ब्लॉगसेतु

Sanjay  Grover
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Vikram Pratap Singh Sachan
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कभी-कभी जब हम अपने आप को विश्वगुरु कहते है तब, जब हम राष्ट्रधर्म और देशभक्ति की तमाम बातें करते है तब मैं अक्सर अहसज हो जाता हूँ। बड़ा सवालिया लगता है सब कुछ। 1 अरब और 30 करोड़ के देश में जहाँ नैतिकता हर रोज नये रसातल की ओर मुखातिब है। जहाँ दम तोड़ता समाजवाद, पूँजीवाद...
 पोस्ट लेवल : reverse Migration
Dr. Zakir Ali Rajnish
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मानव के चंद्रमा पर पहुंचने के 50 वर्ष: रोमांचक फिल्म सा है ये सफर-डॉ. सत्य पाल सिंहअंतरिक्ष में टिम-टिमाते तारों एवं अन्य आकाशीय पिण्डों को देखकर मानव मस्तिष्क सहज ही उत्सुक हो जाता है। मानव मन से यह प्रश्न सहज ही उठते हैं, कि ये पिण्ड, ग्रह या तारें, क्या हैं? इनक...
 पोस्ट लेवल : Moon Universe
Sanjay  Grover
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ग़ज़लकोई छुपकर रोता हैअकसर ऐसा होता हैदर्द बड़ा ही ज़ालिम हैऐन वक़्त पर होता हैशेर अभी कमअक़्ल है नाअभी नहीं मुंह धोता हैतुम ही कुछ कर जाओ नावक़्त मतलबी, सोता हैवो मर्दाना नहीं रहायूं वो खुलकर रोता है-संजय ग्रोवर
Sanjay  Grover
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बह गया मैं भावनाओं में कोई ऐसा मिलाफिर महक आई हवाओं में कोई ऐसा मिलाहमको बीमारी भली लगने लगी, ऐसा भी थादर्द मीठा-सा दवाओं में कोई ऐसा मिलाखो गए थे मेरे जो वो सारे सुर वापस मिलेएक सुर उसकी सदाओं में कोई ऐसा मिलापाके खोना खोके पाना खेल जैसा हो गयालुत्फ़ जीने की स...
Sanjay  Grover
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Photo by Sanjay Groverचांद से चिट्ठी आई है के दुनिया आनी-जानी है मंदिर-मस्ज़िद यहीं बना लो, मंज़र बड़ा रुहानी हैगांधीजी का नाम रटो हो, पहने हो जैकेट और कोटलंगोटी के नाम पे फिर क्यूं मरी तुम्हारी नानी हैआधी-पौनी दिखे सचाई,समझा ख़ुदको ज्ञानी हैअंधे कैसे होते होंगे...
Sanjay  Grover
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ग़ज़लcreation : Sanjay Groverसच जब अपनेआप से बातें करता हैझूठा जहां कहीं भी हो वो डरता हैदीवारो में कान तो रक्खे दासों केमालिक़ क्यों सच सुनके तिल-तिल मरता हैझूठे को सच बात सताती है दिन-रैनयूं वो हर इक बात का करता-धरता हैसच तो अपने दम पर भी जम जाता हैझूठा हरदम भीड़ इक...
Sanjay  Grover
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ग़ज़लcreated by Sanjay Groverहिंदू कि मुसलमां, मुझे कुछ याद नहीं हैहै शुक्र कि मेरा कोई उस्ताद नहीं हैजो जीतने से पहले बेईमान हो गएमेरी थके-हारों से तो फ़रियाद नहीं हैजो चाहते हैं मैं भी बनूं हिंदू, मुसलमांवो ख़ुद ही करलें खाज, मुझपे दाद नहीं हैइंसान हूं, इंसानियत की...
Sanjay  Grover
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ग़ज़लदूसरों के वास्ते बेहद बड़ा हो जाऊं मैंइसकी ख़ातिर अपनी नज़रों से भी क्या गिर जाऊं मैंएक इकले आदमी की, कैसी है जद्दो-जहदकौन है सुनने के क़ाबिल, किसको ये दिखलाऊं मैंजब नहीं हो कुछ भी तो मैं भी करुं तमग़े जमाबस दिखूं मसरुफ चाहे यूंही आऊं जाऊं मैंबहर-वहर, नुक्ते-वुक्ते,...
Sanjay  Grover
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ग़ज़लराज़ खुल जाने के डर में कभी रहा ही नहींकिसीसे, बात छुपाओ, कभी कहा ही नहींमैंने वो बात कही भीड़ जिससे डरती हैये कोई जुर्म है कि भीड़ से डरा ही नहीं !जितना ख़ुश होता हूं मैं सच्ची बात को कहकेउतना ख़ुश और किसी बात पर हुआ ही नहींकिसीने ज़ात से जोड़ा, किसीने मज़हब से...