ब्लॉगसेतु

sanjiv verma salil
0
व्यंग्य रचना:अभिनंदन लो *युग-कवयित्री! अभिनंदन लो....*सब जग अपना, कुछ न परायाशुभ सिद्धांत तुम्हें यह भाया.गैर नहीं कुछ भी है जग में-'विश्व एक' अपना सरमाया.जहाँ मिले झट झपट वहीं सेअपने माथे यश-चंदन लोयुग-कवयित्री अभिनंदन लो....*मेरा-तेर...
समीर लाल
0
हमारे शहर से ६० किमी दूर एक दूसरा शहर था. वहाँ पर स्टेशन के आलूबोंडे (बटाटा बडा) बहुत मशहूर थे. छुट्टी के दिन अक्सर हम मित्र लोग एक ट्रेन से जाते. छक कर आलूबोंडे खाते और दूसरी ट्रेन से लौट आते. रास्ते भर गप्प सटाका भी हो जाता. तब व्हाटसएप, फेसबुक आदि नहीं होते थे,...
समीर लाल
0
इस बार देश में ऐसी भीषण गर्मी पड़ी कि अच्छे अच्छों की गरमी उतार कर रख दी.चुनाव की गरमी उतरी और बस, सूरज महाराज ने कमान थाम ली. मीडिया से कहने लगे कि अब हमें कवरेज दो. टीआरपी का मजा तुम लूटो और जबरदस्त कवरेज के कारण सेलीब्रेटी होने का मजा हम लूटेंगे. बस, फिर क्या था...
समीर लाल
0
चुनाव के परिणाम आ गये हैं. जनता ने अपना आदेश दे दिया है. टीवी पर तो सभी नेताओं ने इसे जनादेश कहते हुए सर माथे से लगा लिया है. यही एक मात्र दिन होता हैं जब जनता को आदेश देने की अनुमति होती है. अब इसके बाद पाँच साल तक वो इस गुस्ताखी की सजा काटती है कि तेरी इतनी हिम्म...
समीर लाल
0
भारत गपोड़ियों का देश है. जो गप्पी नहीं हैं, उनकी देश में कोई पूछ नहीं है.ऐसे में एक बड़ी सी गप्प हम भी हाँक ही लें. हुआ यूँ कि जब हमने सहित्यिक कृति ’बाल नरेन्द्र’ पढ़ी, तो हमसे रहा नहीं गया और हम पहुँच गये साहब का साक्षात्कार लेने. सर, आपके बचपन पर लिखी गई ’बाल नरेन...
समीर लाल
0
देश में चक्रवाती तूफान आया है. ऐसा नहीं है कि बिना बताये चुपचाप से चला आया हो. मौसम विभाग को पूरी जानकारी होती है. कितने बजे आयेगा. कहाँ से शुरु होगा, किन राहों से गुजरता हुआ कहाँ पर खत्म होगा. कितनी रफ्तार से गुजरेगा. सभी जानकारी दे दी जाती है. तैयारियाँ भी भरपूर...
समीर लाल
0
पास के घर से रेडिओ पर फरमाईशी नगमों के कार्यक्रम में गाना बज रहा था.गाने की फरमाईश इतने लोगों ने की थी कि लगा जैसे लोगों के पास पोस्ट कार्ड लिखकर गाने की फरमाईश करने के सिवा कोई काम ही नहीं है. जितनी देर गाना न बजता, उससे ज्यादा देर फरमाईश करने वालों के नाम बजते. म...
समीर लाल
0
नव रात्रे चल रहे हैं.आजकल घन्सु मौन धरे हैं. नंगे पाँव रहते हैं. सुबह एक गिलास दूध पीते हैं. फिर सारा दिन पूजा पाठ में लिप्त रहते हैं. शाम को आदतानुसार चौक पर आते हैं पान की दुकान पर, मगर जुबान से बोलते कुछ नहीं, बस आँख से बतियाते हैं. बात बात पर मुंडी मटकाते हैं न...
समीर लाल
0
तिवारी जी और घंसु देश की दोनों बड़ी पार्टियों का और तमाम आंचलिक पार्टियों का घोषणा पत्र पढ़ पढ़ कर तय कर रहे हैं कि किसमें से कौन सा हिस्सा उठाना है. इस तरीके से वो एक नया घोषणा पत्र तैयार कर रहे हैं. तिवारी जी और घंसु ने मिलकर गैर मान्यता प्राप्त एक नई पार्टी बना ली...
समीर लाल
0
उस रोज सरकारी अधिकारी घंसु को साथ ले गये थे सुबह सुबह. घंसु को मंहगे साबुन से नहला धुला कर एक कमरे में कैमरे के सामने कुर्सी पर बैठा दिया गया. मंत्री जी आये और उसके सामने एक छोटी चौकी लगाकर बैठ गये. फिर मंत्री जी ने घंसु के धुले हुए पैर फिर से धोये, पोंछे और फिर उस...