ब्लॉगसेतु

महेश कुमार वर्मा
348
दिल वो चीज है जो टूट गया तो जुड़ना मुश्किल हैदिल वो चीज है जिसका जख्म भर पाना मुश्किल हैभर जाएंगे शरीर के जख्म दिन नहीं तो महीनों में जरुरपर नहीं भरेंगे दिल का जख्म यह बात है जरुरतड़पते रह जाओगे दिल का जख्म लेकरपर नहीं आएँगे कोई तुम्हें अपना समझकरजमाना हो गया है बेद...
 पोस्ट लेवल : जख्म दिल कविता
संगीता पुरी
717
भविष्य की सटीक जानकारी के लिए एकमात्र विधा फलित ज्योतिष निस्संदेह फलित ज्योतिष वैदिक कालीन सबसे पुरानी विधा है। जिस समय कल्प , व्याकरण , छन्द , निरुक्त आदि महज कुछ ही विधा थी , फलित ज्योतिष को वेदों का नेत्र कहा जाता था। आज सभी विश्वविद्यालयों में हजारों विषयों का...
ganga dhar sharma hindustan
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after some time you will read here my poems.HINDI POETRY BY GANGA DHAR SHARMA "HINDUSTAN"
 पोस्ट लेवल : POEM
sangeeta swarup
195
इधर और उधर के बीचबंद दरवाजा है /दरवाज़े पर /हर क्षणहल्की - हल्की /थपथपाहट का एहसास /इधर ज़िन्दगी की साँसेहल्की या बोझिल ।बंद दरवाज़े के इधरतुम हर पल अपना लोहर क्षण /अपना बना लो ।न जाने कब /हवा के झोंके सेयह दरवाजा खुल जाए ।और उधर अनंत में ,देखते हुए हम /केवल किवाड...
sangeeta swarup
195
ज़िन्दगी ,धुआं बनती जा रही हैकब तक तुम उसेमुट्ठी में बांधने का प्रयास करोगे ?बंधी मुट्ठी में तुम्हे लगेगा कि शायद ज़िन्दगी बाकी हैजब भी खोलोगे मुट्ठी तो मात्र एक जलन का एहसास लिएखाली हाथ देखते रह जाओगे।
महेश कुमार वर्मा
348
बहुत ही नाजुक होती है ये रिश्तेनिभा सको तो साथ देगी जीवन भर ये रिश्तेनहीं तो सिर्फ कहलाने को रह जाएँगे ये रिश्तेबनते हैं पल भर में, बिगड़ते हैं पल भर में ये रिश्तेबहुत ही नाजुक होती है ये रिश्तेबहुत ही नाजुक होती है ये रिश्ते
 पोस्ट लेवल : रिश्ता कविता
संगीता पुरी
717
विकसित विज्ञान नहीं , विकासशील विद्या या शास्त्र हैफलित ज्योतिष अभी विकसित विज्ञान नहीं , विकासशील विद्या या शास्त्र है , किन्तु इसके विकास की पर्याप्त संभावनाएं विद्यमान हैं । इसे अनििश्चत से नििश्चत की ओर आसानी से ले जाया जा सकता है। इस शास्त्र को विज्ञान में रुप...
मुन्ना के पाण्डेय
375
कुछ समय पहले दूरदर्शन के राष्ट्रीय समाचार के प्रसारण के एन पहले नेताजी सुभाषचंद्र बोस का कथन हिन्दी के सन्दर्भ में दिखाया जाता था-"देश के सबसे बड़े भूभाग में बोली जाने वाली हिन्दी ही राष्ट्र-भाषा की उत्तराधिकारी है। "-मैं नही जानता के अब भी ये दिखाया जाता है या नही...
सुनीता शानू
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-हर रोज--दिन निकलने के साथ--मेरे पास होते हैं कई सवाल--तुम्हारे लिये--खोज-खोज कर--सहेज लेती हूँ उन्हे--कि तुम्हारे कुछ कहने से पहले ही--पूछूंगी तुमसे--उन सवालों के जवाब--परंतु मेरे कुछ कहने से पहले ही--तुम समझ जाते हो--मेरी हर बात--और बिन कहे ही--रख देते हो जवाबों...
 पोस्ट लेवल : कविता
सुनीता शानू
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हिंदी मीडिया पर प्रकाशितबिग बॉस बड़ा अच्छा शो है, एक साथ इतने सारे अजनबी लोगो का साथ-साथ परिवार की तरह रहना, वाह मज़ा आ गया! श्रीमान जी चहक कर बोलेअजनबी!! सबको तो जानते हो, नया कौन है भला ? ये अहसान कुरैशी कितनी बार कविता सुना-सुना कर हँसाता रहा है सबको। और रेवती बहन...
 पोस्ट लेवल : व्यंग्य लेख