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ऋता शेखर 'मधु'
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धरती को रंगों से भर देंसबके माथे खुशियाँ जड़ देंघोलो अब रंगगुझियों की जो टाल लगाएँसबका मन मीठा करवाएँप्रीत भरा लेकर आलिंगनशिकवे कोसों दूर भगाएँझूम जाएँ सारे हुरियारपीसो अब भंगआम्रकुंज में बौर जो महकागूंज उठे कोयल के रागसमय न देखे उम्र न देखेकिलक उठे रंगीले फागदेखो ब...
ऋता शेखर 'मधु'
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 122 122 122 122चले थे कहाँ से कहाँ जा रहे हैंशजर काट कैसी हवा पा रहे हैंन दिन है सुहाना न रातें सुहानीख़बर में कहर हर तरफ़ छा रहे हैंमुहब्बत की बातों को दे दो रवानीन जाने ग़दर गीत क्यों गा रहे हैंहै रंगीन दुनिया सभी को बतानाये सिर फाँसियों पर बहुत आ रहे हैंविरास...
ऋता शेखर 'मधु'
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 समय कठिन हैक्या कुंठा या क्या गिलाजो मिलना था वही मिलामन को खुशियों से भर लोसमय कठिन हैकिसने किसको क्या- क्या बोलाशब्द शब्द किसने है तोलामन को अब तो पावन कर लोसमय कठिन हैजिन बन्धु की याद हो आतीउनको झट से लिख दो पातीया फिर डायल नम्बर कर दोसमय कठिन हैयदि बाकी ह...
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ऋता शेखर 'मधु'
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चम्पू काव्य साहित्य की वह विधा है जिसमें गद्य और पद्य, दोनों शामिल रहते है। पद्य भाग में संवाद द्वारा अभिव्यक्ति दी जाती है तथा गद्य भाग में कुछ वर्णन भी रहता है।
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ऋता शेखर 'मधु'
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 लघुकथा- लंच बॉक्सदसवीं कक्षा की क्लास लेते हुए अचानक सुधा मैम ने पूछा," बच्चों, यह बताओ कि आज सुबह का नाश्ता किये बगैर कौन कौन आया है।"एक छात्रा ने हाथ उठाया।" क्या घर में कुछ बन नहीं पाया था""बना था, पर उसे छोटी बहन के लंच बॉक्स में मम्मी ने देकर भेजा।"...
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ऋता शेखर 'मधु'
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दोहा गीतिकारंग बिरंगे पुष्प हैं, बगिया के आधार।मिलजुल कर मानव रहें, सुन्दर हो संसार।।तरह तरह की बोलियाँ, तरह तरह के लोग।मन सबका है एक सा, सुखद यही है सार।।मंदिर में हैं घण्टियाँ, पड़ता कहीं अजान।धर्म मज़हब कभी कहाँ, बना यहाँ दीवार।।दान पुण्य  से है धनी, अपना भार...
 पोस्ट लेवल : गीतिका छंद दोहा
ऋता शेखर 'मधु'
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महिला दिवस के उपलक्ष्य में कर्णेभिः में आज लेकर आई हूँ...आठवाँ वचन|सात वचन तो विवाह वेदी पर दिए जाते...लघुकथा में जानिये कि आठवाँ वचन कौन सा होना चाहिए|
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Basudeo Agarwal
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बह्र:- 2122  1212  22प्यास दिल की न यूँ बढ़ाओ तुम,जान ले लो न पर सताओ तुम।पास आ के जरा सा बैठो तो,फिर न चाहे गलेे लगाओ तुम।चोट खाई बहुत जमाने से,कम से कम आँख मत चुराओ तुम।इल्तिज़ा आख़िरी ये जानेमन,अब तो उजड़ा चमन बसाओ तुम।खुद की नज़रों से खुद ही गिर कर के,आग न...
Basudeo Agarwal
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बह्र:- 212*4तीर नज़रों का उनका चलाना हुआ,और दिल का इधर छटपटाना हुआ।हाल नादान दिल का न पूछे कोई,वो तो खोया पड़ा आशिक़ाना हुआ।ये शब-ओ-रोज़, आब-ओ-हवा आसमाँ,शय अज़ब इश्क़ है सब सुहाना हुआ।अब नहीं बाक़ी उसमें किसी की जगह,जिनकी यादों का दिल आशियाना हुआ।क्या यही इश्क़ है, रूठा दि...
Basudeo Agarwal
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बह्र:- 2222 2222 2222 222ग़म पी पी कर दिल जब ऊबा, तब मयखाने याद आये,तेरी आँखों की मदिरा के, सब पैमाने याद आये।उम्मीदों की मिली हवाएँ जब भी दिल के शोलों को तेरे साथ गुजारे वे मदहोश ज़माने याद आये।मदहोशी में कुछ गाने को जब भी प्यासा दिल मचला, तेरा हाथ पकड़ जोे...