ब्लॉगसेतु

अनीता कुमार
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और वो लटक लिए=============पता नहीं क्या बात है पर अचानक आत्महत्या की कई खबरें, चर्चाएं सुन रहे हैं। अनूप जी ने कहा, उनसे प्रेरित हो कर अकुंर जी बोले, दोनों को आई आई टी में हुई छात्रों की आत्महत्या ने द्रवित किया। पिछले ही हफ़्ते अपनी ही बिल्डिंग में एक नौकरानी के आ...
 पोस्ट लेवल : लेख
मुन्ना के पाण्डेय
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हॉस्टल की निराली दुनिया में कभी कभी ऐसा भी दिन आता है जब हम सभी को फेअरवेल यानि विदाई दी जाती है .मगर दिल्ली यूनिवर्सिटी के ग्वायेर हॉल में न तो फ्रेशेर्स वेलकॉम मिला न ही फेअरवेल .तिस पर ये की अथॉरिटी ने बढ़ते मेस खर्च और जमा न कर पाने की असमर्थता लिए कुछ स्टूडेंट...
सतीश सक्सेना
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डी पी एस ग्रेटर नॉएडा के, एक क्षात्र, रानू , जो कि, पढने लिखने में बहुत अच्छे होने के साथ साथ, खाने पीने में, भी मस्त हैं, के मन की बातें यहाँ दे रहा हूँ ! जब भी हम सब साथ साथ , खाने पर एक साथ बैठते तो बच्चों से उनके भविष्य की चर्चा तथा क्लास में उनकी पोजीशन की चर्...
rashmi prabha
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मैं ओस की एक बूंद,अचानक बही एक शीतल हवा,बांसुरी की एक मीठी तान,घनघोर अंधेरे में जुगनू,रेगिस्तान में दो बूंद पानी......मुझे भूल जाना आसान नही है!!!
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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आज मुझे एक ९६ साल के जवान से मिलने का मौका मिला। जी हाँ, जवान से- क्योंकि उनकी आवाज़, और अन्दाज़ में कहीं से भी बुढ़ापे की झलक नहीं मिली। और आँखें तो अभी भी ६/६ का नम्बर बताती हैं।अपनी बैंक पासबुक की प्रविष्टियाँ देखते हुए मेरे ऑफिस में स्वयं चल कर आने वाले पेन्शनभोग...
हर्षवर्धन त्रिपाठी
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अब से कुछ देर पहले सीपीआई नेता एबी बर्धन ने कहा है कि अगर कांग्रेस मनमोहन सिंह अगले प्रधानमंत्री के तौर पर न पेश करे। यानी किसी और को प्रधानमंत्री पद की कुर्सी दे तो, वो लोकसभा चुनावों के बाद फिर से कांग्रेस के साथ गठजोड़ बना सकती है। दरअसल लेफ्ट ने बर्धन का ये बया...
 पोस्ट लेवल : sonia loksabha election upa madam left party
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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ऑफिस में आज काम कुछ ज्यादा था। महीने की शुरुआत में वेतन और पेंशन का काम बढ़ ही जाता है। …शाम को करीब सात बजे घर पहुँचा। …शारीरिक थकान के बावज़ूद मन में यह जानने की उत्सुकता अधिक थी कि सुबह-सुबह ब्लॉगवाणी में आयी जिन पोस्टों पर धुँवाधार टिप्पणी कर आया था, उसपर अन्य चि...
rashmi prabha
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ये सच है,मैं पैसे नहीं जमा कर पायी!ये भी सच है,मैं रिश्तों की पोटली नहीं बाँध सकी!मेरी बेटी ने पूछा एक दिन-"क्या मिला तुम्हे?"मैंने सहज ढंग से कहा,"वही-जो कर्ण को मिला....उसने पूछा - हार?मैंने कहा -नहीं,वही, जो पार्थ की जीत के बाद भीकर्ण को ही मिला.......तुम सब ख़ु...
अजय  कुमार झा
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आज का सामाजिक परिवेश, आसपास का माहौल, घटते हादसे, और बढ़ते अपराध ने स्थिति ऐसी कर दी है की किसी न किसी वजह से सबको अदालत के दरवाजे तक पहुंचना ही पड़ता है। कोई किसी की अदावत के कारण ख़ुद पहुंचता है तो कोई मजबूरी में सामने वाले का जवाब देने पहुंचता है। कोई किसी की तर...
अनीता कुमार
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नकुल कृष्णा - भाग ५====================आप लोगों की बात मानते हुए, इस कहानी को थोड़ा और आगे ले जा रहा हूँ। छह में से चार सिफ़ारिश के पत्रों को यहाँ पेश करना चाह रहा था। इनमे से तीन कॉलेज के वरिष्ठ शिक्षक के लिखे हुए थे और चौथा उसके नाटक का दिग्दर्शक का लिखा हुआ था। दो...