ब्लॉगसेतु

Vidyut Maurya
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नीर झरना से लौटकर तपोवन पहुंचने के बाद लक्ष्मण झूला की तरफ चल पड़ा। वैसे तो यहां कई बार आ चुका हूं। पर हर बार यहां आना सुखकर और कुछ नया लगता है। लक्ष्मण झूला के इस पार प्रकाशानंद का मंदिर और धर्मशाला है। झूला के इस पार लक्ष्मण जी की विशाल प्रतिमा भी है। य...
 पोस्ट लेवल : UTTRAKHAND
Saransh Sagar
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महात्मा बुद्ध एक जंगल से गुजर रह थे। उनको एक व्यक्ति दिखा जो लगातार कईं वर्षों से एक पेड़ पर खड़ा होकर तपस्या कर रहा था। तप के कारण उसका शरीर कड़ा हो गया था। त्वचा की संवेदना नष्ट हो गई थी बुद्ध ने पूछा… आप किस कारण अपने शरीर को ऐसा कष्ट दे रहे है तपस्वी ने कहा… मैंन...
Saransh Sagar
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एक बार एक आदमी को अपने garden में टहलते हुए किसी टहनी से लटकता हुआ एक तितली का कोकून दिखाई पड़ा. अब हर रोज़ वो आदमी उसे देखने लगा , और एक दिन उसने महसूस किया कि उस कोकून में एक छोटा सा छेद बन गया है. उस दिन वो वहीँ बैठ गया और घंटो उसे देखता रहा. उसने देखा की तितली...
Saransh Sagar
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चन्दन वन का राजा शेर बहुत वृद्ध हो गया। इसी वजह से उसने शिकार के लिए बाहर निकलना भी बंद कर दिया। वह अब और अधिक वन पर शासन नहीं कर सकता था और इसी वजह से वन में बहुत अशांति पैदा हो गयी।शेर ने एक दिन सभी जानवरों को बुलाकर कहा कि तुम जाकर सभी जानवरों में से एक को राजा...
Saransh Sagar
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एक शीश महल था उसमें खूब सारे शीशे लगे थे। एक इंसान की एक साथ सैकड़ो छवि बनती थी। किसी दिन एक क्रोधित कुत्ता गलती से शीशमहल में घुस गया और उसे चारों ओर क्रोधित कुत्ते नजर आने लगे। कुत्ते ने अपनी आँखे क्रोध से लाल की तो उसे एक साथ सैकड़ो कुत्ते लाल आंखों से घूरते नजर आ...
vibha rani shrivastava
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"प्रतीक्षारत साँसें कितनी विकट होती है... आस पूरी होगी या अकाल मौत मिलती है..?" मंच पर काव्य-पाठ जारी था और श्रवण करने वाले रोमांचित हो रहे थे... हिन्दी दिवस के पूर्व दिवस (शुक्रवार13 सितम्बर 2019)  एम.ओ.पी. महिला वैष्णव महाविद्यालय का सभागार परिसर , विभिन्न म...
Saransh Sagar
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एक बार एक नौजवान लड़के ने सुकरात से पूछा कि सफलता का रहस्य क्या है ? सुकरात ने उस लड़के से कहा कि तुम कल मुझे नदी के किनारे मिलो ! वो मिले और फिर सुकरात ने नौजवान से उनके साथ नदी की तरफ बढ़ने को कहा ! और जब आगे बढ़ते-बढ़ते पानी गले तक पहुँच गया, तभी अचानक सुकरात ने...
Pankaj Chaturvedi
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बोली को इज्जत दिए बगैर नहीं संवरेगी हिंदीपंकज चतुर्वेदीएक ग्रामीण बच्चा, जो स्कूल जाने या अक्षर ज्ञान लेने वाली अपने कुनबे की पहली पीढ़ी है, अक्सर भाषा  को ले कर भटका सा रहता है - एक घर की भाषा जिसमें उसकी वह मां बोलती व समझती है, जिसने उसे पहली बार बोलना-सुनना...
Saransh Sagar
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बहुत समय पहले की बात है, एक गाँव में एक लड़का रहता था. वह बहुत ही गुस्सैल था, छोटी-छोटी बात पर अपना आप खो बैठता और लोगों को भला-बुरा कह देता ! उसकी इस आदत से परेशान होकर एक दिन उसके पिता ने उसे कीलों से भरा हुआ एक थैला दिया और कहा कि , ” अब जब भी तुम्हे गुस्सा आये...
kumarendra singh sengar
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हिन्दी दिवस के बाद हिन्दी की बात करना चर्चा करना कुछ लोगों को ऐसे महसूस होता है जैसे जन्मदिन गुजर जाने के बाद जन्मदिन की बधाई देना. जन्मदिन पर बधाई देना और लेना हमें व्यक्तिगत रूप से कभी पसंद नहीं आया. अब इसे एक तरह की सामाजिक परंपरा कहें या फिर अपने लोगों के बीच ह...