ब्लॉगसेतु

Nalin  Vilochan
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 पोस्ट लेवल : क्रिकेट खेल हिन्दी
rashmi prabha
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कई बार, कविता सुनाते वक्तबस होठ चलते हैंऔर-मस्तिष्क में मुहावरे'भैंस के आगे बीन बजाओभैंस खड़ी पगुराए'...................................................फिर कविता ख़त्म!कविता को छुपाकर कई बार पढ़ती हूँ,जानने की कोशिशें चलती हैं-क्या था,जो समझदारों कोभैंस बना गई!!!!!...
अनीता कुमार
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अविस्मर्णीय दो दिनकहां कहां न खाक छानीकुछ बीस पच्चीस दिन पहले हमारे मित्र (और टीचर भी कुछ हद्द तक) सत्यदेव त्रिपाठी जी का स म स आया कि 26 मार्च को "महादेवी वर्मा: एक पुर्नमूल्यांकन" विषय पर एक सेमिनार होने जा रहा है और मै चाहता हूँ कि आप उनके काव्य का मनोवैज्ञानिक...
 पोस्ट लेवल : लेख
महेश कुमार वर्मा
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आत्म-चिंतन: वह बकरा ने आपको क्या किया था?---------------मंथन : विजया दशमी और मांसाहार भोजनमांसाहार भोजन : उचित या अनुचितशाकाहारी भोजन : शंका समाधानhttp://groups.google.co.in/group/hindibhasha/browse_thread/thread/dde9e2ce361496a0
rashmi prabha
86
उम्र कोई हो,एक लड़की-१६ वर्ष की,मन के अन्दर सिमटी रहती है...पुरवा का हाथ पकड़दौड़ती है खुले बालों मेनंगे पाँव....रिमझिम बारिश मे !अबाध गति से हँसती हैकजरारी आंखो से,इधर उधर देखती है...क्या खोया? - इससे परेशकुंतला बनफूलों से श्रृंगार करती है" बेटी सज़ा-ए-आफ़ता पत्नी"...
सुनीता शानू
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आँखों ने आँखों से कह दिया सब कुछमगर जुबाँ खामोश रही...जब दिल ने दिल की सुनी आवाज़धड़कन खामोश रही...आँखो के रास्ते दिल में उतरने वाले ऎ मुसाफ़िरअब बाहर जा नही सकतेतुम्हारे प्यार की खुशबू से तृप्त उठती गिरती साँसे देख करअब पलके बंद हो गई...सुनीता शानू
 पोस्ट लेवल : कविता
girish billore
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girish billore
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rashmi prabha
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रोज़ देखा करती हूँ सामनेघर बनाने का काम...ईंट-गारे,पत्थरों की भरमार कई रोज़गार मजदूर...सपने को पूरा करने में ,अपना योगदानपूरे मनोभाव से दे रहे हैं.......'अपना घर'एक सुकून होता है,बरगद की घनी छांव-सा लगता है,नई ज़िंदगी का आरंभ लगता है!नन्हें पैरों के निशाँ,बुजुर्गों...