ब्लॉगसेतु

Roli Dixit
0
 जब कभी गुज़रोगी मेरी गली सेतो मेरी पीड़ा तुम्हें किसी टूटे प्रेमी कासंक्षिप्त एकालाप लगेगीपूरी पीड़ा को शब्द देना कहाँ सम्भव?मैंने तो बस इंसान होने की तमीज़ को जिया हैअपनी कविताओं के ज़रिए...मन के गहन दुःख को जो व्यक्त कर सकेंवो सृजन करने का मुझमें साहस कहाँ?डूबते...
 पोस्ट लेवल : दुःख कविता
web jaankaari
0
Happy Marriage Anniversary Wishes : One of the most memorable days of one's life is their wedding anniversary. It is a day to commemorate the heavenly bond formed by marriage between a husband and wife. If you know a couple who is about to celebrate their happy w...
अनीता सैनी
0
आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत है विश्व बैंक की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार विश्व के 180 देशों में ( 190 में से ) महिलाओं को पुरुषों के बराबर दर्जा प्राप्त नहीं है। जिन दस देशों में पुरुष-स्त्री को समानता का दर्जा हासिल है, वे हैं - बेल्जियम, फ़्रांस, डेनमार्...
Roli Dixit
0
 मेरी कविताएँछोटी-छोटी चिट्ठियाँ हैंकभी सुबह के नामकभी अँधेरों के नामकभी दर्द-ख़ुशी के नाम...और सभी ईश्वर के नामतुम इनमें से चुन लेनामेरी प्रार्थना का समवेत स्वरजो बस तुम्हारे लिए है.
शिवम् मिश्रा
0
जमशेदजी टाटा (३ मार्च, १८३९ - १९ मई, १९०४) ) भारत के महान उद्योगपति तथा विश्वप्रसिद्ध औद्योगिक घराने टाटा समूह के संस्थापक थे। आरम्भिक जीवन उनका जन्म सन १८३९ में गुजरात के एक छोटे से कस्बे नवसेरी में हुआ थाउनके पिता जी का नाम नुसीरवानजी था व उनकी माता...
अनीता सैनी
0
 सुप्रभात मित्रों।देखिए बुधवार की चर्चा में मेरी पसन्द के कुछ लिंक..--शीर्ष पंक्ति अभिलाषा चौहान जी के ब्लॉगमन के मोती  से.."चाँदनी भी है सिसकती "--गीत  "तितली है फूलों से मिलती" बौरायें हैं सारे तरुवर, पहन सुमन के हार।मोह रहा है ...
Lokendra Singh
0
यूट्यूब चैनल 'अपना वीडियो पार्क' पर देखेंक्या किया पिता ने तुम्हारे लिए?तुमने साहस कहां से बटोराप्रश्न यह पूछने का।बचपन की छोड़ोतब की तुम्हें सुध न होगीजवानी तो याद है नतो फिर याद करो...पिता दफ्तर जाते थे साइकिल सेतुम्हें दिलाई थी नई मोपेडजाने के लिए कॉलेज।ऊंची पढ़...
jaikrishnarai tushar
0
 विशेष -प्रोफ़ेसर सदानन्दप्रसाद गुप्त कार्यकारी अध्यक्ष उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान आप सभी को प्रणाम करते हुए एक ग़ज़ल पोस्ट कर रहा हूँ |इस ग़ज़ल कुछ नामों की प्रशंसा भी है इसका स्पष्टीकरण भी दे रहा हूँ |जीवन के किसी मोड पर कुछ गुरू ,शुभचिंतक मिल जात...
jaikrishnarai tushar
0
 चित्र -साभार गूगल  एक ग़ज़ल-उड़ भी सकता हूँ मैं ,पानी पे भी चल सकता हूँसिद्ध हूँ ख़्वाब हक़ीकत में बदल सकता हूँकुछ भी मेरा हैं कहाँ, घर नहीं, असबाब नहींजब भी वो कह दे मैं घर छोड़ के चल सकता हूँपानियों पर, मुझे मन्दिर में, या घर में रख दोमैं तो मिट्टी का दिया ह...