल बनाने के बाद, न्यायालय में खुद को निर्दोष बताकर, करतूतों के लिये पश्चाताप व्यक्त करना और विश्वविद्यालय में सेना पर लांछन लगाकर क्या बताना चाहता है छात्र संघ अध्यक्ष? मित्र ने पूछा। 'यही कि कुत्ते की पू...
sanjiv verma salil
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लघुकथाः जेबकतरे :* = १९७३ में एक २० बरस के लड़के ने जिसे न अनुभव था, न जिम्मेदारी २८०/- आधार वेतन पर नौकरी आरंभ की। कुल वेतन ३७५/- , सामान्य भविष्य निधि कटाने के बाद ३५०/- हाथ में आते थे जिससे पौने तीन तोले सोना खरीदा जा सकता&...
राजीव तनेजा
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“हद हो गयी यार ये तो बेईमानी की…मुझ…मुझ पर विश्वास नहीं है पट्ठों को….सब स्साले बेईमान….मुझको…मुझको भी अपने जैसा समझ रखा है…एक एक..एक एक पाई का हिसाब लिखा हुआ है मेरे पास…जब चाहो…जहाँ चाहो...लैजर…खाते सब चैक करवा लो…. “क्या हुआ तनेजा जी?…किस पर राशन पानी ले...
राजीव तनेजा
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“हद हो गयी ये तो एकदम पागलपन की…नासमझ है स्साले सब के सब….अक्ल नहीं है किसी एक में भी…लाठी..फन फैलाए..नाग पर भांजनी है मगर पट्ठे..ऐसे कमअक्ल कि निरीह बेचारी जनता के ही एक तबके को पीटने की फिराक में हाय तौबा मचा…अधमरे हुए जा रहे हैं"… “किसकी बात कर रहे हैं तने...
राजीव तनेजा
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  “पागल हो गए हैं स्साले सब के सब….दिमाग घास चरने चला गया है पट्ठों का…इन्हें तो वोट दे के ही गलती कर ली मैंने…अच्छा भला झाडू वाला भाडू तरले कर रहा था दुनिया भर के लेकिन नहीं..मुझे तो अच्छे दिनों के कीड़े ने काट खाया था ना?..लो!..आ गए अच्छे दिन..अब ले लो वडेवे...
राजीव तनेजा
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***राजीव तनेजा*** फेसबुकिया नशा ऐसा नशा है कि एक बार इसकी लत लग गई तो समझो लग गयी...बंदा बावलों की तरह बार बार टपक पड़ता है इसकी साईट पर कि..."जा के देखूँ तो सही मुझे कितने लाईक और कितने कमेन्ट मिले हैं?"... "अरे!...तुझे क्या लड्डू लेने हैं इ...
राजीव तनेजा
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इस बात में रत्ती भर भी संदेह नहीं कि आजकल चल रही सोशल नेटवर्किंग साईट्स जैसे याहू..ट्विटर और फेसबुक वगैरा में से फेसबुक सबसे ऊपर है... यहाँ पर हर व्यक्ति अपने किसी ना किसी तयशुदा मकसद से आया है...बहुत से लोग यहाँ पर सिर्फ मस्ती मारने के उद्देश्य से मंडरा...
राजीव तनेजा
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अजब ये फेसबुक और अजब इसके रिश्ते कभी कच्ची धूप से खिलते कभी घुप्प अँधेरे में सिमटते  तुरत फुरत इस पल बनते झटपट उस  पल बिगड़ते अजब ये फेसबुक और अजब इसके रिश्ते बेगानों संग प्रीत जताते अनजानों संग पेंच लड़ाते कभी हँसते तो कभी रोते सपने पर नित नए संजोते अ...
राजीव तनेजा
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“हैली!…इज इट…..9810821361? “येस्स!…स्पीकिंग"… “आप फलाना एण्ड ढीमका प्लेसमेंट एजेन्सी से बोल रहे हैं?”… “जी!…बिलकुल बोल रहे हैं"… “थैंक गाड…बड़ी ही मुश्किल से आपका नंबर लगा है…सुबह से ट्राई कर रहा हूँ"… “जी!…आजकल बड़ा सीज़न चल रहा है ना…इसलिए&quot...
राजीव तनेजा
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विचार इटली के...कहानी भारत की और ज़ुबान यू.पी की "हद हो गई यार ये तो बदइंतजामी से भरी भारी भरकम  लापरवाही की...मैं क्या आप सबकी जर  खरीदी हुई गुलाम हूँ?  या फिर छुट्टी से लौट आई कोई नाबालिग बँधुआ मजदूर हूँ?... ... क्या...