ब्लॉगसेतु

अशोक पाण्‍डेय
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देश में खेती का बहुत बडा रकबा असिंचित है या फिर यहां सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं है। ऎसे क्षेत्रों के किसानों के लिए जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय (जबलपुर) के वैज्ञानिकों ने गेहूं का ऎसा बीज तैयार किया है, जिसके उपयोग से बिना सिंचाई के भी 18 से 20 क्विंटल प्रत...
ललित शर्मा
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जब कारगिल का युद्ध चल रहा था उस समय मेरी बेटी साढ़े तीन साल की थी, टी.वी. पर समाचार देखती थी और मुझसे तरह- तरह के सवाल पूछती थी मै उसके हर सवाल का जवाब देने की कोशिश करता था. एक दिन उसने ऐसे सवाल किये जिसका जवाब मेरे पास नही था.आप भी सुनिएश्रुति पूछती हैपापा हाथ धो...
 पोस्ट लेवल : शिल्पकार कविता
संजीव तिवारी
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आवत देवारी ललहू हिया, जावत देवारी बड़ दूर।जा जा देवारी अपन घर, फागुन  उडावे  धूर ।।भावार्थ - दीवाली का त्‍यौहार जब आता है तब हृदय हर्षित हो जाता है, और जब दिवाली आकर चली जाती है तो उसका इंतजार बहुत कठिन होता है, साल भर उसका इंतजार करना पडता है। हे दीपावली...
शरद  कोकास
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डॉ. नामवर सिंह का जन्म 28 जुलाई 1927 को वाराणसी जिले के जीयनपुर नामक गाँव में हुआ । काशी विश्वविद्यालय से उन्होने हिन्दी में एम.ए.और पी.एच डी . की । 82 वर्ष की उम्र पूर्ण कर चुके नामवरजी विगत 65 से भी अधिक वर्षो से साहित्य के क्षेत्र में हैं । पिछले 30-35 वर्...
girish billore
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girish billore
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 पोस्ट लेवल : जबलपुर-ब्रिगेड
संगीता पुरी
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गल्‍ती करना मानव का स्‍वभाव है कभी न कभी हर किसी से गल्‍ती हो ही जाती है। यदि गल्‍ती का फल स्‍वयं को भुगतना पडे , तो कोई बात नहीं होती , पर आपकी गल्‍ती से किसी और को धन या मान की हानि हो रही हो, तो ऐसे समय नि:संकोच हमें क्षमा मांग लेना चाहिए। कुछ लोगों को अपनी गल्‍...
 पोस्ट लेवल : जीवनशैली क्षमा दान
संजय भास्कर
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हम तेरे साथ चलेंगे , तू चले या न चले , तेरा हर दर्द सहेंगे , तू कहे न कहे , तेरी परछाई बन के रहेंगे , तू माने या ना माने , हम चाहते है की , आप सदा खुश रहे दोस्त हम रहे या ना रहे संजय भास्कर
rashmi prabha
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आपने 'गोलमाल' फिल्म देखी है? उत्पल दत्त का इरीटेशन याद है? नहीं?- तो फिर देखिये ........हाँ,हाँ जिसके नायक अमोल पालेकर थे.फिल्म बहुत अच्छी है,आपका भरपूर मनोरंजन करेगी,लेकिन इस लेख के द्बारा मैं इस फिल्म को प्रमोट नहीं कर रही हूँ, बल्कि उत्पल दत्त के ऐक्शन को याद...
ललित शर्मा
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रोटी तू तोजीवन है मेरामर जाता तेरे बिना मैंतू मेरी महबूबा हैप्रियतमा हैसब कुछ रोटी तू नदिया हैआशा-निराशारोना-हँसनासूख-दुखबहा ले जाती हैअपने साथसब कुछ रोटी तू तो सागर हैगाली,झूठथप्पड़माँ का दुःखसमा लेती अपने अन्दरसबकुछ रोटी तू तोगोल हैसमय का चक्रगाड़ी का पहियाकुम्...
 पोस्ट लेवल : शिल्पकार कविता