ब्लॉगसेतु

Rajeev Sharma
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बदलता समय बदलते लोग न जो बदले कष्ट रहे भोग आज जो अपने कलके सपने दिल के वो सब बनेंगे रोग सीढ़ी बनायेंगे सब चढ़ने को चढ़ते ही तुझे भुलायेंगे लोग दोष न उनका होगा प्यारे समय  संग बदले सब लोग तेरी करनी तुझे  ही  भरनी...
ललित शर्मा
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संध्या शर्मा का नमस्कार...मित्रों आज है रविवार मतलब आराम और फुर्सत का दिन, उसपर बरसात का मौसम तो बाहर आना - जाना कम ही होगा. हाँ फेस बुक पे आज खूब भीड़ होगी. ज्यादा भीड़-भाड़, शोर - शराबे से तो अच्छा है, कुछ सृजनात्मक कार्य किया जाये. देखिये ब्लॉग पोस्ट भी कम हो रह...
अमितेश कुमार
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एकल अभिनय  को लेकर चर्चा एक बार फिर गर्म है. इस संदर्भ में  वरिष्ठ रंग अध्येता महेश आनंद का यह व्याख्यान काफी उपयोगी है. जो एकल अभिनय की विशद परंपरा के साथ साथ उसके व्याकरण की बात करता है. इससे आलोचक और रंगकर्मी दोनों लाभान्वित हो सकते हैं. मेरी अकर्मण्यत...
अनूप शुक्ल
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कल की चर्चा के बाद हमको अपरोक्ष रूप से डांट पड़ी -हम बहुत मेहनत करते हैं। इसई चक्कर में हम आज फ़ुल आराम किये। वैसे कल अनूप सेठी की कविता देखे । जरा आप भी देखिये: अबे! ओ!!कवि!!! तू लिक्ख, कागज को घोंच मत, अच्छी कविता लिक्ख! इसको ब्लॉगानुवाद रविरतलामी ने इस तरह किय...
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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क्या हमारा समाज सादा जीवन उच्‍च विचार का मंत्र भूलता जा रहा है? महाराष्ट्र के एक पूर्व मुख्यमंत्री एक बड़े और चर्चित घोटाले की जांच के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित आयोग के समक्ष शनिवार को पेश हुए। आज शाम यह समाचार सभी चैनेलों पर वीडियो क्‍लिप के साथ आ रहा है। गाड़ी स...
Dr. Zakir Ali Rajnish
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नंदन, जुलाई, 2012 के अंक में प्रकाशित बाल विज्ञान कथा, लेखक: ज़ाकिर अली रजनीशबात सिर्फ जरा सी थी। लेकिन बढ़ते-बढ़ते वह ऐसी बढ़ी की, कि वह चुनौती से होती हुई मुकाबले तक आ पहुँची। इस चुनौती की गूँज इतनी जबरदस्त रही कि रहमतपुर गाँव ही नहीं आसपास के लोग भी उसका परिणाम जान...
 पोस्ट लेवल : Children Science Fiction zakir science fiction
Praveen Kumar Rajbhar
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एक जोरदार Good Morning और welcome के साथ उस दिन की ट्रेनिंग की शुरुवात हुई, हर चेहरा बहुत खुश लग रहा था जैसे सभी अपनी सारी मुश्किलें और परेशानियां रास्तें में छोड़कर आयें हो. जैसा की हर ट्रेनर करता है मैंने भी सबसे पहले पिछ्ले दिन के रिविजन(Rivision)...
 पोस्ट लेवल : Positive Thinking
अरुण कान्त शुक्ला
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खुदा से भी बड़ा शैतान बागीचे में फूलों को जब मनाही है खिलने की,तो कमबख्तों, तुमने ये पौधे रोपे क्यों हैं,राजा को एतबार होता है, अपने जिस पैदल पे, खजाने से उसी को विकलांगता वजीफा मिलता है,रोका जिसने हमारे घरों की तरफ, हवा पानी का बहना,वो कमबख्त, खुदा से भी बड़ा शैतान...
केवल राम
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हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि प्रकृति कभी किसी को दोष नहीं देती , लेकिन वह बदला भी आसानी से ले लेती है . इस दिशा में यूरोप को तो यह बात नहीं भूलनी चाहिए कि 2003 में लू की चपेट में किस प्रकार 40 हजार लोग मरे थे . यह सिर्फ यूरोप की ही स्थिति नहीं है दुनिया के तमाम द...
Chandan Kumar Gupta
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मै इक आवारा जिन्दगी ढूंढता मुझे मेरी जिन्दगी दे दोन चाहिए जायदाद, न सोहरत, न कोई उपनामन हो कोई बंधन, बस इक पल आज़ादी की मोहलत दे दोमुझे सच पढ़ाते हुए खुद सच से क्यों मुकर गएसच मत सिखाओ मुझे या फिर सच्ची दुनिया दे दोमै इक आवारा जिन्दगी ढूंढता मुझे मेरी जिन्दगी दे दो...