ब्लॉगसेतु

अभिषेक ठाकुर
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मुझे हमेशा अफ़सोस रहेगा कि तुम मम्मी से नहीं मिल सकीं. पता है, ये कोई तीन साल पहले की बात है. हालांकि इसकी शुरुआत उससे भी पहले हो चुकी थी. मुझे याद है वो अक्सर अपनी चीज़ों को इधर-उधर रखकर भूल जाती थीं. ये ख़ासकर उनके चश्मे के साथ होता था. हम सभी के साथ...
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अभिषेक ठाकुर
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रमज़ान के पूरे तीस रोज़ों के बाद ईद आई है. महीने का आख़िरी दिन है. आबिद अपने कम्प्यूटर इंस्टिट्यूट के भीतर बैठा है. सामने मेज़ पर एक प्रोजेक्टर रखा है. ऊपर एक पंखा बेहिसी से मंडरा रहा है. सामने काले शेड वाला एक पारदर्शी दरवाज़ा है जिससे बाहर गुज़रती दुनियादारी दिख रही है...
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Harsh Wardhan  Jog
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शनिवार की छुट्टी आ गई थी और रविवार को तो होती ही है इसलिए नरूला जी बहुत रिलैक्स थे. सुबह बैंक के लिए तैयार हुए तो बैग भी पैक कर लिया. बैंक जाते हुए रास्ते में मोटरसाइकिल की टंकी फुल करा ली हवा भी चेक करा ली. बैंक पहुँच कर हाजिरी लगाई और ब्रांच के सेकंड मैन के कान म...
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Devendra Gehlod
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Devendra Gehlod
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jaikrishnarai tushar
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 चित्र साभार गूगलसृष्टि का संहार रोको/युद्ध कभी सुपरिणाम नहीं देताएक सामयिक गीत-क्या यही सुदिनधरा-गगनचाँद-सूर्यसब हुए मलिन ।नायक सेनरभक्षी हो गए पुतिन ।बारूदों सेसारी दुनिया को पाटो,कांतिहीनवीटो हैशक्तिहीन नाटो,मानवताचीख रहीक्या यही सुदिन ।दृष्टिहीनर...
Devendra Gehlod
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Devendra Gehlod
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Devendra Gehlod
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Devendra Gehlod
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 पोस्ट लेवल : aanis-moin ghazal