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 दिल्ली, भारत   पुरुष

स‌ोशल मीडिया के दौर में लोग चिट्ठियां लिखना भूलते जा रहे हैं। फेसबुक, ट्विटर और ईमेल के बढ़ते प्रचलन ने चिट्ठी लिखने की रवायत को तकरीबन खत्म स‌ा कर दिया है। रही स‌ही कसर मोबाइल फोन ने पूरी कर दी है। लोगों को लिखकर अपनी बात कहने की बजाय मोबाइल पर बात करना ज्यादा आसान लगने लगा है। व्हाट्सएप्प और चिटचैट पर मैसेज-भेजना और तुरंत जवाब पाना ज्यादा मुफीद लगने लगा है। तकनीक के विकास के स‌ाथ ऎसा होना लाजिमी भी है। हालांकि आज भी जब कोई अपने दिल की बात कहना चाहता है। किसी स‌े शिकवा-शिकायत या शुक्रिया कहना चाहता है तो चिट्ठी के जरिये ही अपनी भावनाएं स‌ामने रखता है। जाहिर है चिट्ठियों का ताल्लुक हमारे स‌ुख-दुख स‌े है। हमारी कोशिश स‌िर्फ इतनी है कि चिट्ठियों की इस परंपरा को कायम रखा जाए। आगे बढ़ाया जाए। www.MyLetter.in इसी दिशा में एक छोटी स‌ी कोशिश है। आपकी चिट्ठियों का स्वागत है और इंतजार भी। स‌ंपर्क- merekhatt@gmail.com