ब्लॉगसेतु

Kajal Kumar
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BAL SAJAG
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"पुरानी झलक देखा " पुरानी झलक देखा | आज मै अपने गाँव को अलग देखा ,पर मैने पुरानी झलक देखा | वो सड़क , वो गलिया ,बदल तो गयी है | पर उसमे चलने की ,अंदाज वही है | पैन से बहता पानी ,किसान और खेत की कहानी | बदल तो गयी है ,लेकिन गाँव की आवाज वही ह...
भावना  तिवारी
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 डायरी के पन्नों से-------।आज नवमी है -कल दशहरा है।कल आप लोग व्यस्त रहेंगे रावण पर पत्थर फेकने में---रावण का पुतला जलाने में । तो यह व्यंग्य आज ही पढ़ लें--पता नहीं कल समय मिले न मिले--[ आगामी व्यंग्य संग्रह - रोज़ तमाशा मेरे आगे---से]...
निवेदिता श्रीवास्तव
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 कितना सफर है बाकी कहाँ तक चलना होगाकहाँ ठिठकनी है साँसबांया ठिठका रह जायेगा या दाहिना चलता जायेगा !फिर सोचती हूँक्यों उलझ के रह जाऊँगिनूँ क्यों साँस कितनी आ रहीआनेवाली साँस को नहीं बना सकतीगुनहगार जानेवाली साँस का !ऐ ठिठकते कदम ! गिनती भूल चला...
भावना  तिवारी
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                लखिमपुर में घटी घटनाओं की अनकही कहानी लखिमपुर में जो हिंसा की घटना कुछ दिन पहले घटी उसको लेकर आप ने हर टीवी चैनल पर बहुत कुछ सुना होगा. पर शायद ही किसी मीडिया विश्लेषक ने आपको उस कारण के विषय में कुछ बताय...
Kajal Kumar
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विमलेश त्रिपाठी
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बेचूलाल का भूत उर्फ बेलाकाभू पंकज मित्र   पंकज मित्रजब से ‘क़यामत से क़यामत तक’ को ‘क्यू एस क्यू टी’ और ‘दिलवाले दुल्हनिया लेजाएँगे’ को डी डी एल जे कहने का प्रचलन हुआ तकरीबन उसी वक्त यह तय हो गया था कि‘बेचूलाल का भूत’ को ‘बे ला का भू’ कहा जाएगा, हालाँकि इसकी और...
राजीव तनेजा
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अमूमन अपनी जिंदगी में हम सैकड़ों हज़ारों लोगों को उनके नाम..उनके काम..उनकी पहचान से जानते हैं। मगर क्या वे सब के सब हमारे जीवन में इतना अधिक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं कि उन सभी का किसी कहानी या उपन्यास में असरदार तरीके से जिक्र या समावेश किया जा सके? मेरे ख्याल...
Kajal Kumar
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निवेदिता श्रीवास्तव
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 आज सुबह सुबह बचपन की गलियाँ मन से चलती हुई आँखों पर पसर गयीं हैं, जैसे रातभर का सफर करती आयीं हों ... याद आ रही है नानी माँ की बनाई गुड़िया जिसको सहेजे पूरे घर में फुदकती रहती थी ... भाई को पढ़ाने आनेवाले चाचा ( तब घर आनेवाला कोई भी व्यक्ति चाचा / मामा / भ...