ब्लॉगसेतु

समीर लाल
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कायल एक ऐसी विकट और विराट चीज है जो कोई भी हो सकता है, कभी भी हो सकता है, किसी भी बात से हो सकता है और किसी पर भी हो सकता है.मैने देखा है कि कोई किसी की आवाज का कायल हो जाता है, कोई किसी की सुन्दरता का, कोई किसी के लेखन का, कोई किसी के स्वभाव का, कोई किसी के नेतृत्...
समीर लाल
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पूरा भारत घर में बंद है सिर्फ उनको छोड़कर जिनको बाहर होना चाहिये जैसे डॉक्टर, पुलिस आदि. साथ ही कुछ ऐसे भी बाहर हैं जो पुलिस से प्रसाद लिए बिना अंदर नहीं जाना चाहते. मगर घर में बंद लोग पूरी ताकत से व्हाटसएप पर चालू हैं. अगर व्हाटसएप का मैसेज मैसेज न हो कर एक पैसे वा...
समीर लाल
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भारत यात्रा के दौरान सूचना दी मित्र को कि उनके शहर दर्शन पर हैं सपरिवार. शहर देखेंगे, कुछ सिद्ध मंदिरों मे दर्शन कर प्रभु का आशीष प्राप्त कर आप तक कल पहुँचेंगे.मित्र ने हिदायत दी कि मंदिर में भीड़ बहुत होती है, अतः दर्शन टाल दिया जाये. करोना वायरस फैला है, खतरा न पा...
समीर लाल
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भाई जी, आपका ठिया तो सबसे बड़े बाजार में है. पता चला है, होल सेल में डील करते हो. कुछ हमें भी बताओ भाई, सुना है दिवाली सेल लगी है आपके बाजार में.हमने कहा कि दिवाली कहो या दिवाला. सेल तो लगी है ६०% से ७०% की भारी छूट चल रही है. एस एम एस से विज्ञापन भी किया जा रहा है....
समीर लाल
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बिजली विभाग औरउसकी रहवासी कॉलिनियोंसे मेरा बड़ाकरीब का साबकारहा है. पिताजी बिजली विभागमें थे और हम बचपनसे ही उन्हींकॉलिनियों में रहतेआये.मैने बहुत करीबसे बिजली सेखम्भों को लगते देखा है, एक से एक ऊँचे ऊँचे. उच्च दाब विद्युतवाले लंबे लंबेखम्भे और टॉवर भी, सबलगते देखें...
समीर लाल
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मौका है भारत से सात समंदर पार कनाडा में हिन्दी के प्रचार एवं प्रसार के लिये आयोजित समारोह का. अब समारोह है तो मंच भी है. माईक भी लगा है.टीवी के लिये विडियो भी खींचा जा रहा है. मंच पर संचालक, अध्यक्ष, मुख्य अतिथि विराजमान है और साथ ही अन्य समारोहों की तरह दो अन्य प्...
समीर लाल
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यूँ तो गुजरता जाता है हर लम्हा इक बरस,दिल न जाने क्यूँ दिसम्बर की राह तकता है..तिवारी जी आदतन अक्टूबर खतम होते होते एक उदासीन और बैरागी प्राणी से हो जाते हैं. किसी भी कार्य में कोई उत्साह नहीं. कहते हैं कि अब ये साल तो खत्म होने को है, अब क्या होना जाना है. अब अगले...
Bharat Tiwari
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जामिया मिलिया इस्लामिया में हिंदी व पत्रकारिता विभाग में प्रोफेसर रह चुके, हिंदुस्तान की कई पीढ़ियों को हास्य-व्यंग्य  से परिचित कराने वाले अशोक चक्रधर की अपने विश्वविद्यालय पर आजबीती पर टिप्पणीतू तौ वहां रह्यौ ऐ, कहानी सुनाय सकै जामिआ कीअशोक चक्रधरचौं रे चम्पू...
Bharat Tiwari
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हरिशंकर परसाई की 'जिंदगी और मौत का दस्तावेज़' को पढ़ते हुए मुझे ऐसा क्या लगा होगा जो इसे टाइप किया और यहाँ आपसब के लिए लगाया...यह मैं अभी सोच रहा हूँ. शायद रचना के शुरू में उनका यह कहना –संपादकों ने कभी कहा था–इमरजेंसी है तो डरो। मैं डरा। फिर कहा–इमरजेंसी की तारीफ म...
समीर लाल
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अगर आपके पास घोड़ा है तो जाहिर सी बात है चाबुक तो होगी ही. अब वो चाबुक हैसियत के मुताबिक बाजार से खरीदी गई हो या पतली सी लकड़ी के सामने सूत की डोरी बाँधकर घर में बनाई गई हो या पेड़ की डंगाल तोड़ कर पत्तियाँ हटाकर यूँ ही बना ली गई हो. भले ही किसी भी तरह से हासिल की गई ह...