सुनो अब लौट कर मत आना, ये तन्हाई अब हमें तुमसे भी प्यारी लगती हैं। मनाने की कोशिश तो बहुत की हमनें पर जब वो हमारे लफ़्ज ना समझ सके तो हमारी खामोशियों को क्या समझेंगे। तन्हाई शायरी मैं मुसीबत में अकेला हूँ... तो यार हैरत कैसी...?? हर कोई डूबती हुई क़श्ती से उ...
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