ब्लॉगसेतु

संगीता पुरी
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हिंदी ब्‍लॉग जगत से जुडने के बाद प्रतिवर्ष भाइयों के पास दिल्‍ली यानि नांगलोई जाना हुआ , पर इच्‍छा होने के बावजूद ब्‍लोगर भाइयों और बहनों से मिलने का कोई बहाना न मिल सका। इस बार दिल्‍ली के लिए प्रस्‍थान करने के पूर्व ही ललित शर्मा जी और अविनाश वाचस्‍पति जी के द्वार...
Sanjay Chourasia
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भारतवर्ष पूरे विश्व मैं जाना जाता है अपनी सभ्यता और संस्कृति के लिए ! वह सभ्यता और संस्कृति जो पिछले सेकड़ों वर्षों से एक परम्परा के रूप मैं हमारे देश मैं चली आ रही है ! यह बात बिलकुल सही है! जिस कारण हम सब अपने आपको भारतीय कहने पर गर्व महसूस करते है ! और आगे भी कर...
अविनाश वाचस्पति
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पिता दो होते हैं. एक पार्थिव शरीर का जनक और  दूसरा अपार्थिव शरीर का.एक पिता  होता है और दूसरा परमपिता. पिता पुत्र से कुछ पाना चाहता है. वह जानता है कि उसने जिसे जीवन दिया है, वह उसे कुछ न कुछ तो देगा ही. धन, यश या सुरक्षा. बहुत लोभी पिता पुत्र से धन चाहता...
 पोस्ट लेवल : maatri jyoti dipak pita
अविनाश वाचस्पति
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अंधेरा बहुत गहरा होतो समझनासुबह क़रीब हैलड़ना नहीं तमस सेअपनी शक्ति जाया मत करना शून्य में इंतज़ार करना सूर्य के उगने काअंधेरा ख़ुद-ब-ख़ुदभाग खड़ा होगातुम्हारे रास्ते सेदुःख जब भी आएघबराना नहीं, विचलित मत होना सुख पास ही खड़ादेख रहा होगातुम्हारी बेचैनी कोअगर निश्चिंत...
 पोस्ट लेवल : kavita
अजय  कुमार झा
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आलेख को पढने के लिए चटका कर , जो भी छवि अलग खिडकी में खुले , उसे चटका कर आप आराम से पढ सकते हैं । इस अंक में , गपशप का कोना ,एक आलसी का चिट्ठा , घुघुती बासूती, चोखेरबाली, और अखिलेस सिंह आदि का उल्लेख
 पोस्ट लेवल : ब्लोग हलचल blogging
kumarendra singh sengar
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एक रहिन ईर, एक रहिन बीर, एक रहिन राजा, एक रहिन हम,एक रहिन ईर, एक रहिन बीर, एक रहिन राजा, एक रहिन हम।ईर ने कहा चलो शिकार कर आबें,बीर ने कहा चलो शिकार कर आबें,राजा बोला चलो शिकार कर आबें,हमऊँ बोले हाँ चलो शिकार कर आबें।ईर ने मारी एक चिरैया,बीर ने मारी दो चिरैयाँ,राजा...
Abhishek Kumar
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आज  से ठीक दस साल पहले..नहीं मैं नहीं आ सकता..घर में क्या बताऊंगा, क्या बोलूँगा? परीक्षा तो बस एक दिन का ही होता है, ऊपर से वहां मेरी दीदी भी हैं..इम्पासबलप्लीज..ट्राई करो न..तुम नहीं आओगे तो सुना सुना लगेगा..बिलकुल भी अच्छा नहीं लगेगा..तुम सब चले जाओ यार..मेर...
सुमन कपूर
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    सुप्त जागृतिजागने से गर सवेरा होताइंसा का रूख कुछ और होता ;         सुप्त जागृति को मिलती लय         जीवन बन जाता संगीतमय ;      &n...
 पोस्ट लेवल : जीवन दर्शन
विजय राजबली माथुर
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६ अप्रैल से दंतेवाड़ा से प्रारंभ हुआ नक्सली आतंकवाद लगातार बढ़ता जा रहा है.नक्सली और सैन्य बल कर्मी दोनों भारत माँ की संतानें हैं और एक दुसरे के खून की प्यासी हो रही हैं.नक्सलियों को वायुसेना के प्रहार से नष्ट करने की मांग ज़ोर पकड़ रही है परन्तु नक्सलवाद के उभार के...
राजेन्द्र स्वर्णकार
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आज, बस इतना ही किदिल का पैग़ाम  दिल तक पहुंचे…दिल की … दिल से … दिल कहे……दिल समझे … दिल ही सुने……ताकि दिलों को सुकून-ओ-राहत मिले…पेश-ए-ख़िदमत है दो ग़ज़लें एक हिंदुस्तानी में , एक राजस्थानी में ख़ुदा लिखदूं तुम्हेंकहां लिखदूं, यहां लिखदूं, जहां कहदो,...