सोरठा - दोहा गीतसंबंधों की नाव*संबंधों की नाव,पानी - पानी हो रही। अनचाहा अलगाव,नदी-नाव-पतवार में।।*स्नेह-सरोवर सूखते,बाकी गन्दी कीच।राजहंस परित्यक्त हैं,पूजते कौए नीच।।नहीं झील का चाव,सिसक रहे पोखर दुखी।संबंधों की नाव,पानी - पानी हो रही।।*कुएँ - बावली में नहीं...