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दिनेशराय द्विवेदी
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धरती पर कर्क रेखा के आसपास एक देश था। उस देश के लोगों के पास एक बहुत पुरानी  किताब थी। जिसकी भाषा उनके लिए अनजान थी। वह उनके पूर्वजों की भाषा रही होगी। वे ऐसा ही मानते थे। उस किताब की लिपि तो वही थी जो वे इस्तेमाल करते थे। किताबो को वे पढ़ तो सकते थे, लेकिन सम...
 पोस्ट लेवल : देश short short story Country लघुकथा
दिनेशराय द्विवेदी
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मान मेराज के घराने का नित्य का आहार था, जिसे वह मंडी में एक खास दुकान से लाता था। कभी वह मंडी की सब से बड़ी दुकान हुआ करती थी। उसका बाप भी उसी दुकान से लाता था। ऐसा नहीं कि मान केवल उसी दुकान पर मिलता हो। मंडी में और भी दुकानें थीं। उसकी बुआएँ दूसरी जगह से मान लेती...
दिनेशराय द्विवेदी
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एक सच्ची सी 'लघुकथा'हमारे मुहल्ले की एक औरत बहुत लड़ाकू और गुस्सैल थी। अक्सर घर में सब से लड़ती रहती। सास, पति, ननद, देवर, बेटे, बेटी कोई भी उस की लड़ाई से महरूम नहीं था। अब इस आदत की औरत पड़ौसियों से कैसा व्यवहार करताी होगी इस का अनुमान तो आप लगा सकते हैं। उस के द...
दिनेशराय द्विवेदी
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___________________ लघुकथाबहिन को शाम को जाना था। छुट्टी का दिन था। वह स्टेशन तक छोड़ने जाने वाला था।तभी कंपनी से कॉल आ गई। नए लांचिंग में कुछ प्रोब्लम है। फोन पर सोल्व नहीं हो सकी। कंपनी जाना पड़ा। बहिन को मकान मालिक को किराया नकद में देना है, पर नोटबंदी के यु...
दिनेशराय द्विवेदी
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'लघुकथा'         बस स्टैंड से बस रवाना हुई तब 55 सीटर बस में कुल 15 सवारियाँ थीं। रात हो चुकी थी। शहर से बाहर निकलने के पहले शहर के आखिरी कोने पर रोडवेज की एक बुकिंग विण्डो थी। वहाँ कुछ सैकण्ड्स के लिए बस रुकी बुकिंग विण्डो बन्द थ...
दिनेशराय द्विवेदी
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ˍˍˍˍˍˍˍˍˍˍˍˍˍˍˍˍˍˍˍˍˍˍˍˍˍˍˍˍ एक लघुकथारामचन्दर कई दिन से कमान पर तीर चढ़ा कर समन्दर को ललकार रहा था। -देख! सीधाई से रस्ता दे दे वर्ना सुखा दूंगा। समन्दर था कि उस पर कोई असर ही नहीं हो रहा था। वह तो पहले की तरह लहर लहर लहरा रहा था। न तो उसे रामचन्दर दिखाई दे रहा था,...
दिनेशराय द्विवेदी
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'लघुकथा'भिखारियों को भोजन के लिए बाजार वालों ने भण्डारा किया। बाजार को कनातें लगा कर बन्द कर दिया गया था। सड़क को नगर निगम से टैंकर मंगवा कर धुलवाया गया। जब वह सूख ली तो उस पर टाट पट्टियाँ बिछाई गयीं। भोजन के लिए आए भिखारी यह सब कार्रवाई बाजार के कोने में भीड़ लगाए...
दिनेशराय द्विवेदी
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'लघुकथा''घड़ीसाज'- दिनेशराय द्विवेदी - कुछ सुना तुमने?- क्या?- अरे! तुमने रेडियो नहीं सुना? टीवी नहीं देखा?- देखा है, सब देखा है। उस में तो न जने क्या क्या होता है। मुझे कैसे पता कि तुम किस के लिए बोल रहे हो?- मैं वो बड़े साहब की बात कर रहा था।- कौन बड़े साहब?- अरे...
दिनेशराय द्विवेदी
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'लघुकथा' रामदास सरकारी टीचर हो गया। वह स्कूल में मुझ से चार साल पीछे था। एक साधारण विद्यार्थी जो हमेशा पास होने के लिए जूझता रहता था।  मैं स्कूल से कालेज में चला गया। फिर पता लगा कि वह दसवीं क्लास में दो बार फेल हो जाने पर पढ़ने मध्यप्रदेश चला गया। फिर जानकारी...
दिनेशराय द्विवेदी
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भूत-कथा दिनेशराय द्विवेदी रात बाथरूम में चप्पल के नीचे दब कर एक कसारी (झिंगूर) का अंत हो गया। चप्पल तो नहाने के क्रम में धुल गयी। लेकिन कसारी के अवशेष पदार्थ बाथरूम के फर्श पर चिपके रह गए। अगली सुबह जब मैं बाथरूम गया तो देखा कसारी के अवशेष लगभग गायब थे। केवल...