अभिनव प्रयोग-उल्लाला गीत:जीवन सुख का धाम हैसंजीव 'सलिल'*जीवन सुख का धाम है,ऊषा-साँझ ललाम है.कभी छाँह शीतल रहा-कभी धूप अविराम है...*दर्पण निर्मल नीर सा,वारिद, गगन, समीर सा,प्रेमी युवा अधीर सा-हर्ष, उदासी, पीर सा.हरी का नाम अनाम हैजीवन सुख का धाम है...*बाँका राँझा-ही...
 पोस्ट लेवल : उल्लाला गीत ullala geet