ब्लॉगसेतु

sanjiv verma salil
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दोहा सलिला:*मले उषा के गाल पर, सूरज छेड़ गुलालबादल पिचकारी लिए, फगुआ हुआ कमाल.*नीता कहती नैन से, कहे सुनीता-सैन.विनत विनीता चुप नहीं, बोले मीठे बैन.*दोहा ने मोहा दिखा, भाव-भंगिमा खूब.गति-यति-लय को रिझा कर, गया रास में डूब.*रोगी सिय द्वारे खड़ा, है लंकेश बुखार.भिक्षा...
 पोस्ट लेवल : दोहा सलिला 2018 ki laghukathayen
sanjiv verma salil
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नवगीत-दरक न पाऐँ दीवारेंहम में हर एक तीसमारखाॅंकोई नहीं किसी से कम ।हम आपस में उलझ-उलझकरदिखा रहे हैं अपनी दम ।देख छिपकली डर जाते परकहते डरा न सकता यम ।आॅंख के अंधे देख-न देखेंदरक रही हैं दीवारें ।*फूटी आॅंखों नहीं सुहातीहमें, हमारी ही सूरत ।मन ही मन में मनमाफि़कगढ़...
 पोस्ट लेवल : नवगीत 2018 ki laghukathayen
PRAVEEN GUPTA
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गोरखपुर के मोहित गोयनका की बड़ी उपलब्धि, बने याहू के डायरेक्‍टर गोरखपुर के मोहित गोयनका ने यूनाइ‍टेड स्‍टेट ऑफ अमेरिका में कामयाबी के झंडे गाड़ दिए हैं। उन्‍होंने अपने नाम बड़ी उपलब्धि दर्ज कराई है। 24 फरवरी को उन्‍होंने याहू डॉट इन (yahoo.in) के डायरेक्‍टर के...
rishabh shukla
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Ram Janm Bhumi Ayodhyaराम लला अब आयेंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे|ज़न मानस मन भायेंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे||मंदिर वहीं बनाएंगे... तुम हो करुणा सागर, मर्यादापुरुषोत्तम सब के प्रिय, तेरी अमिट छवि है हर हृदय मे, बाट जोहती सबकी आँखे, अब मेरे...
Vikram Pratap Singh Sachan
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सुबह सवेरे उगता सूरजजग में उजियारा लाता है पौधों को भी भोजन देता जीवन-चक्र चलाता है।रंग-बिरंगे फूल हो हर्षितभौरा भी गाना गाता है रफ्ता-रफ्ता छटा&...
 पोस्ट लेवल : kavitayen bal kavita
Vikram Pratap Singh Sachan
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फटी जींस में घूम रहा है हनी सिंह पे झूम रहा है भारत का नव युवा है फ़ैशन की हद चूम रहा है ।सर पे छत्ता मधुमक्खी सामुँह में&nbs...
 पोस्ट लेवल : kavitayen
Vikram Pratap Singh Sachan
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नोयडा की हवाई इन्सानी बस्तियाँघर मानो हवा में तैरती कश्तियाँआस-पास कंक्रीट का जंगलबची खुची जमीन पर गाड़ियों का दंगलबाकी सब कुशल मंगलसीमेंट की बीमों पर पक्षियों के घौसलेहवा में तड़पते तन्हा बच्चो के हौसलेहवा में फिजा में चहूँ ओर चोंचलेऊँचाईयो का दस्तूर,फिजूल के फितू...
 पोस्ट लेवल : Noida Authority Kavita kavitayen NOIDA Traffic NOIDA
HARSHVARDHAN SRIVASTAV
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sanjiv verma salil
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बुंदेली हाइकु :संजीव*मोरी मतारीनज़र मत फेरोओ री मतारीघबरा खें टेरोडगर है अँधेरीमोहे डर घेरोन डूबे नैयाफँसी भवसागरबचा ले मैयाएकै बिनै हैन सुत खों बिसारोतन्नक हेरो* बुंदेली मुक्तक  *को खों हेरत फिर रईं बिन्ना?पाँव नच रए ता-ता-धिन्ना उटकन दीदा काढ़ क...