ब्लॉगसेतु

Ravindra Prabhat
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राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. नामवर सिंह ने कहा कि आज तक प्रगतिशील लेखकों के अन्य संगठनों के साथ हम साझा मोर्चा नहीं बना पाये।  प्रगतिशील लेखक संघ का हीरक जयंती समारोह संपन्न लखनऊ । प्रगतिशील लेखक संघ (पर्लेस) के हीरक जयंती समारोह का आयोजन राजधानी में दो दिनों त...
 पोस्ट लेवल : रपट
वंदना अवस्थी दुबे
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 पोस्ट लेवल : श्रद्धान्जलि
राजेश त्रिपाठी
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वे संसद की गरिमा पर चोट करने लगे हैं-राजेश त्रिपाठीजब अन्ना ने भ्रष्टाचार और घूसतंत्र के खिलाफ अहिंसक जन-प्रतिरोध का धर्मयुद्ध छेड़ा था, सारा देश तन-मन-धन से उनके साथ जुट गया था। उनमें लोगों को दूसरा गांधी नजर आने लगा था। वैसे यह सच है कि कोई कितना भी बड़ा हो जाये,...
वंदना अवस्थी दुबे
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आज जगजीत सिंह चले गये................कितना अजीब लगता है ये सोचना भी कि अब उनकी कोई नयी ग़ज़ल हमें सुनाई नहीं देगी. वो आवाज़ जो लाखों-करोड़ों दिलों पर राज कर रही थी, अब खामोश हो गयी है.अचानक ब्रेन हेमरेज़ होने और ऑपरेशन होने के बाद उनसे सम्बन्धित कोई खबर किसी भी न्य...
Piush Trivedi
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ब्लॉग पर Multi Tab Widjet लगाये. विडजेट की खासियत यह की ब्लॉग के Sidebar में अधिक सामग्री को एक ही विडजेट के स्थान पर रखा जा सकता है. और दूसरा यह की विडजेट को templete में सहेजने के बाद यह ब्लॉग के sidebar में sidebar gadjet के रूप में आ जाता है, जिसमे अपने...
 पोस्ट लेवल : blogger ट्रिक्स
अपर्णा त्रिपाठी
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दो घडी गुजारी थी मोहब्बत में कभी , बैचैन हुआ था ये दिल भी कभी,  अह्सासों के आगोश में हम भी खोये थे कभी, जिन्दगी खूबसूरत सी लगी थी कभी, वक्त को थमते देखा था कभी, जमीं आसमां मे मिलते नजर आयी थी कभी, तपती धूप भी भली लगी थी कभी, इन होठों पे मुस्कान खिली थी क...
Indu Puri  Goswami
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           अपने दिल की आवाज सुनी और उसका कहा माना.दिल तो बच्चा है जी और 'ये' वाला तो कुछ ज्यादा ही. बड़ा मजा आता है मुझे शरारत करने में, किसी को सरप्राइज़ देने में.किसी का दिल दुखे ऐसी शरारत करने का तो मैं सोच...
Neeraj Goswamy
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( ये ग़ज़ल आपा "मरयम गज़ाला" जी को समर्पित है जो अब हमारे बीच नहीं हैं )समझेगा दीवाना क्याबस्ती क्या वीराना क्याज़ब्त करो तो बात बनेहर पल ही छलकाना क्याहार गए तो हार गएइस में यूँ झल्लाना क्यादुश्मन को पहचानोगे ?अपनों को पहचाना क्यादुःख से सुख में लज्ज़त हैबिन दुःख...
Rajeev Sharma
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तुमेह खो कर हमने है पाया था खोयामिले तुम थे जबसे, जगा था पर सोयावो नयनो में मोती कम होई थी ज्योति तारों से था पूछा क्यूँ आँख नम  होतीहम जुदा थे हमीसे, हम हमे ढूँढ़ते थे यूँ मिलते थे सबसे, ज्यूँ सबमे तुम्ही थे अचानक ये कैसा झोंका. तूफान का आया&nb...
 पोस्ट लेवल : जगा था ग़ज़ल
संगीता पुरी
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10 , 11 और 12 अक्तूबर को मेष लग्नवालों की धन की स्थिति कमजोर दिखाई देगी, इसे मजबूत बनाने का हर प्रयास बेकार होगा। भाई-बहन, बंधु बांधवों से विचार के तालमेल का अभाव बनेगा, सहकर्मियों से भी संबंध में गडबडी आएगी। किसी कार्यक्रम में माता पक्ष को लेकर सुखद अहसास बनेगा, व...