ब्लॉगसेतु

Rajeev Upadhyay
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संपादक जी,इस सड़ी गर्मी में अपना तो क्‍या अमरीका और ब्रिटेन जैसे बड़े बड़ों का तेल निकल गया, महाराज। बरसात न होने के कारण हमारे अन्‍नमय कोष में महँगाई और चोरबाजारी के पत्‍थर पड़ रहे हैं, हम बड़े चिंताग्रस्‍त और दुखी हैं; पर यदि अपनी उदारता को पसारा देकर सोचें तो हम...
संजीव तिवारी
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 पोस्ट लेवल : DeshDuniya
अनीता सैनी
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स्नेहिल अभिवादन। विशेष शनिवारीय प्रस्तुति में हार्दिक स्वागत है।पिपासा अर्थात प्यास, तृष्णा, चाह, लालसा, लोभ आदि।  जीवन में पिपासा अलग-अलग अर्थों में हमारे साथ अपना असर दिखाती रहती है. पिपासा ही है जो जीवन को क्रियाशील बनाये रखने महती भूमिका निभाती है क्य...
Vidyut Maurya
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विज्ञान केंद्र से हमलोग कारबाइन कोव की तरफ चल पड़े हैं। समंदर के साथ बनी सड़क का सफर बड़ा ही मनोरम है। थोड़ी देर में हमलोग कारबाइन कोव तट पर पहुंच गए हैं। पोर्ट ब्लेयर शाम गुजारने के लिए यह बेहतरीन जगह है। यहां पर दूसरी बार पहुंचा हूं। पर पिछली बार अकेला था। पर इस...
 पोस्ट लेवल : ANDAMAN NICOBAR GOOD FOOD
Arshia Ali Ali
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विरोध का चेहरा या महिलाएं बनीं मोहरा ?दिलों में विरोध की  आग गली -गली शाहीन बाग़ ?अधिकार तो चाहिए लेकिन कर्तव्य कौन निभाएगा ?सी.ए.ए कानून  डर या डराया गया ?हम अपने वाम भाइयों की तरह फतवा ज़ारी नहीं करेंगे ,सवाल उठायेंगे ,ज़वाब आप दें। नागरिकता संशोधन क़ानून य...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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तिल-तिल मिटना जीवन का,विराम स्मृति-खंडहर में मन का। व्यथित किया ताप ने ह्रदय को सीमा तक,वेदना उभरी कराहकररीती गगरी सब्र की अचानक। अज्ञात अभिशाप आतुर हुआ बाँहें पसारे सीमाहीन क्षितिज पर आकुल आवेश में अभिसार को चिर-तृप्ति अभिरा...
 पोस्ट लेवल : अज्ञात अभिशाप कविता
दीपक कुमार  भानरे
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उलझ गये वो कांटों से जनाब ,जब चुन रहे थे फूल ए गुलाब ।कांटों से उलझी जब उनकी उंगली,कुछ घाव बने , कुछ खिचाव बने ,कुछ उंगली में रह गई कांटों की फांस ।खींच खींच कर जब निकली चुनरी,कुछ धागे उलझे , कुछ धागे सुलझे ,कट फट गये चुनरी के कुछ भाग ।कांटों ने यह कैसी बिछाई बिसात...
संजीव तिवारी
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 पोस्ट लेवल : TV
संजीव तिवारी
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 पोस्ट लेवल : DeshDuniya
संजीव तिवारी
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