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नवीन "राज" N.K.C

 पश्चिम बंगाल, भारत   पुरुष

अब तक सपनों को- पंख नहीं लगे हैं, बस बाजुओं में बिजली सी- बैचैनी बसी है! शिराओं की सरसराहट, उम्मीद मरने नहीं देती, भूत और वर्तमान भी, भविष्य को डरने नहीं देती! उम्मीद का ये कैसा, अविचल आधार है, मौत भी इंतज़ार करेगी, ज़िन्दगी का ऐसा विचार है!