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Ajay Singh
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शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [चतुर्थ-कुमारखण्ड] – अध्याय 15 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पन्द्रहवाँ अध्याय गणेश तथा शिवगणों का भयंकर युद्ध, पार्वती द्वारा दो शक्तियों का प्राकट्य, शक्तियों का अद्भुत पराक्रम और शिव का कुपित होना ब्रह्माजी...
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Ajay Singh
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शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [चतुर्थ-कुमारखण्ड] – अध्याय 14 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः चौदहवाँ अध्याय द्वाररक्षक गणेश तथा शिवगणों का परस्पर विवाद ब्रह्माजी बोले — तब उन गणों ने क्रुद्ध हो शिवजी की आज्ञा से वहाँ जाकर उन द्वारपाल गिरिजापु...
 पोस्ट लेवल : शिवपुराण
Ajay Singh
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शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [चतुर्थ-कुमारखण्ड] – अध्याय 13 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः तेरहवाँ अध्याय गणेशोत्पत्ति का आख्यान, पार्वती का अपने पुत्र गणेश को अपने द्वार पर नियुक्त करना, शिव और गणेश का वार्तालाप सूतजी बोले — तारक के शत्रु...
 पोस्ट लेवल : शिवपुराण
Saransh Sagar
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कई हज़ार वर्ष पुरानी बात है एक तपस्वी ने आम का बगीचा लगाने का विचार किया अपनी कुटिया के आस पास। वह गाँव में गया और लोगों से आम की कुछ कलमें मांगी। लोगों ने कहा कि आप तो तपस्वी हैं आपको तो बबूल को भी अपने प्रेम से आम का पेड़ बना सकते हैं। तपस्वी सोच में पड़ गया तभी किस...
Ajay Singh
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शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [चतुर्थ-कुमारखण्ड] – अध्याय 12 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः बारहवाँ अध्याय विष्णु आदि देवताओं तथा पर्वतों द्वारा कार्तिकेय की स्तुति और वरप्राप्ति, देवताओं के साथ कुमार का कैलासगमन, कुमार को देखकर शिव-पार्वती...
 पोस्ट लेवल : शिवपुराण
Ajay Singh
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शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [चतुर्थ-कुमारखण्ड] – अध्याय 11 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः ग्यारहवाँ अध्याय कार्तिकेय द्वारा बाण तथा प्रलम्ब आदि असुरों का वध, कार्तिकेय चरित के श्रवण का माहात्म्य ब्रह्माजी बोले — हे मुने ! इसी बीच बाण नाम...
 पोस्ट लेवल : शिवपुराण
Saransh Sagar
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एक बार स्वामी विवेकानन्द के पास एक आदमी आया और पूछा – कि प्रभु ! भगवान ने हर इंसान को एक ही जैसा बनाया है फिर भी कुछ लोग अच्छे होते हैं , कुछ बुरे , कुछ सफल होते हैं , कुछ असफल ऐसा क्यों ?स्वामी जी निम्रतापूर्वक कहा कि मैं तुम्हें एक कहानी सुनाता हूँ, ध्यान से सुनो...
Saransh Sagar
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‘‘आपके द्वारा गालियां देने से क्या होता है। जब तक मैं गालियां स्वीकार नहीं करता इसका कोई परिणाम नहीं होगा। एक बार गौतम बुद्ध किसी गांव से गुजर रहे थे। उस गांव के लोगों की गौतम बुद्ध के बारे में गलत धारणा थी जिस कारण वे बुद्ध को अपना दुश्मन मानते थे। जब गौतम बुद्ध ग...
Saransh Sagar
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नदी में हाथी की लाश बही जा रही थी। एक कौए ने लाश देखी, तो प्रसन्न हो उठा, तुरंत उस पर आ बैठा। यथेष्ट मांस खाया। नदी का जल पिया। उस लाश पर इधर-उधर फुदकते हुए कौए ने परम तृप्ति की डकार ली। वह सोचने लगा, अहा! यह तो अत्यंत सुंदर यान है, यहां भोजन और जल की भी कमी नहीं।...
अनीता सैनी
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भटक  रही दर बदर  देखो ! स्नेह  भाव  से  बोल  रही,  अमृत  पात्र  लिये  हाथों  में,सृष्टि, चौखट-चौखट  डोल  रही|विशिष्ट औषधि, जीवनदात्री,सर्वगुणों  का  शृंगार    किये&n...