ब्लॉगसेतु

ललित शर्मा
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एक  आशा  का दीप जला गए जाते-जातेसोए  हुए  थे  लोग  जगा  गए जाते-जाते दबे  हुए  अरमानों के बीहड़  अन्धकार मेंकिरण  आशा  की  दिखा  गए जाते-जातेरहनुमा होने का भरम देते थे  लोग हमेशाउनकी  अ...
 पोस्ट लेवल : शिल्पकार कविता
संजीव तिवारी
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द्विअर्थी साखियां - नाचा में यदा-कदा द्विअर्थी साखी का प्रयोग किया जाता है। सुनने में अश्लील लगते हैं किंतु भवार्थ स्पष्ट  करने पर अश्लीलता की परिधि से बाहर आ जाते हैं। नाचा में इस तरह की साखियां पहले कही जाती थी किंतु अब इसका प्रयोग नहीं किया जाता, अश्लीलता व...
शिवम् मिश्रा
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समाजवादी पार्टी के विधायक अबू असीम आजमी के हिंदी में शपथ लेने पर महाराष्ट्र विधानसभा में सोमवार को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना [मनसे] के विधायकों ने जम कर हंगामा किया। मनसे ने सभी विधायकों से मराठी में षपथ लेने को कहा था। हंगामे के दौरान राज ठाकरे की पार्टी के एक सदस...
अविनाश वाचस्पति
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दैनिक जनसत्‍ता के आज दिनांक 9 नवम्‍बर 2009 के अंक में संपादकीय पेज पर उनके सुपुत्र संदीप जोशी को स्‍मृतिलेखा स्‍तंभ के अंतर्गत पढि़ए। साभार जनसत्‍ता
 पोस्ट लेवल : पिताजी प्रभाष जोशी
sangeeta swarup
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सांझ समय बैठी थी पुष्प वाटिका में कि यादों के झुरमुट से निकल कर आ गया था चेहरा तुम्हारा सामने आँखों में प्यास लिए।तुम्हें देख थिरक आई थी मुस्कान मेरे लबों पर ।ये देख लगे थे करने चहलकदमी ।जैसी कि तुम्हारी आदत थी ।तुम्हें देखते हुए थक जाती थी ग्रीवा मेरी इधर से उधर क...
ललित शर्मा
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ईंट के भट्ठे पर वह चितकबरे पेबंद में लिपटी ढो रही थी इंटों का बोझाखा रही थीमिटटी से सनी रोटियाँकंकरों के साग के साथ जब से ब्याही  चिमनी के धुंए सेदुनिया सिमट गई उसकीधूल से सनी वो एक्टरनी सी लगती बेलदार की घुरती निगाहेंचीर जाती चीर कोवह मजदूरों की दर्द भरी कहा...
 पोस्ट लेवल : शिल्पकार कविता
girish billore
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 पोस्ट लेवल : sanjv 'salil' navgeet hindi geet
Roshan Jaswal
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यदि करील के वृक्ष में पता नहीं लगता तो इसमें बसंत का क्या दोष ? यदि उल्लू दिन में देख नहीं पता तो इसमें सूर्य का क्या दोष ? इसी प्रकार यदि पपीहे के मुख में वर्षा कि जलधारा नहीं गिरती तो इसमें बादल का क्या दोष ? ब्रह्मा ने जन्म के समय जिसके ललाट में जो लिख दिया उसे...
 पोस्ट लेवल : शिक्षा
शिवम् मिश्रा
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चंडीगढ़ के पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन [पीजीआई] में गंभीर अवस्था में लाए गए एक मरीज को, वहां एक समारोह के सिलसिले में गए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सुरक्षा के चलते प्रवेश की अनुमति न मिलने से हुई मौत की घटना के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या वीआईपी स...
वंदना अवस्थी दुबे
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निहत्थे आदमी के हाथ में हिम्मत ही काफ़ी है,हवा का रुख बदलने के लिये चाहत ही काफ़ी है.ज़रूरत ही नहीं अहसास को अल्फ़ाज़ की कोई,समुन्दर की तरह अहसास में शिद्दत ही काफ़ी है.बडे हथियार लेकर लेकर जंग में शामिल हुए लोगों बुराई से निपटने के लिये कुदरत ही काफ़ी है.किसी दिल...
 पोस्ट लेवल : गज़ल