ब्लॉगसेतु

वंदना अवस्थी दुबे
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कोई मुम्बई जाये और हाज़ी अली की दर्गाह पर ना जाये ऐसा हो सकता है क्या? हम भी पूरे भक्ति भाव से दरगाह पर गये। समुन्दर के बीच स्थित यह दरगाह सिद्ध दरगाहों में से एक मानी जाती है। समुन्दर के पानी को काट कर बनाया गया यह पवित्र स्थल लोगों ने इतना अपवित्र कर रखा है, कि दर...
संजीव तिवारी
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छत्‍तीसगढी लोक नाट्य विधा तारे नारे के संरक्षक छत्‍तीसगढ के ठेठ जडों से भव्‍य नागरी रंगमंचों तक सफर तय करने वाले रंगमंच के ऋषि हबीब तनवीर को कौन नहीं जानता उन्‍होंनें न केवल छत्‍तीसढी संस्‍कृति और लोक शैलियों को आधुनिक नाटकों के रूप में संपूर्ण विश्‍व में फैलाया वर...
prakash govind
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क्या टी वी...क्या अखबार...क्या मैगजीन...सब जगह तंत्र-मंत्र , ज्योतिष , टैरो-कार्ड, फेंग-सुई-वास्तु का जाल फैला नजर आता है ! देश की आजादी के पश्चात संपन्न वर्ग के ज्यादातर लोग कभी इतने अन्धविश्वासी नहीं रहे जितने कि आज हैं ! आज समाज का शिक्षित और सुविधाभोगी...
 पोस्ट लेवल : Article / लेख
घुघूती  बासूती
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Being a woman is not easy. Being a working woman appears to be tough. Being a working woman who is in the public eye appears to be tougher. Rachida Dati, the French minister of justice is a brand new mother. There is nothing unusual about it. She is 43. That too is...
 पोस्ट लेवल : Women Rachida Dati
sangeeta swarup
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वक्त की सलाइयों पर सोचों के फंदे डालज़िन्दगी को बुन दिया है इसी उम्मीद पर कि शायद ज़िन्दगी मुकम्मल हो सके जैसे कि एक स्वेटर मुकम्मल हो जाता है सलाइयों पर ऊन के फंदे बुनते हुए । परन्तु-ज़िन्दगी कोई स्वेटर तो नहीजो फंदे दर...
अविनाश वाचस्पति
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तेजेन्‍द्र शर्मा का कहानी पाठमिल रहे हैं आपसुनेंगे हम उन्‍हेंआप हमें।दर्ज कर लेंअपनी उपस्थिति यहीं परन मालूम वहां पंजिकाआप तक पहुंच पायेया नहीं, या आप नपहुंच पायें रजिस्‍टर तक।आप वहां तक तो पहुंचेंगे, पूरा विश्‍वास हैयहां रजिस्‍टर के रूप मेंटिप्‍पणी बॉक्‍स हैयहीं प...
seema sachdeva
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संजीवनी के प्रथम खण्ड ब्रजबाला भाग ५ मे श्री राधा-कृष्ण संवाद और अमर प्रेम का वर्णन हैराधा-कृष्ण संवादसुनी देवो की जो करुण पुकारहुई कृष्ण की दृष्टि भी अपारजब देखी उग्र रूप राधाकान्हा ने यह निर्णय साधाकिसी तरह राधा को मनाऊँ मैंअपना स्वरूप बताऊँ मैंकान्हा ने मन में व...
seema sachdeva
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भाग 4.राम-लक्षमण सम्वादजय गणपति जय सूर्यदेवजय विशणु ब्र्ह्मा औ महेषकर रहे पूजा आज उर्मि-लखनखुश था महल का हर एक जनआज होगा राम का रज्याभिषेकवर्षो से देखा था सपना एकमाता-पिता का अरमान थाजब उनका आँगन वीरान थासोचते थे उनका भी होगा सुतसूर्यवन्श का सूर्य देखेगा अवधआज वो द...
अविनाश वाचस्पति
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सत्‍यम सिर्फ शेयर ही नहींसाफ्टवेयर कंपनी भी नहींकंप्‍यूटर कंपनी तो कतई नहींवो एक विश्‍वास थीएक आस्‍था थीसच की पराकाष्‍ठा थीउसी पराकाष्‍ठा के चलतेशर्मसार हो गईलाचार हो गईबेकार हो गईप्राण फूंकने के लिए सच मेंसरकार को आना पड़ाबेकार सरकार क्‍या करेकितना करेपहले अपने खा...
संजीव तिवारी
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संपादक महावीर अग्रवाल से संजीव तिवारी की बातचीतहिन्दी की साहित्तिक लघु पत्रिकाओं में शीर्षस्थ ‘पहल’ के साथ-साथ साहित्यकारों एवं पाठकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता सिद्ध करते हुए ‘सापेक्ष’ नें एक लम्बी‍ यात्रा तय की है, जिसमें अनेक लब्धतप्रतिष्ठित साहित्यकारो पर केन...