ब्लॉगसेतु

जयदीप शेखर
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         हम पहले यह साफ कर दें कि छायाकारी की तकनीकी जानकारी हमें नहीं है, लेकिन एक कलाप्रेमी होने के नाते हमें थोड़ा-बहुत यह अन्दाजा हो जाता है कि कब किस तरह से तस्वीर खींचनी चाहिए।        ***  ...
राजीव तनेजा
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टीवी...इंटरनेट और मल्टीप्लेक्स से पहले एक समय ऐसा भी था जब मनोरंजन और जानकारी के साधनों के नाम पर हमारे पास दूरदर्शन, रेडियो,अखबारें और बस किताबें होती थी। ऐसे में रेडियो और दूरदर्शन के जलवे से बच निकलने के बाद ज़्यादातर हर कोई कुछ ना कुछ पढ़ता नज़र आता था और पढ़ने की...
Harash Mahajan
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 मेरे हर सफ़ऱ में अगर तुम न होते,ग़मों में गुजरती खिजां रोते-रोते |हैं दुश्मन मिरे इस जहां में बहुत अब,समंदर-ए-वफ़ा में लगे थे जो गोते ।यूँ लिखते हुए 'गम' कलम डगमगाएथका हूँ मैं साहिल ये हुनर ढोते-ढोते |पहर आखिरी जब शब्-ए-हिज्राँ बीती,लुटे हम ख़ुदी में फ़लक होते-होत...
 पोस्ट लेवल : ग़ज़ल
राजीव तनेजा
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"कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता/कहीं ज़मीं नहीं मिलती..कहीं आसमां नहीं मिलता"ज़िन्दगी में हर चीज़ अगर हर बार परफैक्ट तरीके से..एकदम सही से..बिना किसी नुक्स..कमी या कोताही के एक्यूरेट हो..मेरे ख्याल से ऐसा मुमकिन नहीं। बड़े से बड़ा आर्किटेक्ट..शैफ या कोई नामीगिरामी...
निवेदिता श्रीवास्तव
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मन्ज़िलविभा जैसे ज़िंदगी की जद्दोजहद से उबर कर शांत हो चुकी थी । वैभव की तरफ देखते हुए उसने पूछा ,"ले आये न ... कोई दिक्कत तो नहीं हुई न ... कोई उल्टे सीधे प्रश्न तो नहीं किये गए तुमसे ? " वैभव ने इंकार में सिर हिलाया । दोनों शांत बैठे ,बालकनी से झूमते पेड़ - पौध...
रणधीर सुमन
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Kajal Kumar
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Kajal Kumar
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Kajal Kumar
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Kajal Kumar
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