ब्लॉगसेतु

Devendra Gehlod
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 पोस्ट लेवल : fathers-day pitra-diwas ghazal sachin-shashvat
Meena Sharma
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एक हृदय पाने की कोशिश !इस कोशिश में शब्द छिन गएचेहरे की मुस्कान छिन गईअंतर के सब बोल छिन गएयादों के सामान छिन गए !पर हँसने गाने की कोशिश !एक हृदय पाने की कोशिश !इस दरिया की गहराई मेंडूबे उतरे, पार नहीं थारात गुज़रती तनहाई मेंसपनों का उपहार नहीं था !ज़िंदा रह पाने की...
kuldeep thakur
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सादर अभिवादनआज भी भाई कुलदीप जी नहीं हैंआज हम प्रस्तुति मे एक नया प्रयोग कर रहे हैंआज की प्रस्तुति है एक ही ब्लॉग सेवो ब्लॉग हैमेरे मन का एक कोनाब्लॉगर बहन हैंआत्ममुग्धाएक साधारण होममेकर जिसका दिमाग खुराफाती है। सक्रिय मस्तिष्क जो कही भी रचनात्मकता देखता है तो तुरं...
 पोस्ट लेवल : 1430
Yashoda Agrawal
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मेरी ही करुणा परटिकी है ये सृष्टि ..मेरे ही स्नेह से उन्मुक्त होते हैं नक्षत्र..मेरे ही प्रेम सेआनंद प्रस्फुटित होता है ..मेरे ही सौंदर्य पर डोलता है लालित्य ..और मेरे ही विनय पर टिका है दंभ..कि प्रेम स्नेह और करुणा का अक्षय पात्र हूँ मैं जितना...
Vidyut Maurya
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लक्ष्मी विलास पैलेस घूम लेने के बाद हमारी अगली मंजिल है महाराजा फतेह सिंह संग्रहालय। इसका टिकट हमने पहले से ही ले रखा है। दोनों संग्रहालय का टिकट साथ लेने पर थोड़ा सा डिस्काउंट मिल जाता है। महल से फतेह सिंह संग्रहालय जाने के लिए तकरीबन आधा किलोमीटर पैदल चलना पड़ता...
 पोस्ट लेवल : Gujrat
Rajeev Upadhyay
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There is so much fury about the protesting doctors. Everyone is out to educate them, ignoring everything relating to this protest. Before anything is said fact must be presented. While treatment, an old man of the age of more than 80 years died few days back. This...
 पोस्ट लेवल : Politics English Article
राजीव सिन्हा
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डोरबेल की सुमधुर संगीत-लहरी भी उमा के चित्त को अशांत होने से रोक न सकी।अभी-अभी तो वह पूजा करने बैठी थी। फिर यह व्यवधान..? ! नौकर उसके सामने शादी का एक कार्ड धर गया। गहरे पीले रंग पर लाल बनारसी काम के बॉर्डर से सजे उस कार्ड को उमा ने उत्सुकता से देखा। एड्रेस वाली जग...
शिवम् मिश्रा
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शायद कोई -सा ही बचपन ऐसा गुजरा हो जिसने परियों की कहानी न सुनी हो. बचपन ही क्यों, बड़ों को भी लुभाने वाली लोककथाएं या धर्मकथाओं में भी अप्सराओं की कथाएं कही /सुनी/ पढ़ी जाती रहीं हैं. अधिकांश किसी श्राप वश धरती लोक पर आतीं और मोह के बंधन में बँध कर भी फिर लौट जातीं अ...
 पोस्ट लेवल : ब्लॉग बुलेटिन 15-06-2019
समीर लाल
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हमारे शहर से ६० किमी दूर एक दूसरा शहर था. वहाँ पर स्टेशन के आलूबोंडे (बटाटा बडा) बहुत मशहूर थे. छुट्टी के दिन अक्सर हम मित्र लोग एक ट्रेन से जाते. छक कर आलूबोंडे खाते और दूसरी ट्रेन से लौट आते. रास्ते भर गप्प सटाका भी हो जाता. तब व्हाटसएप, फेसबुक आदि नहीं होते थे,...
sanjiv verma salil
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दोहा सलिला- ब्रम्ह अनादि-अनन्त है, रचता है सब सृष्टि निराकार आकार रच, करे कृपा की वृष्टि *परम सत्य है ब्रम्ह ही, चित्र न उसका प्राप्त परम सत्य है ब्रम्ह ही, वेद-वचन है आप्त*ब्रम्ह-सत्य जो जानता, ब्राम्हण वह इंसानहर काया है ब्रम्ह का, अंश सके वह...
 पोस्ट लेवल : दोहा ब्रह्म दोहा brahma