ब्लॉगसेतु

kuldeep thakur
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।। भोर वंदन ।।"वह तू उषा! मेरी आँखों पर तेरा स्वागत है...पत्तों की श्यामता के द्वीप डुबोते हुएहुस्न हिना के गन्ध ज्वार-सी हरित-श्वेत जो उदय हुई है,वह तू उषा! मेरी आँखों पर तेरा स्वागत है..!!"~ मदन वात्स्यायनब्लॉग पर बिखरे पड़े शब्दों को समेटते हुए ...चलिए हम सभी आगे...
 पोस्ट लेवल : 1825
Yashoda Agrawal
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आइना देख कर तसल्ली हुईहम को इस घर में जानता है कोईआंखों से आंसुओं के मरासिम पुराने हैंमेहमां ये घर में आएं तो चुभता नहीं धुआंचूल्हे नहीं जलाए कि बस्ती ही जल गईकुछ रोज़ हो गए हैं अब उठता नहीं धुआंये दिल भी दोस्त ज़मीं की तरहहो जाता है डांवा-डोल कभीये शुक्र है कि मिर...
 पोस्ट लेवल : गुलज़ार
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--लोगों मेरी बात पर, कर लेना कुछ गौर।ठण्डा करके खाइए, भोजन का हर कौर।।--अफरा-तफरी में नहीं, होते पूरे काम।मनोयोग से कीजिए, अपने काम तमाम।।--कर्मों से ही भाग्य का, बनता है आधार।कर्तव्यों के बिन नहीं, मिलते हैं अधिकार।।--देकर पानी-खाद को, फसल करो तैयार।तब विचार से ला...
 पोस्ट लेवल : दोहे फसल करो तैयार
Vikram Pratap Singh Sachan
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2009 का दौर था, मेरा आशियाना हैदराबाद में था। उसी दौरान लोकसभा चुनाव हुये। आँध्रप्रदेश में काँग्रेस का बोलबाला रहा, जहाँ तक मुझेयाद है 45 मे...
अनीता सैनी
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 मित्रों!बुधवार की चर्चा में सबसे पहले देखिए कोरोना काल में आज का मुद्दा "अर्थ व्यवस्था में गिरावट और बेरोजगारी"देश में तमाम समस्याएं हैं, लेकिन उन समस्याओं में जनता को कौन-सी समस्या सबसे ज्यादा परेशान कर रही है? यानी देश के सामने क्या है सबसे बड़...
kumarendra singh sengar
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आज की पोस्ट का बस इतना ही सार है....  कोई भी हो हर ख्वाब तो सच्चा नहीं होता, बहुत ज्यादा प्यार भी अच्छा नहीं होता,कभी दामन छुड़ाना हो तो मुश्किल हो, प्यार के रिश्ते टूटें तो, प्यार के रस्ते छूटें तोरास्ते में फिर वफाएं पीछा करती हैं. .#हिन्दी_ब्लॉगिंग
 पोस्ट लेवल : प्यार भावना रिश्ते
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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एक अनाड़ी नाविक उतरा नदी में इस यक़ीन के साथ कि पार लग जाएगामझधार तक पहुँचा क्रुद्ध हवा ने अचानक विश्वासघात कियाछूने लगी नीर नदी का मनमानी ताक़त से उठती-गिरती तीव्र लहरों में नाव का बैलेंस डगमगा गया अकेली नाव दूर बहती दिखाई दी!© रवीन्द्र सिंह यादव 
Navin Joshi
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-छात्रावास में स्थायी बंदी की घोषणा, न निकाले गए कर्मचारियो...
 पोस्ट लेवल : News
sanjiv verma salil
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मुक्तककाटे दुर्जन शीश, सुगीता पाठ पढ़ाया।साथ पांडवों का दे, कौरव राज्य मिटाया।।काम करो निष्काम, कन्हैया बोले हँसकर।अर्जुन का रथ थाम, चले झट मोहन तजकर।http://divyanarmada.blogspot.in/
 पोस्ट लेवल : मुक्तक
sanjiv verma salil
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नवगीतसाक्षी*साक्षीदेगा समय खुद*काट दीवारें रही हैंतोड़ना है रीतियाँ सबथोपना निज मान्यताएँभुलाना है नीतियाँ अबकौन-किसका हाथ थामेछोड़ दे कब?हुए कपड़ों की तरहअबदेह-रिश्ते,नेह-नातेकूद मीनारें रही हैंसाक्षी देगा समय खुद*घरौंदे बंधन हुए हैंआसमानों की तलब हैलादना अपना नजर...
 पोस्ट लेवल : नवगीत साक्षी