ब्लॉगसेतु

Rohit Mewada
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 पोस्ट लेवल : Blogging
Hari Mohan Gupta
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            बाल दिवस कोई राही बालक मुझको,भीख माँगता मिल जाता था,मैं बस उसको पास बुला कर,इसी बात को समझाता था,भीख माँगना बुरी बात है,श्रम जीवी बन कर तो देखो,मेहनत के बल जीना सीखो |     &...
 पोस्ट लेवल : Kavita
Meena Bhardwaj
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(1)थके तन में बोझल मनडूब रहा है यूं .....जैसे..अतल जल मेंपत्थर का टुकड़ा(2)स्नेहिल अंगुलियों कीछुवन मांगता है मन..बन्द दृगों की ओट मेंनींद नहीं..जलन भरी है(3)दिखावे से भरपूरढेर सारी गर्मजोशीआजकल केरिश्ते-नाते भी ..हायब्रिड गुलाब जैसे लगते हैं★★★
 पोस्ट लेवल : क्षणिकाएँ
संतोष त्रिवेदी
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चिट्ठी लिखी गई पर पराली वाला मौसम देखकर शरमा गई।सरकार बिलकुल बनते-बनते रह गई।सबसे बड़ी तकलीफ़देह बात तो यह रही कि लड्डुओं ने पेट में पचने से ही इंकार कर दिया।खाने के बाद पता चला कि वे ग़लत पेट में चले गए।अब समस्या सरकार बनाने से ज़्यादा लड्डुओं को पचाने की हो गई।वे...
BAL SAJAG
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" बूँद "देखो क्या क्या लाई बूँद,पत्तों से फिर टपकती बूँद |मोती जैसी चमकती बूँद,जैसे कोई इंद्रधनुष | सीधे आकर जमीं पर,गिरती थकी हुई सी लगती है | यही चाहते हैं हैं हम सारेकल फिर से बरसों बून्द | कवि : सुल्तान कुमार , कक्षा : 5th , अपनाघरकवि परिचय : यह...
Mayank Bhardwaj
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Kya aap Photo Voter id Card Download करना चाहते है. या आप Photo wala Voter id Kaise Download Kare इसकी जानकारी प्राप्त करना चाहते है तो मेरा आज का यह Article आप सभी लोगो के लिए है क्युकी अपने आज के इस Article के माध्यम से मैं आप सभी को बताने वाला हु कि आप किस तरह ए...
 पोस्ट लेवल : Voter id Card ki Jankari
सुशील बाकलीवाल
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       प्राय: पारिवारिक पिकनिक पार्टियों में, मंदिर, बगीचे या ऐसे ही सार्वजनिक स्थानों पर समूह में बैठकर या फिर अपने दैनिक जीवन में कचोरी-समौसे, पोहे, जलेबी, इमरती जैसी खाद्य सामग्री बाजार में उपलब्ध न्यूज पेपर के टुकडों पर रखकर बेची हुई हम आसान...
ANITA LAGURI (ANU)
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मौत भले ही एक रहस्य हो इस नश्वर शरीर के  सुक्ष्म तत्वो में    विलीन हो जाने का प्रकाश पुंज हो जाने का परंतु, सिर्फ वहांँ ध्यान केंद्रित करो जहां सारी इंद्रियां   एकसार हो तुम्हारी रक्त धमनियों में एक रिदम का सृजन करें क्योंकि यह एक अकाट्य सत्य है जाना तो सबको है उस...
kuldeep thakur
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स्नेहिल नमस्कारआज हिमांचल मे बिजली गुल हैसूचना आई है..भाई कुलदीप जी नहीं आएँगे सो आजहम हैं और कल सखी श्वेता जी रहेंगी...एक चिन्तन...दहेज़ में बहू क्या लायी..ये सबने पूछा..लेकिन एक बेटी क्या क्या छोड़ आई..किसी ने सोचा ही नहीं.---–--कवयित्री बतौर गृहणीहमेशा एक झाड़ू एक...
 पोस्ट लेवल : 1584
Yashoda Agrawal
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कैसे लिखूं,मां पर,निःशब्द हो जाता हूं मैं,ज्ञान शून्य हो जाता हूं मैं ।कैसे लिखूं,मां पर,कोई शब्द ही नही,जो मां को परिभाषित कर सके ।कैसे लिखूं,मां पर,मां के त्याग को,कैसे कोई परिभाषित कर सकता है ।कैसे लिखूं,मां पर,मां के दर्द को,कैसे कोई परिभाषित कर सकता है ।मां वो...