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सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी

 उत्तर प्रदेश, भारत   पुरुष

यहाँ रम जाने के बाद लगता है कि इस इल्ज़ाम से बच ही जाऊंगा : ज़िन्दगी में शौक़ क्या कारे-नुमाया कर गये। बी.ए.किया,नौकर हुए,पेन्शन मिली और मर गये॥