ब्लॉगसेतु

अभिलाषा चौहान
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 पोस्ट लेवल : कविता
Vikram Pratap Singh Sachan
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ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें, दिलों में उल्फ़त नई-नई है, अभी तक़ल्लुफ़ है गुफ़्तगू में, अभी मोहब्बत नई-नई है। अभी न आएँगी नींद न तुमको, अभी न हमको सुकूँ मिलेगाअभी तो धड़केगा दिल ज़्यादा, अभी मुहब्बत नई नई है।बहार का आज पहला दिन है, चलो चमन में टहल के आएँफ...
अभिलाषा चौहान
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 पोस्ट लेवल : कविता
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--है नशा चढ़ा हुआ, खुमार ही खुमार है।तन-बदन में आज तो, चढ़ा हुआ बुखार है।।--मुश्किलों में हैं सभी, फिर भी धुन में मस्त है,ताप के प्रकोप से, आज सभी ग्रस्त हैं,आन-बान, शान-दान, स्वार्थ में शुमार है।तन-बदन में आज तो, चढ़ा हुआ बुखार ह...
 पोस्ट लेवल : गीत चढ़ा हुआ बुखार है
ANITA LAGURI (ANU)
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                           छैनी-हथौड़े से ठोक-पीटकर कविता कभी बनते हुए देखी है तुमने? कुम्हार के गीले हाथों से पिसलते-मसलतेमाटी को कभी कविताबनते देखा है तुमने?शायद नहींकव...
BAL SAJAG
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" भारत देश "भारत  देश है सबसे अच्छा,हर एक बच्चा बोलता सच्चा |जिन्होंने अंग्रेजों को मार भगाया,वही भारत माँ का सच्चा बच्चा |भगत सिंह ,राजगुरु को दे दिया फँसी,तब भी बोल बाहें थे हम है भारतवासी |जहाँ लोग बच्चों को मौका देते,बच्चों को पढ़ाते और खिलाते |  ...
अनीता सैनी
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आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत हैजन्मदिवस चाचा नेहरू कामहावर आहट तेरे आने कीनर्म आहट खुशबुओं कीबड़ा महँगा पड़ा मुझे दोस्त बनानानिजता मेरी हर लेना..!लिफ़ाफ़े को ठेलता मज़मूनकलम कुछ नहीं लिख रही रास्ते कलौंजी के गुण राजा खुश है ढह गया एक देशधन्यवादद...
विजय राजबली माथुर
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Manish SinghSeptember 26 at 5:20 PM दो ध्रुवीय विश्व हमारी पीढ़ी ने देखा है। हमारी सरकारों को कभी रूस और कभी अमरीका की कृपा के लिए जतन करते देखा है। पर एक वक्त था, जब इनके बीच गुटनिरपेक्ष देश तीसरा ध्रुव थे, भारत इनका अगुआ था, और नेहरू इसका चेहरा।उस जमाने मे हम...
kuldeep thakur
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सादर अभिवादन।चलो दर्पण पर जमीं हुई धूल साफ़ करने का मुकम्मल मन बनायें,पहले दर्पण में देखने भावशून्य चेहरे को कोमल भावों से सजायें।  -रवीन्द्र आइये आज की पंसदीदा रचनाओं पर नज़र डालें-  इन खामोशियों में...श्वेता सिन्हा ...
 पोस्ट लेवल : 1581
Yashoda Agrawal
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मंज़िलों को पाने का मज़ा भी तभी हैजब तक वो ना मिले;मिल जाये वो अगर तो लगता हैजैसे ख़्वाब कोई हक़ीक़त बन गए।और, ना मिले वो अगर तो लगता हैजैसे ज़मीन-आसमां सब इक कर दूँ।चाँद-सितारे भी तोड़ डालूँ, परएक बार पा तो लूँ, उसे।चाहे जैसा भी हो वो, हर उपाए कर लूँ,मंदिर-मस्जिद-...