ब्लॉगसेतु

संजय भास्कर
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 इश्क क्या होता  है ,समझते है हम चोट  खाने के बाद ,वो हंस कर सितम करती रही हम हंस कर सितम सहते रहे मेरी आँखों में झलकती है मेरी कहानी जो छुपाये नहीं छुपती |मौत आये तो गले लगा ले हम जी कर क्या करे इश्क में चोट खाने के बाद दर्द...
 पोस्ट लेवल : Kavita
Vivek Rastogi
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पिछली पोस्ट को ही आगे बढ़ाता हूँ, एक सवाल था “कंडक्टर को मुंबईया लोग क्या कहते हैं।” तो जबाब है - “मास्टर” । अगर कभी टिकट लेना हो तो कहिये “मास्टर फ़लाने जगह का टिकट दीजिये”, बदले में मास्टर अपनी टिकट की पेटी में से टिकट निकालेगा, पंच करेगा और बचे हुए पैसे वापिस देग...
Ashok kumar
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ऐ-चाँद बता तू ,   तेरा हाल क्या हैँ ?     किस जुस्तजू मेँ ,       तू फँसा हुआ ?         क्यूँ छाया हुआ           घनघोर अँधेरा ।   ...
 पोस्ट लेवल : चाँद का हाल Kavita
Chaitanyaa Sharma
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अभी कुछ दिन पहले ही गणेश चतुर्थी मनाई गयी | आप जानते है यह गणपति बप्पा का जन्मदिन है | गणेशजी की माँ  पार्वती  और  पिता भगवान शंकर हैं | इसे बहुत धूमधाम से मनाया जाता है | राजस्थान में भी गणेश चतुर्थी बहुत अच्छे से मानते हैं |...
Rajeev Sharma
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गया दूर, सपने अधूरे, एक याद बाकी रह गईसारी आशाएँ, मन की इच्छाएँ, मन मे रह गईदो तनो को जोड़ने का, अनोखा बंधन होते तुमतरसते कान, बरसती आँखें, ये बिछोड सह गईहर कोई पूछता है तुम आकर भी क्यूँ  ना दिखेहम चुप रहे पर आँखे बिन बोले ही सब  ...
 पोस्ट लेवल : रचना
prakash govind
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 पोस्ट लेवल : C.M.Picture Quiz
Rajeev Sharma
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पुस्तकें नयी आतीं थींजो बड़ा होता उसे दी जाती थी   ना फटे कटे ना धागे छटेशर्तें साथ लगाई जाती थीपुस्तक को माता समझ हम बार बार सिर से लगाते चाहें कसम तुम कोई खिलाओ पर विद्या माँ की कसम ना खातेएक  आती सारे पढ़ जाते&nb...
 पोस्ट लेवल : रचना
निर्मला कपिला
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दहेज--{ दो चेहरे --  -2}-- लघु कथादो चेहरों वाले व्यक्तित्व पर कुछ सवाल उठे थे।मगर समाज मे ऐसे चेहरे हर जगह देखे जा सकते हैं उसी संदर्भ मे कुछ लघु कथायें लिखनए जा रही हूँ। नाम तो दो चेहरे ही रहेगा मगर कडी का नम्बर साथ दूँगी। आज जोशी जी अपने लडके के लिये ल...
 पोस्ट लेवल : लघु कथा
अजय  कुमार झा
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पहले ही सोच लिया था कि अबकि बार यदि पंजाब जाना हुआ ......तो उस यात्रा को इन भविष्य के पन्नों पर जरूर अंकित कर दूंगा .........ताकि आज से पचास साल बाद .......जब फ़िर किसी ऐसी ही यात्रा पर निकलूंगा .....और एक ऐसी ही पोस्ट लिख रहा होंउगा ....तो खुद ही दोनों पोस्टों को प...
Devendra Gehlod
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हम उनसे अगर मिल बैठते है, क्या दोष हमारा होता है,कुछ अपनी जसारत होती है, कुछ उनका इशारा होता है !काटने लगी राते आँखों में, देख नहीं पलकों पर अक्सर,याँ शामे-गरीबां का जुगनू या सुबह का तारा होता है !हम दिल को लिए हर देश फिरे इस जींस के ग्राहक मिल न सके ऐ बंजारे...
 पोस्ट लेवल : ibne-insha