ब्लॉगसेतु

संगीता पुरी
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आप सबों को अब मालूम हो गया होगा कि हमारे एप्प से आप प्रतिदिन हर मामलों में ग्रहों के प्रभाव की स्थिति को समझ सकते हैं। हर दिन पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तराधिकारी की स्थिति के बारे में आपको हमारे एप्प में लिखा मिलेगा। पढ़ाई-लिखाई, निर्णय-शक्ति, संतान, उत्तर...
Anurag Choudhary
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ES File Explorer File Manager a must have utility for Android Smartaphone and Tablet-ES File Explorer is a full featured free to download file manager for smart phones operating on the android OS. It makes very easy to manage your applications, Files-Folders, Photo...
 पोस्ट लेवल : ES File Explorer ANDROID DEVICES TIPS
Kajal Kumar
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 पोस्ट लेवल : मोदी chokha litti लिट्टी modi चोखा
BAL SAJAG
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" The Dark Way "In the dark way of lifeindicating numerous plight No one know the perfection of die but still you have to live great life negativity will jumble your mind makes you in all blind destination will go behind but still you...
kuldeep thakur
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सादर अभिवादन। अब हम विकसित देशवासी हो गये हैंविकासशील देश का दर्जा था कभी सारी क़वायद ज़्यादा टैक्स के लिये अरे भाई! नाम दरोगा रखने से लोग कहाँ डरने वाले हैं! -रवीन्द्र   आइए अब आपको आज की पसंदीदा रचनाओं की...
 पोस्ट लेवल : 1679
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आशीषबढ़ो बिटियाबिटिया तुम आगे बढ़ो,पड़ो नहीं कमजोर |आगे बढ़ने के लिए, श्रम कर लो पुरजोर |श्रम कर लो पुरजोर, बनो तुम सबकी प्यारी |नर से निकली आज, अरे आगे अब नारी |कह राधे गोपाल, भाग्य उनके हैं जागे |जिस घर तेरा वास, बढ़ो बिटिया तुम आगे ||
Yashoda Agrawal
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ईसा पूर्व और पश्चात जैसेभावनाओं को बाँटने की सुविधादेती नहीं हैं ज़िन्दगीकिसी पुरातत्त्व अवशेष जैसेअचानक उभर आती हैं स्मृतियाँकुछ पाषाण हो चुकींकुछ अभी भी कंकालवो जो पहली बार दरका था विश्वासअब भी किसी पर नहीं हो पातावो जो पेचीदा तरीकों से घुलनशील हैं यादेंउनका एक रं...
अनीता सैनी
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वे स्वतः ही पनप जाते हैं,गंदे गलियारे मिट्टी के ढलान पर,अधुनातन मानव-मन की बलवती,हुई आकांक्षा की तरह ।रेगिस्तान-वन खेत-खलिहान घर-द्वार, मानवीय अस्तित्त्व से जुड़ी बुनियादी तहें, इंसानी साँसों को दूभर बनाते अगणित बीज, गाजर घास बन गयी है अब मानवता...
अनीता सैनी
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आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत है बच्चों अब मत समय गँवाओप्रेम कुल्हाड़ी धरा का श्रृंगार उधार बाकी है ये ज़रूरी तो नहीं आओगे के न आओगोएनआरसी का भय"मदर इन लव"अद्धभुत पलसतसई काव्य परम्परा की महत्वपूर्ण कृतिलाल मिर्च का भरवां अचार बनाने...
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--भोले-शंकर आओ-आओ।निद्रा-तन्द्रा दूर भगाओ।।--आज आदमी है बेचारा,बौराया है ये जग सारा,दूषित है परिवेश हमारा,हे शिव! आकर आज वतन में,डमरू का तुम नाद सुनाओ।निद्रा-तन्द्रा दूर भगाओ।।--छाया है घनघोर अँधेरा,नकली भगवानों ने घेरा,बड़े-बड़े हैं तम्बू-डेरा,सच्चाई को करो उजागर,...