ब्लॉगसेतु

पम्मी सिंह
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 इक साज हमारा है इक साज तुम्हारा हैलफ्जों संग वो साहब- नाज़ तुम्हारा है,इल्जाम लगाकर यूँ जख्मों को सजाए क्यूँचलों धूप हमारी है, सरताज तुम्हारा है,अब कौन यहाँ जज़्बातों की फ़िक्र करता हैहर बार कसम दे अपनी, मि'जाज तुम्हारा है,रस्मों में  यूँ रुस्वा न करों म...
राजीव तनेजा
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कहते हैं कि हर तरह की शराब में अलग अलग नशा होता है। किसी को पीते ही एकदम तेज़ नशा सोडे की माफ़िक फटाक से सर चढ़ता है जो उतनी ही तेज़ी से उतर भी जाता है। तो किसी को पीने के बाद इनसान धीरे धीरे सुरूर में आता है और देर तक याने के लंबे समय तक उसी में खोया रहता है। कुछ इसी...
निवेदिता श्रीवास्तव
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 सब पूछते रहतेसुनो न !तुम क्या करती हो ?अनसुना करने की एक नामालूम सी कोशिशऔर जवाब मेंसिर मेरा झुक जातानहीं ... कुछ नहीं करती !एक दिन लड़खड़ा गया पाँवदिन में दिखते चाँद तारेबिस्तर में पड़ा शरीरसाथ ही चन्द जुमलेसुनो ! मत उठना तुम वैसे भी क्या करना ही होगास्विगी करत...
BAL SAJAG
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 सर्दी  सर्दी ने कर दिया परेशान | खास -खासकर शरीर हो गया बेजान ,रात की नीद नहीं आती है | दिन में नाक बहुत सताती है ,दवा भी हो गया बे असर |ठीक करने की नहीं छोड़ी में कोई कसर ,खाने में न लगता है मन  |  पुरे शरीर हो गया है भांग ,सर्दी...
Arshia Ali Ali
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You’ve planned and hosted the perfect virtual concert, online conference, and other types of virtual events, now what? While one of the key benefits of virtual events over their offline counterparts is how they allow businesses to reach a global audience without be...
 पोस्ट लेवल : business
समीर लाल
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  दफ्तर से घर लौट रहा हूँ. स्टेशन पर ट्रेन से उतरता हूँ. गाड़ी करीब ५ मिनट की पैदल दूरी पर खुले आसमान के नीचे पार्क की हुई है. थोड़ी दूर पार्क करके इस ५ मिनट के पैदल चलने से एक मानसिक संतोष मिलता है कि ऐसे तो पैदल चलना नहीं हो पाता, दिन भर भी तो दफ्तर में अपनी स...
भावना  तिवारी
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  ----2-अक्टूबर- गाँधी जयन्ती----अँधियारों में सूरज एक खिलानेवालाजन गण के तन-मन में ज्योति जगानेवालागाँधी वह जो क्षमा दया करूणा की मूरतफूलों से चटटानों को चटकाने वालाक़लम कहाँ तक लिख पाए गाँधी की बातेंइधर अकेला दीप, उधर थी काली रातेंतोड़ दिया जंजीरों को जो यष्...
mahendra verma
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                              जंगल तरसे पेड़ को, नदिया तरसे नीर,सूरज सहमा देख कर, धरती की यह पीर ।मृत-सी है संवेदना, निर्ममता है शेष,मानव ही करता रहा, मानवता से द्वेष ।अर्थपिपासा ने किय...
MediaLink Ravinder
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 Thursday: 30th September 2021 at 5:40 PM"उलटी गिनती" पुस्तक में हैं बहुत से सबंधित सवालों का जवाब नई दिल्ली: 30 सितंबर 2021: (हिंदी स्क्रीन डेस्क)::MRP 250/- (Paperback)अच्छे दिनों का वायदा, फिर उस वायदे को चुनावी जुमला बताया जाना, सा...
 पोस्ट लेवल : Ulti Ginti Hindi Literature Rajkamal Prakashan Group Books
निवेदिता श्रीवास्तव
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 उमगती है आँधी ,उजड़ता है उपवनजब रिसती हैं आँखें, बरसता है मन !डगर रीत की , याद मीत कीटेसू उजाड़ गये ,हार जीत की बंसरी मूक हुई ,साँवरे छुप गएसिसकती है राधा ,सोच प्रीत की !कसकती हैं यादें ,छलकता है जतनजब रिसती हैं आँखें, बरसता है मन !माटी है मिलती ,माटी है ग...