ब्लॉगसेतु

महेश कुमार वर्मा
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आज मिठाई का चलन खूब हो गया है, कोई विशेष समारोह हो तो वहाँ नास्ता में मिठाई , मेहमान को नास्ता कराना हो तो वहाँ मिठाई ........... इत्यादि कई प्रकार से मिठाई का उपभोग हो रहा है। ............ अधिकांश मिठाई के निर्माण में दूध का ही उपयोग किया जाता है। दूध का उपयोग मि...
 पोस्ट लेवल : कर्म धर्म विचार मंथन
महेश कुमार वर्मा
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इंसान नहीं हैवान हैं हममारते बेकसूर जीव को औरभरते अपना पेट हैं हमइंसान नहीं हैवान हैं हमइंसान नहीं हैवान हैं हममत कहो हमें सर्वाधिक बुद्धिमान व विवेकशील प्राणीयहाँ हम रोज करते हैं बेईमानीकरते हैं अत्याचारहोती है बलात्कारदेते हैं रिश्वतकोई नहीं करता है बहिष्कारएक दि...
महेश कुमार वर्मा
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आते हैं आंखों में आंसू यह जानकरकोई नहीं है मेरा मुझे पहचानकरअंधे हैं वो आँख रखकरबहरे हैं वो कान रखकरगूंगे हैं वो मुँह रखकरकोई नहीं है मेरा मुझे पहचानकरहैवानियत की हद कर दी उसनेइंसानियत की नाम नहीं हैकितने भी बड़े क्यों न होमानवता की पहचान नहीं हैकहने को तो हैं वो सज...
 पोस्ट लेवल : कर्म कविता अपराध
महेश कुमार वर्मा
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कुछ ही दिनों बाद हम भारतीय गणतंत्र के ५८ वीं वर्षगांठ मनाने वाले हैं। ५८ वर्ष पूर्व २६ जनवरी १९५० को हमारा देश भारत गणतंत्र हुआ था जिसकी वर्षगांठ हरेक वर्ष २६ जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप दिनों मनाया जाता है इस गणतंत्र दिवस के अवसर पर पूरे भारत वर्ष में हजारों-लाखो...
महेश कुमार वर्मा
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......... नव वर्ष के स्वागत में हम अनेकों प्रकार से जश्न मानते हैं तथा एक-दूसरे को नव वर्ष का बधाई देते हैं। पर क्या सिर्फ बधाई भर दे देने मात्र से हमारा कर्तव्य पूरा हो जाता है? नव वर्ष के आगमन पर हम एक-दूसरे को बधाई व शुभ-कामना दें और फिर सालों भर अपने धर्म व कर्...
 पोस्ट लेवल : धर्म अपराध
Raam Mishra
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Chapter 3: Verse 42-43 विषय: इच्छा - अजेय शत्रु Subject: Desire — The Invincible Enemy इन्द्रियाणि पराण्याहुरिन्द्रियेभ्यः परं मनः। मनसस्तु परा बुद्धिर्यो बुद्धेः परतस्तु सः॥३-४२॥ The senses are said to be superior (to the physical / gross body)...
 पोस्ट लेवल : Chapter 3 । अध्याय ३
rashmi prabha
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सन्नाटा अन्दर हावी है ,घड़ी की टिक - टिक.......दिमाग के अन्दर चल रही है ।आँखें देख रही हैं ,...साँसें चल रही हैं...खाना बनाया ,खाया...महज एक रोबोट की तरह !मोबाइल बजता है ...,उठाती भी हूँ -"हेलो ,...हाँ ,हाँ , बिलकुल ठीक हूँ ......"हँसती भी हूँ ,प्रश्न भी करती हूँ ....
Nalin  Vilochan
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सुनीता शानू
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दोस्तों मेरी यह कविता १३ तारीख को रेडियो द्वारा राष्ट्रीय प्रसारण दिल्ली केंद्र से प्रसारित होगी...रेडियो या अखबार जिसे शायद आज सब भूल गये हैं मगर हर खासोआम के दिल तक पँहुचता है आज भी रेडियो और अखबार...:) ... कृपया आज ही खरीद कर लाईये एक छोटा सा रेडियो और सुनिये आप...
 पोस्ट लेवल : कुछ दर्द एसे भी...
अनीता कुमार
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7/1/08    11.55 p.m.     अभी अभी ज्ञानद्त्त जी की हॉस्पिटल से लिखी पोस्ट पढ़ी। पोस्ट पढ़ते पढ़ते बरबस कुछ पुरानी यादें चली आईं। मई महीने की शनिवार की शाम बड़ी अलसायी सी शाम थी।उस दिन बुखार के चलते कॉलेज से आते ही सोफ़े पर ही पस्त हो गये थे।...