ब्लॉगसेतु

Bhavana Lalwani
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लड़की एक  बार फिर से उसी  झील के किनारे बैठी है।  पानी में पैर  डुबोने  और छप  छप करें , का ख्याल आया लेकिन गंदले और काई जमे किनारे ने उसे दूर से ही छिटका दिया। पानी अब बहुत दूर तक खिसक गया था , झील के किनारे वाला हिस्सा सूख गया लगता है...
Bharat Tiwari
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कहानी सुरंग अशोक गुप्ता  (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); शहर के इस महंगे नर्सिंग होम में जो मरीज़ अंतिम साँसें ले रहा है, वह मैं हूँ।कोमा में आ गया हूँ। मौत अब कितने हाथ दूर रही मुझसे..? और मौत के हाथ भी तो बहुत लम्बे हैं..। जो...
sanjiv verma salil
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नवगीतसुनो शहरियों!संजीव वर्मा 'सलिल'*सुनो शहरियों!पिघल ग्लेशियरसागर का जल उठा रहे हैंजल्दी भागो।माया नगरी नहीं टिकेगीविनाश लीला नहीं रुकेगीकोशिश पार्थ पराजित होगाश्वास गोपिका पुन: लुटेगीबुनो शहरियों !अब मत सपनेखुद से खुद ही ठगा रहे होमत अनुरागोसंबंधों के लाक्षागृह...
 पोस्ट लेवल : नवगीत
sanjiv verma salil
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  दृढ संकल्प, विश्वास और शिक्षा की पर्याय 'बरनाली'- डाॅ.छाया त्रिवेदी [बरनाली, उपन्यास, प्रथम संस्करण, २० से.मी. x १४ से.मी., आवरण बहुरंगी पेपरबैक, पृष्ठ १०८, मूल्य १००/-, निर्देशिका- डाॅ. राजलक्ष्मी शिवहरे, साहित्य संगम इंदौर]*   उपन्यास 'बरन...
Anand Dwivedi
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'टुकड़े-टुकड़े' नारों वालों, मॉबलिचिंग के पैरोकारोंमुझको दोनों के नारों से डर लगता डर लगता हैजिसको मौका मिला उसी ने जमकर अपना नाम कमाया झूठै ओढ़ा झूठ बिछाया, झूठै खर्चा झूठ बचाया अब ऐसे ठेकेदारों से डर लगता है डर लगता हैमुझको तेरा भय दिखलाकर तुमको मेरा भय दिखलायाथी जो...
 पोस्ट लेवल : गीत- अगीत
sanjiv verma salil
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नवगीत:संजीव.शिव के मन मांहिबसी गौरा.भाँग भवानी कूट-छान केमिला दूध में हँस घोलाशिव के मन मांहिबसी गौरा.पेड़ा गटकें, सुना कबीराचिलम-धतूरा धर झोलाशिव के मन मांहिबसी गौरा.भसम-गुलाल मलन को मचलेंडगमग डगमग दिल डोलाशिव के मन मांहिबसी गौरा.आग लगाये टेसू मन मेंझुलस रहे चुप बम...
 पोस्ट लेवल : गौरा नवगीत शिव
sanjiv verma salil
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व्यंग्य चित्रhttp://divyanarmada.blogspot.in/
 पोस्ट लेवल : व्यंग्य चित्र
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : कविता
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : आलेख
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : समीक्षा